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स्वामी मुक्तानंद जी ने त्यागा शरीर
Nainital
Updated Sun, 02 Mar 2014 05:31 AM IST
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हल्द्वानी। स्वामी मुक्तानंद उदासीन (93) ने शनिवार को शरीर त्याग दिया। उन्होंने परिजनों से अपनी देह को मेडिकल कालेज को दान करने की इच्छा जताई थी। स्वामी जी के शरीर त्यागने के बाद परिजनों ने उनके पार्थिव शरीर को मेडिकल कालेज में रिसर्च के लिए दे दिया।
स्वामी मुक्तानंद उदासीन ने गृहस्थ जीवन त्याग दिया था। उनके घर का नाम होरी लाल गुप्ता था। स्वामी मुक्तानंद जी नगर पालिका के सदस्य भी रहे थे। युवा अवस्था से वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक रहे और विहिप के गठन के बाद कई पदों पर रहे। रामजन्म भूमि आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। हल्द्वानी में कई धार्मिक संगठनों से भी जुड़े रहे।
1996 में उदासीन संप्रदाय के संत कल्याणदास उदासीन महाराज से संन्यास लेने की दीक्षा ली। पुत्रवधू विमला गुप्ता ने बताया कि गृहस्थ जीवन छोड़ने के बाद स्वामी मुक्तानंद उदासीन धार्मिक संस्थाओं से जुड़ गए। पिछले साल उन्होंने मृत्यु होने के बाद शरीर को मेडिकल कालेज को देने की इच्छा जताई थी। पुत्रवधू विमला ने बताया कि शनिवार को उन्होंने शरीर त्याग दिया। बरेली रोड स्थित उनके आवास से मेडिकल कालेज तक प्रस्थान यात्रा निकाली गई। यात्रा बाजारों में घूमते हुए मेडिकल कालेज पहुंची और स्वामी जी का शरीर मेडिकल कालेज को सौंपा गया।
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स्वामी मुक्तानंद उदासीन ने गृहस्थ जीवन त्याग दिया था। उनके घर का नाम होरी लाल गुप्ता था। स्वामी मुक्तानंद जी नगर पालिका के सदस्य भी रहे थे। युवा अवस्था से वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक रहे और विहिप के गठन के बाद कई पदों पर रहे। रामजन्म भूमि आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। हल्द्वानी में कई धार्मिक संगठनों से भी जुड़े रहे।
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1996 में उदासीन संप्रदाय के संत कल्याणदास उदासीन महाराज से संन्यास लेने की दीक्षा ली। पुत्रवधू विमला गुप्ता ने बताया कि गृहस्थ जीवन छोड़ने के बाद स्वामी मुक्तानंद उदासीन धार्मिक संस्थाओं से जुड़ गए। पिछले साल उन्होंने मृत्यु होने के बाद शरीर को मेडिकल कालेज को देने की इच्छा जताई थी। पुत्रवधू विमला ने बताया कि शनिवार को उन्होंने शरीर त्याग दिया। बरेली रोड स्थित उनके आवास से मेडिकल कालेज तक प्रस्थान यात्रा निकाली गई। यात्रा बाजारों में घूमते हुए मेडिकल कालेज पहुंची और स्वामी जी का शरीर मेडिकल कालेज को सौंपा गया।
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