{"_id":"625f034f678cdb3dba68b430","slug":"also-include-five-slums-in-the-survey-haldwani-news-hld4599869134","type":"story","status":"publish","title_hn":"पांच मलिन बस्तियों को भी सर्वे में शामिल होने","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पांच मलिन बस्तियों को भी सर्वे में शामिल होने
विज्ञापन
मलिन बस्तियों को सर्वे से हटाए जाने के खिलाफ हल्द्वानी के नगर निगम में धरना प्रदर्शन करते मलिन बस
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हल्द्वानी। मलिन बस्तियों के सर्वे से पांच मलिन बस्तियों को हटाए जाने से गुस्साए लोगों ने पार्षदों के साथ मिलकर मंगलवार को नगर निगम में जमकर प्रदर्शन किया। उन्होंने नगर आयुक्त के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। साथ ही पांच बस्तियों के सर्वे कराने की मांग भी की। दो घंटे प्रदर्शनकारी नगर निगम में ही डटे रहे।
शासन के आदेश के बाद नगर निगम नगरीय मलिन बस्ती विनियमितीकरण, सुधार व पुनर्विकास, पुनर्वासन/पुनर्व्यस्थापन एवं अतिक्रमण निषेघ अधिनियम 2016 के तहत सर्वे की तैयारी कर रहा है। पहले नगर निगम ने इस सर्वे में 22 मलिन बस्तियों को शामिल किया था लेकिन सोमवार को इस आदेश में संशोधन करते हुए पांच मलिन बस्तियों को इसमें से हटा दिया।
इन बस्तियों में रहने वाले लोग इससे गुस्से में आ गए। मंगलवार को कई पार्षदों के नेतृत्व में आक्रोशित लोग नगर निगम कार्यालय पहुंचे। उन्होंने नगर आयुक्त के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। साथ ही अल्पसंख्यकों को हटाने का आरोप लगाया। पार्षद शकील अंसारी, लईक कुरैशी, तौफिक अहमद, गुड्डु वारसी सहित कई पार्षदों ने आरोप लगाया कि गजट नोटिफिकेशन में साफ लिखा है कि निकाय श्रेणी तीन के अंतर्गत इन बस्तियों को सर्वे करेगा। कहा कि गजट में साफ है कि अगर वाद अदालत में लंबित हो तब भी सर्वे किया जाएगा लेकिन नगर निगम सर्वे करने को तैयार नहीं है। निगम ने पांच बस्तियों को हटा दिया है। आरोप लगाया कि वह इसके खिलाफ हाईकोर्ट में जल्द ही पीआईएल दायर करेंगे। प्रदर्शन करने वालों में पूर्व सभासद शकील अहमद सलमानी, ध्रुव कश्यप, रोहित कुमार, जैबा वारसी, मो. गुफरान सहित कई लोग मौजूद रहे।
विज्ञापन
नगर निगम शासनादेश का पालन नहीं करने का आरोप
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने मुख्य सचिव को सौंपा ज्ञापन
विधायकों के साथ सुमित हृदयेश ने मुख्यमंत्री को सौंपा पत्र
माई सिटी रिपोर्टर
हल्द्वानी। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या ने कांग्रेसी विधायकों के साथ मुख्य सचिव से मुलाकात कर नगर निगम हल्द्वानी पर शासनादेश का पालन नहीं करने का आरोप लगाया। साथ ही नगर निगम की कार्यवाही पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए सर्वे में पांच बस्तियों को भी शामिल करने की मांग की। उधर हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश ने कांग्रेसी विधायकों के साथ मुख्यमंत्री से मिलकर पांच बस्तियों का भी सर्वे कराने की मांग की।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य की ओर से मुख्य सचिव को सौंपे ज्ञापन में नगर निगम और जिला प्रशासन की कार्यवाही को भेदभावपूर्ण कार्यवाही बताया।
विधायक सुमित ने शासनादेश का पालन नहीं करने का लगाया आरोप
हल्द्वानी। हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश ने मलिन बस्तियों के सर्वे से पांच बस्ती हटाने का विरोध किया है। साथ ही नगर निगम पर शासनादेश का पालन नहीं करने का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि नगर निगम ने जिन 17 मलिन बस्तियों में सर्वे कराने की सूची जारी की है। उसमें तीन बस्ती वन भूमि में बसी है। वहीं एक बस्ती केनाल की जमीन में बसी है। इनका सर्वे कराया जा रहा है जबकि पांच बस्तियों को रेलवे का अतिक्रमण बताकर उनका सर्वे नहीं कराया जा रहा है। नगर निगम के अधिकारी इस शासनादेश का भी पालन नहीं कर रहे हैं।
- श्रेणी तीन में साफ कहा गया है कि ऐसी मलिन बस्तियों का सर्वे भी किया जाएगा जो ऐसी भूमि पर अवस्थित अधिवासों को वर्गीकृत किया जा सकेगा, जहां भू-स्वामित्व, अधिकार प्रदान किया जाना विधिक/व्यवहारिक, मानव निवास, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के दृष्टिकोण से उपयुक्त न हो।
- रक्षा विभाग से संबंधित भूमि
- राज्य सार्वजनिक उपयोगार्थ रक्षित भूमि
- विवादित भूमि, जिस पर किसी विधि न्यायालय के समक्ष कार्यवाही लंबित हो।
