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ऐ जारे चैत्र, बैशाख, मेरा मुनस्यार...
Nainital
Updated Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
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हल्द्वानी। ऐ जारे चैत्र, बैशाख, मेरा मुनस्यार, क्या भलो रंग रंगीलो मिलम जवाहर के बोलों के साथ शनिवार को दो दिवसीय जोहार महोत्सव की शुरुआत हुई। लोक रंगों से सजे प्रथम सत्र का शुभारंभ इतिहासकार डॉ. शेर सिंह पांगती और भारत सरकार में संयुक्त सचिव रह चुके शेर सिंह रावत ने किया। डा. पांगती ने जोहारी समाज की संघर्ष गाथा को बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज या सभ्यता को जीवित रखने के लिए संस्कृति का बेहतर पोषण जरूरी है। इसके बाद विभिन्न प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया।
शनिवार को जोहार महोत्सव के आगाज के साथ ही ऐसा लगा कि आधा मुनस्यारी हल्द्वानी में उतर आया हो। मुख्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद लोकनृत्य और लोक गीतों ने दूर पहाड़ों में गूंजने वाले गीतों की याद दिला दी। 2010 से जोहार सांस्कृतिक एवं वेलफेयर सोसायटी के तत्वावधान में अपनी संस्कृति को जीवित रखने के लिए यह कार्यक्रम किया जा रहा है। पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी विकासखंड से पलायन कर विभिन्न शहरों में बस चुके जोहारी समाज के लोग हर साल इस कार्यक्रम का आयोजन जोहार नगर, भोटिया पड़ाव के शिव सुंदरम विवाह स्थल पर करते हैं। शनिवार को भी जोहारी संस्कृति का ऐसा ही मिलन था। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा मेंहदी, ऐपण, चित्रकला और जोहारी में क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। स्थानीय गायन और नृत्य प्रतियोगिताओं में भी अपने मुनस्यारी की झलक दिखाई दी।
दूसरे सत्र का शुभारंभ वित्त मंत्री डॉक्टर इंदिरा हृदयेश और धारचूला के विधायक हरीश धामी ने किया। डा. इंदिरा ने कहा कि जोहार संस्कृति पूरे देश के लिए प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने जोहार समाज पर शोध के लिए पांच लाख रुपये देने की घोषणा भी की। इसके बाद सांस्कृतिक संध्या में लोक कला केंद्र दरकोट मुनस्यारी की ओर से पहाड़ी रामलीला की जीवंत प्रस्तुति दी गई। लोक गायक आनंद कोरंगा, किशन महिपाल, गोविंद गारी, पप्पू कार्की और खुशी जोशी ने लोक गीतों से अपने पहाड़ और संस्कृति का चित्र खींचा। इस मौके पर सोसायटी अध्यक्ष देवेंद्र सिंह धर्मशक्तू, गजेंद्र सिंह पांगती, पुरमल सिंह मर्तोलिया, कैलाश धर्मशक्तू, भूपेंद्र पांगती, खड़क सिंह रावत, ध्रुव मर्तोलिया, प्रेम सिंह बृजवाल, गंगा पंचपाल, धाम सिंह मर्तोलिया, रणजीत पांगती, राजेंद्र बुर्फाल भूपेंद्र पांगती, एनएस टोलिया आदि मौजूद रहे।
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इनसेट
महोत्सव में धामी की चेतावनी
द्वितीय सत्र में बतौर अतिथि मौजूद धारचूला के विधायक हरीश धामी ने अपनी ही सरकार को चेतावनी दी है कि यदि मार्च तक अस्कोट अभ्यारण्य की सीमा तय नहीं की गई तो वह दिल्ली में आमरण अनशन करेंगे।
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शनिवार को जोहार महोत्सव के आगाज के साथ ही ऐसा लगा कि आधा मुनस्यारी हल्द्वानी में उतर आया हो। मुख्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद लोकनृत्य और लोक गीतों ने दूर पहाड़ों में गूंजने वाले गीतों की याद दिला दी। 2010 से जोहार सांस्कृतिक एवं वेलफेयर सोसायटी के तत्वावधान में अपनी संस्कृति को जीवित रखने के लिए यह कार्यक्रम किया जा रहा है। पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी विकासखंड से पलायन कर विभिन्न शहरों में बस चुके जोहारी समाज के लोग हर साल इस कार्यक्रम का आयोजन जोहार नगर, भोटिया पड़ाव के शिव सुंदरम विवाह स्थल पर करते हैं। शनिवार को भी जोहारी संस्कृति का ऐसा ही मिलन था। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा मेंहदी, ऐपण, चित्रकला और जोहारी में क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। स्थानीय गायन और नृत्य प्रतियोगिताओं में भी अपने मुनस्यारी की झलक दिखाई दी।
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दूसरे सत्र का शुभारंभ वित्त मंत्री डॉक्टर इंदिरा हृदयेश और धारचूला के विधायक हरीश धामी ने किया। डा. इंदिरा ने कहा कि जोहार संस्कृति पूरे देश के लिए प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने जोहार समाज पर शोध के लिए पांच लाख रुपये देने की घोषणा भी की। इसके बाद सांस्कृतिक संध्या में लोक कला केंद्र दरकोट मुनस्यारी की ओर से पहाड़ी रामलीला की जीवंत प्रस्तुति दी गई। लोक गायक आनंद कोरंगा, किशन महिपाल, गोविंद गारी, पप्पू कार्की और खुशी जोशी ने लोक गीतों से अपने पहाड़ और संस्कृति का चित्र खींचा। इस मौके पर सोसायटी अध्यक्ष देवेंद्र सिंह धर्मशक्तू, गजेंद्र सिंह पांगती, पुरमल सिंह मर्तोलिया, कैलाश धर्मशक्तू, भूपेंद्र पांगती, खड़क सिंह रावत, ध्रुव मर्तोलिया, प्रेम सिंह बृजवाल, गंगा पंचपाल, धाम सिंह मर्तोलिया, रणजीत पांगती, राजेंद्र बुर्फाल भूपेंद्र पांगती, एनएस टोलिया आदि मौजूद रहे।
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महोत्सव में धामी की चेतावनी
द्वितीय सत्र में बतौर अतिथि मौजूद धारचूला के विधायक हरीश धामी ने अपनी ही सरकार को चेतावनी दी है कि यदि मार्च तक अस्कोट अभ्यारण्य की सीमा तय नहीं की गई तो वह दिल्ली में आमरण अनशन करेंगे।