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आबादी के साथ ही बढ़ गई पेयजल की मांग
Updated Mon, 25 Jun 2018 01:44 AM IST
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हल्द्वानी। शहर और ग्रामीण क्षेत्र की आबादी लगातार बढ़ती जा रही है। इस कारण अब पानी की डिमांड भी बढ़ गई है। पानी की कमी के साथ ही पर्याप्त पेयजल लाइनें न होेने, वितरण सिस्टम में खामी के चलते पेयजल योजना के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच रहा है।
जलसंस्थान के पास वर्तमान में उपभोक्ताओं की संख्या 70 हजार से बढ़कर 76 हजार हो गई। इसमें से 62 फीसदी उपभोक्ता ग्रामीण हैं। विभागीय मानकों के तहत शहरी उपभोक्ताओं को 135 लीटर, 20 लीटर लीकेज यानी 155 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन, ग्रामीण आबादी को 70 लीटर, 20 लीटर यानी 80 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पेयजल उपलब्ध कराया जाता है। अधिकारियों के मुताबिक वर्तमान आबादी के लिए 86 एमएलडी पानी की जरूरत है, जबकि गौला, नलकूपों से जलसंस्थान को 80 एमएलडी पानी मिल रहा है। जलसंस्थान के ईई संतोष कुमार उपाध्याय का कहना है कि पेयजल वितरण सिस्टम काफी पुराना हो चुका है। लाइनें जीर्णशीर्ण हैं। बढ़ी आबादी के हिसाब के काफी छोटी पड़ चुकी हैं। इससे पेयजल योजना के आखिरी छोर के इलाकों तक पानी नहीं पहुंचता है। कहा कि पेयजल योजना का पुनर्गठन किए बिना मौजूदा सिस्टम से पेयजल आपूर्ति संभव नहीं है।
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जलसंस्थान के पास वर्तमान में उपभोक्ताओं की संख्या 70 हजार से बढ़कर 76 हजार हो गई। इसमें से 62 फीसदी उपभोक्ता ग्रामीण हैं। विभागीय मानकों के तहत शहरी उपभोक्ताओं को 135 लीटर, 20 लीटर लीकेज यानी 155 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन, ग्रामीण आबादी को 70 लीटर, 20 लीटर यानी 80 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पेयजल उपलब्ध कराया जाता है। अधिकारियों के मुताबिक वर्तमान आबादी के लिए 86 एमएलडी पानी की जरूरत है, जबकि गौला, नलकूपों से जलसंस्थान को 80 एमएलडी पानी मिल रहा है। जलसंस्थान के ईई संतोष कुमार उपाध्याय का कहना है कि पेयजल वितरण सिस्टम काफी पुराना हो चुका है। लाइनें जीर्णशीर्ण हैं। बढ़ी आबादी के हिसाब के काफी छोटी पड़ चुकी हैं। इससे पेयजल योजना के आखिरी छोर के इलाकों तक पानी नहीं पहुंचता है। कहा कि पेयजल योजना का पुनर्गठन किए बिना मौजूदा सिस्टम से पेयजल आपूर्ति संभव नहीं है।
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