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जर्जर भवन में चल रहा सौ वर्ष पुराना ऐतिहासिक पशु अस्पताल
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नैनीताल। जिला मुख्यालय का पशु चिकित्सालय जर्जर हो चुकी कई दशक पुरानी बिल्डिंग में चल रहा है। इस जर्जर पशु चिकित्सालय में कार्यरत स्टाफ खतरे की जद में काम करने को मजबूर है। वर्ष 1919 में बनी इस अस्पताल की हालत यह है कि इसके जर्जर भवन में किसी भी समय अप्रिय घटना हो सकती है।
बता दें कि ब्रिटिश काल मे बने नैनीताल पशु चिकित्सालय भवन सौ साल से भी पुराना है। जिसका कार्यक्षेत्र आसपास के इलाके में दूर तक फैला हुआ है।खस्ताहाल भवनों से आसपास के स्थानीय भवनों पर भी खतरा मंडरा रहा है। कई दशक पहले बने भवनों की हालत काफी खस्ता हो चुकी है और गिरने की कगार पर हैं। एक ओर जहां सरकार नित नए निर्माण कार्य करते हुए विकास को बढ़ावा दे रही है, वही दूसरी ओर पशु अस्पताल की अनदेखी कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। जानकारी के अनुसार यहां कई वर्षो से रंग रोगन का कार्य तक नहीं किया गया है। आयदिन नगर और मुख्यालय के आस पास रहने वाले लोग यहां अपने पशुओं के इलाज को पहुचते है। जर्जर बिल्डिंग में ही इस पशुओं का इलाज होता है।
पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. हेमा राठौर ने कहा कि अस्पताल की मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। जब जांच टीम ने अस्पताल का मौका मुआयना किया, तो उनका साफ तौर से ये कहना था कि भवन की मरम्मत करने में बिल्डिंग गिर सकती है। भवन को तोड़कर नए सिरे से ही बनाना होगा। दो वर्ष बीत जाने के बाद कानूनी पेंच के चलते भवन का निर्माण नहीं हो पा रहा है।
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खुले में है बिजली का मीटर
नैनीताल। बिल्डिंग के साथ ही यहां लगे बिजली के मीटर की भी हालत काफी जर्जर हो चुकी है। जर्जर तार जानलेवा साबित हो सकते है। ऐसे में विभाग के कर्मचारी काम कर रहे है। वहीं ऐसे मीटर की वजह से हर समय शॉर्ट सर्किट का खतरा बना रहता है।
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बता दें कि ब्रिटिश काल मे बने नैनीताल पशु चिकित्सालय भवन सौ साल से भी पुराना है। जिसका कार्यक्षेत्र आसपास के इलाके में दूर तक फैला हुआ है।खस्ताहाल भवनों से आसपास के स्थानीय भवनों पर भी खतरा मंडरा रहा है। कई दशक पहले बने भवनों की हालत काफी खस्ता हो चुकी है और गिरने की कगार पर हैं। एक ओर जहां सरकार नित नए निर्माण कार्य करते हुए विकास को बढ़ावा दे रही है, वही दूसरी ओर पशु अस्पताल की अनदेखी कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। जानकारी के अनुसार यहां कई वर्षो से रंग रोगन का कार्य तक नहीं किया गया है। आयदिन नगर और मुख्यालय के आस पास रहने वाले लोग यहां अपने पशुओं के इलाज को पहुचते है। जर्जर बिल्डिंग में ही इस पशुओं का इलाज होता है।
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पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. हेमा राठौर ने कहा कि अस्पताल की मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। जब जांच टीम ने अस्पताल का मौका मुआयना किया, तो उनका साफ तौर से ये कहना था कि भवन की मरम्मत करने में बिल्डिंग गिर सकती है। भवन को तोड़कर नए सिरे से ही बनाना होगा। दो वर्ष बीत जाने के बाद कानूनी पेंच के चलते भवन का निर्माण नहीं हो पा रहा है।
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खुले में है बिजली का मीटर
नैनीताल। बिल्डिंग के साथ ही यहां लगे बिजली के मीटर की भी हालत काफी जर्जर हो चुकी है। जर्जर तार जानलेवा साबित हो सकते है। ऐसे में विभाग के कर्मचारी काम कर रहे है। वहीं ऐसे मीटर की वजह से हर समय शॉर्ट सर्किट का खतरा बना रहता है।