- श्रेणी तीन की मलिन बस्ती में कब्जे वाले परिवार को स्व-स्थल पर कोई भू-स्वामित्व अधिकार प्रदान नहीं किया जा सकेगा। लोकहित में प्रभावित समुदाय से परामर्श के उपरांत उन्हें मूलभूत अवस्थापना वाले वैकल्पिक स्थलों में पहचान पत्र के आधार पर भू-स्वामित्व अधिकारों के साथ पुनर्वासित किया जा सकेगा। ऐसे परिवारों से भूमि एवं भवन की धनराशि राज्य सरकार की ओर से निर्धारित दर के आधार पर ली जाएगी।
विज्ञापन
शासन के आदेश के बाद नगर निगम नगरीय मलिन बस्ती विनियमितीकरण, सुधार व पुनर्विकास, पुनर्वासन/पुनर्व्यस्थापन एवं अतिक्रमण निषेघ अधिनियम 2016 के तहत सर्वे की तैयारी कर रहा है। पहले नगर निगम ने इस सर्वे में 22 मलिन बस्तियों को शामिल किया था लेकिन सोमवार को इस आदेश में संशोधन करते हुए पांच मलिन बस्तियों को इसमें से हटा दिया।
विज्ञापन
इन बस्तियों में रहने वाले लोग इससे गुस्से में आ गए। मंगलवार को कई पार्षदों के नेतृत्व में आक्रोशित लोग नगर निगम कार्यालय पहुंचे। उन्होंने नगर आयुक्त के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। साथ ही अल्पसंख्यकों को हटाने का आरोप लगाया। पार्षद शकील अंसारी, लईक कुरैशी, तौफिक अहमद, गुड्डु वारसी सहित कई पार्षदों ने आरोप लगाया कि गजट नोटिफिकेशन में साफ लिखा है कि निकाय श्रेणी तीन के अंतर्गत इन बस्तियों को सर्वे करेगा। कहा कि गजट में साफ है कि अगर वाद अदालत में लंबित हो तब भी सर्वे किया जाएगा लेकिन नगर निगम सर्वे करने को तैयार नहीं है। निगम ने पांच बस्तियों को हटा दिया है। आरोप लगाया कि वह इसके खिलाफ हाईकोर्ट में जल्द ही पीआईएल दायर करेंगे। प्रदर्शन करने वालों में पूर्व सभासद शकील अहमद सलमानी, ध्रुव कश्यप, रोहित कुमार, जैबा वारसी, मो. गुफरान सहित कई लोग मौजूद रहे।
विज्ञापन
नगर निगम शासनादेश का पालन नहीं करने का आरोप
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने मुख्य सचिव को सौंपा ज्ञापन
विधायकों के साथ सुमित हृदयेश ने मुख्यमंत्री को सौंपा पत्र
माई सिटी रिपोर्टर
हल्द्वानी। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या ने कांग्रेसी विधायकों के साथ मुख्य सचिव से मुलाकात कर नगर निगम हल्द्वानी पर शासनादेश का पालन नहीं करने का आरोप लगाया। साथ ही नगर निगम की कार्यवाही पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए सर्वे में पांच बस्तियों को भी शामिल करने की मांग की। उधर हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश ने कांग्रेसी विधायकों के साथ मुख्यमंत्री से मिलकर पांच बस्तियों का भी सर्वे कराने की मांग की।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य की ओर से मुख्य सचिव को सौंपे ज्ञापन में नगर निगम और जिला प्रशासन की कार्यवाही को भेदभावपूर्ण कार्यवाही बताया।
विधायक सुमित ने शासनादेश का पालन नहीं करने का लगाया आरोप
हल्द्वानी। हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश ने मलिन बस्तियों के सर्वे से पांच बस्ती हटाने का विरोध किया है। साथ ही नगर निगम पर शासनादेश का पालन नहीं करने का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि नगर निगम ने जिन 17 मलिन बस्तियों में सर्वे कराने की सूची जारी की है। उसमें तीन बस्ती वन भूमि में बसी है। वहीं एक बस्ती केनाल की जमीन में बसी है। इनका सर्वे कराया जा रहा है जबकि पांच बस्तियों को रेलवे का अतिक्रमण बताकर उनका सर्वे नहीं कराया जा रहा है। नगर निगम के अधिकारी इस शासनादेश का भी पालन नहीं कर रहे हैं।
- श्रेणी तीन में साफ कहा गया है कि ऐसी मलिन बस्तियों का सर्वे भी किया जाएगा जो ऐसी भूमि पर अवस्थित अधिवासों को वर्गीकृत किया जा सकेगा, जहां भू-स्वामित्व, अधिकार प्रदान किया जाना विधिक/व्यवहारिक, मानव निवास, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के दृष्टिकोण से उपयुक्त न हो।
- रक्षा विभाग से संबंधित भूमि
- राज्य सार्वजनिक उपयोगार्थ रक्षित भूमि
- विवादित भूमि, जिस पर किसी विधि न्यायालय के समक्ष कार्यवाही लंबित हो।
- श्रेणी तीन की मलिन बस्ती में कब्जे वाले परिवार को स्व-स्थल पर कोई भू-स्वामित्व अधिकार प्रदान नहीं किया जा सकेगा। लोकहित में प्रभावित समुदाय से परामर्श के उपरांत उन्हें मूलभूत अवस्थापना वाले वैकल्पिक स्थलों में पहचान पत्र के आधार पर भू-स्वामित्व अधिकारों के साथ पुनर्वासित किया जा सकेगा। ऐसे परिवारों से भूमि एवं भवन की धनराशि राज्य सरकार की ओर से निर्धारित दर के आधार पर ली जाएगी।