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आंदोलन का मन बनाने लगे हैं भूमि अध्याप्ति परिवार
Updated Wed, 21 Jun 2017 10:11 PM IST
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आंदोलन का मन बनाने लगे हैं भूमि अध्याप्ति परिवार
रानीखेत (अल्मोड़ा)। बीटीकेआईटी (कुमाऊं इंजीनियरिंग कालेज) द्वाराहाट के भूमि अध्याप्ति परिवारों (जिन लोगों की कालेज निर्माण में भूमि ली गई है) के सदस्यों को संस्थान में स्थायी रोजगार नहीं मिलने से इन परिवारों में आक्रोश है। सदस्यों का कहना है कि न्यायालयों के आदेशों की बार-बार अवहेलना की जा रही है। कई सदस्य आज भी स्थायी रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस संबंध में मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर स्थायी रोजगार दिलाने की मांग की गई है, कहा कि यदि रोजगार नहीं मिला तो फिर से आंदोलन शुरू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में सामाजिक कार्यकर्ता हीरा सिंह अधिकारी ने कहा है कि कालेज निर्माण के लिए क्षेत्र के किसानों की भूमि ली गई थी, भूमि अधिग्रहण बिल के तहत भूमि देने वाले परिवार के एक सदस्य को संस्थान में स्थायी नौकरी देने का प्रावधान था, 1991 में न्यायालय ने संस्थान प्रशासन से योग्यतानुसार नौकरियां प्रदान करने के निर्देश दिए थे, लेकिन आदेश का पालन नहीं हुआ, इसके बाद भूमि अध्याप्ति परिवारों ने बचे सिंह राणा के नेतृत्व में न्यायालय में याचिका दायर की, 2008 में फिर से न्यायालय ने राज्य सरकार को नौकरी देने के निर्देश जारी किए, राज्य सरकार ने न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर कर दी, 2011 में न्यायालय ने सरकार की याचिका खारिज कर दी, सरकार ने फिर से हाईकोर्ट में अपील दायर कर दी। 2016 में न्यायालय ने विशेष याचिका को फिर खारिज कर दिया। लेकिन अभी तक कई भूमि अध्याप्ति परिवारों के सदस्यों को स्थायी नौकरी नहीं दी गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि सदस्यों को उनका हक नहीं मिलता तो फिर से आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा। सामाजिक कार्यकर्ता नारायण रावत ने भी भूमि अध्याप्ति परिवारों के सदस्यों को स्थायी नौकरी देने की मांग की और मामले को दोबारा उठाने के लिए हीरा सिंह अधिकारी का आभार जताया है।
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। बीटीकेआईटी (कुमाऊं इंजीनियरिंग कालेज) द्वाराहाट के भूमि अध्याप्ति परिवारों (जिन लोगों की कालेज निर्माण में भूमि ली गई है) के सदस्यों को संस्थान में स्थायी रोजगार नहीं मिलने से इन परिवारों में आक्रोश है। सदस्यों का कहना है कि न्यायालयों के आदेशों की बार-बार अवहेलना की जा रही है। कई सदस्य आज भी स्थायी रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस संबंध में मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर स्थायी रोजगार दिलाने की मांग की गई है, कहा कि यदि रोजगार नहीं मिला तो फिर से आंदोलन शुरू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में सामाजिक कार्यकर्ता हीरा सिंह अधिकारी ने कहा है कि कालेज निर्माण के लिए क्षेत्र के किसानों की भूमि ली गई थी, भूमि अधिग्रहण बिल के तहत भूमि देने वाले परिवार के एक सदस्य को संस्थान में स्थायी नौकरी देने का प्रावधान था, 1991 में न्यायालय ने संस्थान प्रशासन से योग्यतानुसार नौकरियां प्रदान करने के निर्देश दिए थे, लेकिन आदेश का पालन नहीं हुआ, इसके बाद भूमि अध्याप्ति परिवारों ने बचे सिंह राणा के नेतृत्व में न्यायालय में याचिका दायर की, 2008 में फिर से न्यायालय ने राज्य सरकार को नौकरी देने के निर्देश जारी किए, राज्य सरकार ने न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर कर दी, 2011 में न्यायालय ने सरकार की याचिका खारिज कर दी, सरकार ने फिर से हाईकोर्ट में अपील दायर कर दी। 2016 में न्यायालय ने विशेष याचिका को फिर खारिज कर दिया। लेकिन अभी तक कई भूमि अध्याप्ति परिवारों के सदस्यों को स्थायी नौकरी नहीं दी गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि सदस्यों को उनका हक नहीं मिलता तो फिर से आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा। सामाजिक कार्यकर्ता नारायण रावत ने भी भूमि अध्याप्ति परिवारों के सदस्यों को स्थायी नौकरी देने की मांग की और मामले को दोबारा उठाने के लिए हीरा सिंह अधिकारी का आभार जताया है।
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