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आचार्य डबराल का साहित्य आज भी प्रासंगिक
Nainital
Updated Mon, 24 Dec 2012 05:31 AM IST
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नैनीताल। विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि भूगोलविद, इतिहासकार, साहित्यकार तथा शिक्षक आचार्य शिव प्रसाद डबराल की धरोहर में छिपा ज्ञान आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने इसे भविष्य के लिए उपयोगी बनाए जाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि इसके लिए वह निजी स्तर पर प्रयास करेंगे। सरकार के सामने मामले को प्रमुखता से रखेंगे। उन्होंने आचार्य की कृतियों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की भी वकालत की।
पहाड़ संस्था के तत्वावधान में राज्य अतिथि गृह में आचार्य शिव प्रसाद डबराल के जन्म शताब्दी समारोह में इतिहासकार शेखर पाठक ने आचार्य डबराल के जीवन परिचय तथा उनके कार्यों पर प्रकाश डाला। अध्यक्षीय भाषण में डा.आरएस टोलिया ने कहा कि आचार्य डबराल ने विपरीत परिस्थितियों में विभिन्न पक्षों को साहित्य के साथ जोड़कर अभिनव पहल की। प्रो. सुनील कुमार ने डबराल की लेखनी में छिपी उनकी पीड़ा को प्रदर्शित किया। डा.बीडीे एस नेगी ने आचार्य की ज्ञान धरोहर का ग्रंथीकरण व प्रस्तुतिकरण की वकालत की तो डीडी कोशांबी न भूतो न भविष्यति श्लोक पढ़कर कहा कि ऐसा पथ प्रदर्शक न कभी हुआ है न होगा। प्रो.अजय रावत ने आचार्य डबराल की नजरों से गढ़वाल के इतिहास के बारे में बताया। संचालन कर रहे प्रो.गिरजा पांडे ने आचार्य डबराल को समर्पित एक फिल्म भी दिखाई। इसमें 10 अक्तूबर 1999 में हुए आचार्य डबराल के सम्मान की झलक थी।
कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक सरिता आर्या, प्रो.एचपी शुक्ल, डा.डीएन भटकोटी, डा.प्रयाग जोशी, प्रो.रघुबीर चंद, प्रो.अतुल सकलानी, प्रो.एचपी शुक्ला आदि ने विचार रखे। इस मौके पर राजीव जोशी, जगमोहन, एस पुंडीर, ललित कोटियाल, डा.अनीता पांडे, डा.गोकुल, डा.उमा भट्ट, डा.बीआर पंत, केसी जोशी, वीरेंद्र पाल समेत 136 लोगों भागीदारी की। इस मौके पर एक पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।
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कई प्रस्ताव पारित
नैनीताल। साहित्य क्षेत्र के बुद्धिजीवी वर्ग के मंथन के बाद मुक्त विवि का नाम आचार्य डबराल के नाम पर रखे जाने, उनकी 20 हजार पुस्तकों का डिजिटलाइजेशन करने, परिजनों के कापीराइट के अधिकारों के साथ पुस्तकों का प्रकाशन, उनके नाम पर पीठ चेयर अध्ययन केंद्र स्थापित करने, प्रदेश में समाज विज्ञान का रिजनल सेंटर उन्हीं के नाम पर स्थापित करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया।
भाषा संरक्षण के लिए 2.5 लाख की घोषणा
नैनीताल। पूर्व प्रधानाचार्य तारा चंद्र त्रिपाठी ने कि भाषा की विलुप्ति के साथ संस्कृति तथा परंपराओं का भी पतन होता है। उन्होंने भाषा के संरक्षण के लिए जिला, मंडल व प्रदेश स्तर पर प्रतियोगिताओं के बारे में बताते हुए इस क्षेत्र में शुरू की गई पहल की जानकारी दी। विधानसभा अध्यक्ष ने इसके लिए प्रतिवर्ष 2.5 लाख रुपये देने की घोषणा की। ब्यूरो
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पहाड़ संस्था के तत्वावधान में राज्य अतिथि गृह में आचार्य शिव प्रसाद डबराल के जन्म शताब्दी समारोह में इतिहासकार शेखर पाठक ने आचार्य डबराल के जीवन परिचय तथा उनके कार्यों पर प्रकाश डाला। अध्यक्षीय भाषण में डा.आरएस टोलिया ने कहा कि आचार्य डबराल ने विपरीत परिस्थितियों में विभिन्न पक्षों को साहित्य के साथ जोड़कर अभिनव पहल की। प्रो. सुनील कुमार ने डबराल की लेखनी में छिपी उनकी पीड़ा को प्रदर्शित किया। डा.बीडीे एस नेगी ने आचार्य की ज्ञान धरोहर का ग्रंथीकरण व प्रस्तुतिकरण की वकालत की तो डीडी कोशांबी न भूतो न भविष्यति श्लोक पढ़कर कहा कि ऐसा पथ प्रदर्शक न कभी हुआ है न होगा। प्रो.अजय रावत ने आचार्य डबराल की नजरों से गढ़वाल के इतिहास के बारे में बताया। संचालन कर रहे प्रो.गिरजा पांडे ने आचार्य डबराल को समर्पित एक फिल्म भी दिखाई। इसमें 10 अक्तूबर 1999 में हुए आचार्य डबराल के सम्मान की झलक थी।
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कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक सरिता आर्या, प्रो.एचपी शुक्ल, डा.डीएन भटकोटी, डा.प्रयाग जोशी, प्रो.रघुबीर चंद, प्रो.अतुल सकलानी, प्रो.एचपी शुक्ला आदि ने विचार रखे। इस मौके पर राजीव जोशी, जगमोहन, एस पुंडीर, ललित कोटियाल, डा.अनीता पांडे, डा.गोकुल, डा.उमा भट्ट, डा.बीआर पंत, केसी जोशी, वीरेंद्र पाल समेत 136 लोगों भागीदारी की। इस मौके पर एक पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।
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कई प्रस्ताव पारित
नैनीताल। साहित्य क्षेत्र के बुद्धिजीवी वर्ग के मंथन के बाद मुक्त विवि का नाम आचार्य डबराल के नाम पर रखे जाने, उनकी 20 हजार पुस्तकों का डिजिटलाइजेशन करने, परिजनों के कापीराइट के अधिकारों के साथ पुस्तकों का प्रकाशन, उनके नाम पर पीठ चेयर अध्ययन केंद्र स्थापित करने, प्रदेश में समाज विज्ञान का रिजनल सेंटर उन्हीं के नाम पर स्थापित करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया।
भाषा संरक्षण के लिए 2.5 लाख की घोषणा
नैनीताल। पूर्व प्रधानाचार्य तारा चंद्र त्रिपाठी ने कि भाषा की विलुप्ति के साथ संस्कृति तथा परंपराओं का भी पतन होता है। उन्होंने भाषा के संरक्षण के लिए जिला, मंडल व प्रदेश स्तर पर प्रतियोगिताओं के बारे में बताते हुए इस क्षेत्र में शुरू की गई पहल की जानकारी दी। विधानसभा अध्यक्ष ने इसके लिए प्रतिवर्ष 2.5 लाख रुपये देने की घोषणा की। ब्यूरो