{"_id":"9b394bcd24c650410b9301987543439a","slug":"alcohol-policy-decision-on-a-petition-challenging-the-december-23-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शराब नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर निर्णय 23 दिसंबर को ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शराब नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर निर्णय 23 दिसंबर को
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल।
Updated Tue, 22 Dec 2015 01:27 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट ने शराब नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। निर्णय सुनाने के लिए 23 दिसंबर की तिथि नियत की है। खास बात यह रही कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार की शराब नीति के विरोध में कंपनी की ओर से पक्ष रखने के लिए पी. चिदंबरम दूसरी बार हाईकोर्ट आए थे।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की एकलपीठ के समक्ष सोमवार को मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार मैसर्स यूनाईटेड स्प्रिट्स लिमिटेड ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार ने उनकी मदिरा की डिमांड कम कर दी है। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से देश के पूर्व वित्त मंत्री एवं सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदंबरम तथा सरकारी वकीलों के बीच जोरदार बहस हुई।
विज्ञापन
चिदंबरम ने कहा कि राज्य की आबकारी नीति में प्रावधान है कि विभिन्न ब्रांडों का न्यूनतम स्टॉक रखा जाना अनिवार्य है तथा फुटकर अनुज्ञापी की मांग के अनुसार उसे विभिन्न ब्रांडों की शराब उपलब्ध कराई जाएगी।
विज्ञापन
सरकार की ओर से महाधिवक्ता यूके उनियाल व उनके सहयोगी व मंडी परिषद के अधिवक्ता विपुल शर्मा ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों के अनुरूप शराब व्यवसाय मौलिक अधिकार नहीं है तथा राज्य की आबकारी नीति में व्यवसाइयों तथा थोक विक्रेता मंडी परिषद के बीच विवाद की स्थिति में आपसी बातचीत, आर्बिट्रेशन का प्रावधान है अत: बगैर आर्बिट्रेशन के सीधे रिट दायर करने पर याचिका पोषणीय नहीं है। पक्षों की सुनवाई के बाद एकलपीठ ने निर्णय को सुरक्षित रखते हुए फैसले के लिए 23 दिसंबर नियत की है।