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आठ महीने बाद भी भारत-चीन सीमा पर अंधेरा
Nainital
Updated Tue, 11 Feb 2014 05:44 AM IST
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हल्द्वानी। जिला मुख्यालयों में धड़ाधड़ शिलान्यास-लोकार्पण करने में जुटी सरकार को शायद गांवों का अभी अंदाजा नहीं है। भारत-चीन सीमा पर बसे धारचूला (पिथौरागढ़) के कई आपदाग्रस्त गांवों में आठ महीने बाद भी बिजली आपूर्ति सुचारू नहीं हो पाई है। यह सुरक्षा की दृष्टि से भी खतरनाक है। हाल-फिलहाल बिजली आने की भी कोई संभावना नहीं है। लाइनों को दुरुस्त करने के लिए पावर कारपोरेशन अभी तक टेंडर भी नहीं करा पाया है। मार्च में टेंडर होने के बाद काम शुरू होगा और इसके बाद जून तक बिजली मिल पाएगी। यह अफसरों का दावा है।
17 जून को आई आपदा में धारचूला के 54 राजस्व गांवों के अलावा करीब 130 तोकों की बिजली गुल हो गई थी। इसमें करीब 23 राजस्व गांव निचले हिमालयी क्षेत्रों के हैं, 31 राजस्व गांव और 130 तोक उच्च हिमालयी क्षेत्र में प्रभावित हुए थे। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बिजली की जिम्मेदारी जल विद्युत निगम के पास है। जबकि निचले क्षेत्रों में यूपीसीएल यह व्यवस्था संभालता है। निचले क्षेत्रों में तो सप्लाई सुचारु हो चुकी है लेकिन उच्च हिमालयी क्षेत्र के 12 राजस्व गांवों और पांच तोक आज भी अंधेरे में है। इन गांवों के सैकड़ों लोग सीमा की सुरक्षा का भी काम करते हैं। सीमा पर बसे इन गांवों में जल्द सप्लाई सुचारु होने की भी संभावना नहीं है।
पिथौरागढ़ के ईई राजेश मौर्य कहते हैं कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सप्लाई की जिम्मेदारी जलविद्युत निगम की थी। इन गांवों को पंचवटी पावर हाउस से लाइट मिलती थी। पावर हाउस बहने के बाद यूपीसीएल ने इन गांवों की जिम्मेदारी ली और कई गांवों में आपूर्ति सुचारु कर दी। बचे हुए गांवों और तोकों में लाइन दुरुस्त करने का काम होना है। इसके लिए मार्च में टेंडर कराए जाने हैं। इसके बाद काम शुरू होगा और जून तक बिजली सप्लाई सुचारु कर दी जाएगी।
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17 जून को आई आपदा में धारचूला के 54 राजस्व गांवों के अलावा करीब 130 तोकों की बिजली गुल हो गई थी। इसमें करीब 23 राजस्व गांव निचले हिमालयी क्षेत्रों के हैं, 31 राजस्व गांव और 130 तोक उच्च हिमालयी क्षेत्र में प्रभावित हुए थे। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बिजली की जिम्मेदारी जल विद्युत निगम के पास है। जबकि निचले क्षेत्रों में यूपीसीएल यह व्यवस्था संभालता है। निचले क्षेत्रों में तो सप्लाई सुचारु हो चुकी है लेकिन उच्च हिमालयी क्षेत्र के 12 राजस्व गांवों और पांच तोक आज भी अंधेरे में है। इन गांवों के सैकड़ों लोग सीमा की सुरक्षा का भी काम करते हैं। सीमा पर बसे इन गांवों में जल्द सप्लाई सुचारु होने की भी संभावना नहीं है।
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पिथौरागढ़ के ईई राजेश मौर्य कहते हैं कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सप्लाई की जिम्मेदारी जलविद्युत निगम की थी। इन गांवों को पंचवटी पावर हाउस से लाइट मिलती थी। पावर हाउस बहने के बाद यूपीसीएल ने इन गांवों की जिम्मेदारी ली और कई गांवों में आपूर्ति सुचारु कर दी। बचे हुए गांवों और तोकों में लाइन दुरुस्त करने का काम होना है। इसके लिए मार्च में टेंडर कराए जाने हैं। इसके बाद काम शुरू होगा और जून तक बिजली सप्लाई सुचारु कर दी जाएगी।
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