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क्यों विवादों में रहता है स्पेशल आपरेशन ग्रुप?
Nainital
Updated Wed, 28 Aug 2013 05:35 AM IST
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हल्द्वानी। बड़े अपराधों के खुलासे को गठित स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) क्यों विवादों में रहता है। आखिर ऐसा क्या है कि ये स्पेशल फोर्स अपने काम से ज्यादा कर्मचारियों के अनुशासनहीनता और व्यवहार से सुर्खियों में रहा है। सेक्स रैकेट में मिलीभगत जैसे गंभीर आरोपों में लिप्त मिले एसओजी के हैड कांस्टेबल सतेंद्र गंगोला और सिपाही विजेंद्र चौहान आरोपों के बाद लाइन हाजिर तो कर दिए गए, लेकिन क्या फिर उनकी एसओजी में वापसी हो पाएगी? ये दिलचस्प सवाल है।
ये पहला मौका नहीं है जब एसओजी के किसी कर्मचारी पर इस तरह के गंभीर आरोप लगे हो। अवैध संबंध हो, सेक्स रैकेट के जरिए ब्लैकमेलिंग, शराब तस्करों और सटोरिए-जुआरियों से मिलीभगत, जबरन महिलाओं के घर में घुसकर हंगामा करना या वाहन चोरों से मिलीभगत कर रुपये कमाना। इस तरह के सभी आरोप पिछले कुछ सालों में इस स्पेशल फोर्स के सिपाही से लेकर दारोगा तक लगे हैं, जिनमें एक इंचार्ज भी शामिल था। सभी मामलों में जांच के बाद उन्हें दोषी पाकर कार्रवाई की गई, जिनमें से ज्यादातर की फिर एसओजी में वापसी हुई। कुछ ने कोशिश बहुत की, मगर हो नहीं पाई। एसओजी के विवादों में रहने की एक बड़ी वजह उसको दी गई असीमित पॉवर भी है। एसओजी का कार्यक्षेत्र पूरे जनपद में है। मोबाइल सर्विलांस जैसा बड़ा हथियार भी एसओजी के पास ही है। वह कभी किसी भी थाना क्षेत्र में किसी मामले में छापेमारी कर सकते हैं। खाकी वर्दी न होना भी उनके लिए एक बड़ा अच्छा हथियार साबित हो रहा है।
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ये पहला मौका नहीं है जब एसओजी के किसी कर्मचारी पर इस तरह के गंभीर आरोप लगे हो। अवैध संबंध हो, सेक्स रैकेट के जरिए ब्लैकमेलिंग, शराब तस्करों और सटोरिए-जुआरियों से मिलीभगत, जबरन महिलाओं के घर में घुसकर हंगामा करना या वाहन चोरों से मिलीभगत कर रुपये कमाना। इस तरह के सभी आरोप पिछले कुछ सालों में इस स्पेशल फोर्स के सिपाही से लेकर दारोगा तक लगे हैं, जिनमें एक इंचार्ज भी शामिल था। सभी मामलों में जांच के बाद उन्हें दोषी पाकर कार्रवाई की गई, जिनमें से ज्यादातर की फिर एसओजी में वापसी हुई। कुछ ने कोशिश बहुत की, मगर हो नहीं पाई। एसओजी के विवादों में रहने की एक बड़ी वजह उसको दी गई असीमित पॉवर भी है। एसओजी का कार्यक्षेत्र पूरे जनपद में है। मोबाइल सर्विलांस जैसा बड़ा हथियार भी एसओजी के पास ही है। वह कभी किसी भी थाना क्षेत्र में किसी मामले में छापेमारी कर सकते हैं। खाकी वर्दी न होना भी उनके लिए एक बड़ा अच्छा हथियार साबित हो रहा है।
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