फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   अनोखी घटना का गवाह बना मंगलयान

अनोखी घटना का गवाह बना मंगलयान

Mon, 20 Oct 2014 05:33 AM IST
Nainital
Nainital Updated Mon, 20 Oct 2014 05:33 AM IST
विज्ञापन
नैनीताल। खगोलीय घटनाओं के क्रम में रविवार की रात्रि अहम् रही। लाखों सालों के अंतराल के बाद साइडिंग स्प्रिंग धूमकेतु मंगल के करीब से गुजरा। रात्रि में हुई इस घटना को भारतीय अंतरिक्ष शोध संगठन इसरो की ओर से छोड़े गए मंगलयान ने भी नजदीक से निहारकर घटनाओं को कै द किया। जो भविष्य में धूमकेतु तथा उसके लाल ग्रह पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में जानकारी हांसिल करने में अहम् साबित होंगी।
विज्ञापन

बता दें कि लगभग 800 मीटर व्यास के तथा वर्ष 2013 में खोजे गए साइडिंग स्प्रिंग धूमकेतु के रविवार को मंगल गृह से करीब से गुजरने की संभावनाओं के चलते इसरो, नासा समेत सभी खगोल वैज्ञानिकों की नजरें इसपर गढ़ी हुई थी। मंगल गृह की कक्षा में प्रवेश की रात्रि लगभग 12.27 से 1.39 बजे की समयावधि पर मंगलयान समेत विभिन्न माध्यमों से धूमकेतु के संबंध में सचित्र जानकारी एकत्र की गई।
विज्ञापन

एरीज के वैज्ञानिक डा.योगेश जोशी बताते हैं कि वायुमंडल में शून्य डिग्री से नीचे के तापमान पर पानी ठोस वस्तु में बदल जाता है और धूमकेतु के रूप में सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने लगता है। सैकड़ों हजारों सालों की परिक्रमा में उसके बाहरी आवरण पर धूल, आयरन पार्टिकिल्स समेत वायुमंडल में मौजूद अन्य तत्व चिपक जाते हैं. जो उसके व्यास में बढ़ोत्तरी के सात उसे ठोस बनाते हैं। ऐसे हजारों कामेट वायुमंडल में घूम रहे हैं। जो कई बार बृहस्पति, शनि, वरूण, अरूण आदि ग्रहों की कक्षाओं से गुजरते हैं। सूर्य के नजदीक आने पर इनकी बर्फ पिघलने लगती है। इस दौरान धूमकेतु का पिघला हुआ हिस्सा चमकीला नजर आता है। पिघली हुई बर्फ पानी बनकर धूल के कण, आयरन पार्टिकिल आदि के साथ पीछे की ओर गिरती है, जिसे पूंछ के रूप में देखा जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

डा.जोशी बताते हैं इस धूमकेतु की मंगल ग्रह में पहुंचने की यह पहली घटना है। इसका व्यास बड़ा होने तथा मंगल ग्रह के करीब से गुजरने के कारण वैज्ञानिकों के लिए यह घटना अहम् है। उन्होंने कहा कि इससे मंगलयान अथवा किसी को खतरा नहीं है। वैज्ञानिक इनकी चाल के अनुरूप यान अथवा सेटेलाइट को स्थापित करते हैं और आवश्यक्ता पड़ने पर स्थान परिवर्तन भी करते हैं। इसके विकीरण से सेटेलाइट के कम्यूनिकेशन में आंशिक प्रभाव की संभावनाएं रहती है, लेकिन वैज्ञानिक इसपर भी नजर रखते हैं। उन्होंने कहा कि घटना के चित्र इस संबंध में जानकारी जुटाने में मददगार साबित होंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed