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पालिका अध्यक्ष गोचर के वितीय अधिकार बहाल
Updated Wed, 10 Jan 2018 02:29 AM IST
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नैनीताल। उच्च न्यायालय ने गोचर (चमोली) के नगरपालिका अध्यक्ष मुकेश नेगी के वित्तीय अधिकार सीज करने के 22 दिसंबर 2017 के सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया है।
न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार नगर पालिका परिषद गोचर चमोली के अध्यक्ष मुकेश नेगी ने न्यायालय में याचिका दायर कर कहा था कि प्रदेश सरकार ने राजनितिक द्वेष भावना से प्रेरित होकर 22 दिसंबर को आदेश पारित कर उनकी वित्तीय अधिकार सीज कर दिए हैं। यह आदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 के खिलाफ है। याची की ओर से कहा गया था कि पूर्व में भी सरकार ने उनके विरुद्ध कार्यवाही की थी। पीठ ने सरकार के 22 दिसंबर 2017 के आदेश को निरस्त कर दिया।
यह पहली बार नहीं है जब उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार के आदेश को पलटा हो। इससे पहले बदरी केदार मंदिर समिति को भंग करने के मामले में भी सरकार को उच्च न्यायालय में मायूसी हाथ लगी थी। उस समय सरकार ने मंदिर समिति को भंग करने का आदेश दिया था। समिति ने सरकार के इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने उस समय सरकार के आदेश को पलट दिया था। हद तो यह हुई कि सरकार ने न्यायालय के आदेश पर बहाल हुई समिति को फिर भंग किया था और दोबारा उसे समिति को बहाल करना पड़ा था।
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न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार नगर पालिका परिषद गोचर चमोली के अध्यक्ष मुकेश नेगी ने न्यायालय में याचिका दायर कर कहा था कि प्रदेश सरकार ने राजनितिक द्वेष भावना से प्रेरित होकर 22 दिसंबर को आदेश पारित कर उनकी वित्तीय अधिकार सीज कर दिए हैं। यह आदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 के खिलाफ है। याची की ओर से कहा गया था कि पूर्व में भी सरकार ने उनके विरुद्ध कार्यवाही की थी। पीठ ने सरकार के 22 दिसंबर 2017 के आदेश को निरस्त कर दिया।
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यह पहली बार नहीं है जब उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार के आदेश को पलटा हो। इससे पहले बदरी केदार मंदिर समिति को भंग करने के मामले में भी सरकार को उच्च न्यायालय में मायूसी हाथ लगी थी। उस समय सरकार ने मंदिर समिति को भंग करने का आदेश दिया था। समिति ने सरकार के इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने उस समय सरकार के आदेश को पलट दिया था। हद तो यह हुई कि सरकार ने न्यायालय के आदेश पर बहाल हुई समिति को फिर भंग किया था और दोबारा उसे समिति को बहाल करना पड़ा था।
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