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बीमा कर्मचारियों की हुंकार, नहीं बढ़ने देंगे एफडीआई
Nainital
Updated Wed, 17 Dec 2014 05:30 AM IST
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हल्द्वानी। बीमा उद्योग में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा 26 से बढ़ाकर 49 प्रतिशत करने के विरोध में बीमा कर्मियों ने दोपहर भोजनावकाश में विरोध प्रदर्शन किया। मंडलीय कार्यालय में आयोजित प्रदर्शन में अधिकारी भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि इसके विरोध में बीमा कर्मचारी देशभर में एक दिनी हड़ताल करेंगे।
बीमा कर्मचारी संघ हल्द्वानी डिवीजन के उपाध्यक्ष भानु प्रकाश उपाध्याय ने कहा यूपीए सरकार ने 2008 में राज्यसभा में बीमा कानून सुधार बिल प्रस्तुत किया था। तब एआईआईईए के नेतृत्व में बीमा कर्मियों ने विरोध कर एक दिनी हड़ताल की थी। राज्यसभा में भाजपा सदस्यों ने इसका विरोध किया था, जिसके चलते बिल को स्टैंडिंग कमेटी पर छोड़ दिया। अध्यक्ष खुद यशवंत सिन्हा थे, जिन्होंने अपनी रिपोर्ट में बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा 26 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने की आवश्यकता को नकार दिया था।
मंडलीय महामंत्री डीके पांडे ने कहा 1991 में आर्थिक विकास के नाम उदारीकरण, निजीकरण की नीतियों को तत्कालीन सरकारों ने देश की जनता पर थोपा दिया, जिसके दुष्परिणाम अब सामने हैं। आफीसर एसोसिएशन के महामंत्री बृजेश नरियाल ने कहा कि बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा को बढ़ाने का कोई भी न्यायोचित कारण नहीं है। इस दौरान कर्मचारी संघ के संगठन मंत्री केएन भट्ट, कोषाध्यक्ष केएस धामी, अशोक कश्यप, अखिल शर्मा, पंकज त्रिपाठी, कमल पांडे, रविंद्र कुमार, हेमंत कुमार, एसएस मर्तोलिया, पीएम शर्मा, ओपी पांडे, पीसी जोशी, अमर सिंह नेगी, नवीन गुर्रानी, एमसी पांडे, प्रकाश स्वरूप, पंचम सिंह, कमल भट्ट, गीता गुर्रानी, जमुना मर्तोलिया, निरूपमा पाठक, प्रेरणा नेगी, गीता आर्या, ममता खोलिया, निर्मला कुरियाल मौजूद थी।
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बीमा कर्मचारी संघ हल्द्वानी डिवीजन के उपाध्यक्ष भानु प्रकाश उपाध्याय ने कहा यूपीए सरकार ने 2008 में राज्यसभा में बीमा कानून सुधार बिल प्रस्तुत किया था। तब एआईआईईए के नेतृत्व में बीमा कर्मियों ने विरोध कर एक दिनी हड़ताल की थी। राज्यसभा में भाजपा सदस्यों ने इसका विरोध किया था, जिसके चलते बिल को स्टैंडिंग कमेटी पर छोड़ दिया। अध्यक्ष खुद यशवंत सिन्हा थे, जिन्होंने अपनी रिपोर्ट में बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा 26 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने की आवश्यकता को नकार दिया था।
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मंडलीय महामंत्री डीके पांडे ने कहा 1991 में आर्थिक विकास के नाम उदारीकरण, निजीकरण की नीतियों को तत्कालीन सरकारों ने देश की जनता पर थोपा दिया, जिसके दुष्परिणाम अब सामने हैं। आफीसर एसोसिएशन के महामंत्री बृजेश नरियाल ने कहा कि बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा को बढ़ाने का कोई भी न्यायोचित कारण नहीं है। इस दौरान कर्मचारी संघ के संगठन मंत्री केएन भट्ट, कोषाध्यक्ष केएस धामी, अशोक कश्यप, अखिल शर्मा, पंकज त्रिपाठी, कमल पांडे, रविंद्र कुमार, हेमंत कुमार, एसएस मर्तोलिया, पीएम शर्मा, ओपी पांडे, पीसी जोशी, अमर सिंह नेगी, नवीन गुर्रानी, एमसी पांडे, प्रकाश स्वरूप, पंचम सिंह, कमल भट्ट, गीता गुर्रानी, जमुना मर्तोलिया, निरूपमा पाठक, प्रेरणा नेगी, गीता आर्या, ममता खोलिया, निर्मला कुरियाल मौजूद थी।
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