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कैदियों की स्थिति सुधारने के लिए क्या कदम उठाए
Updated Sat, 23 Dec 2017 01:38 AM IST
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नैनीताल। हाइकोर्ट ने राज्य की जेलों में बंद कैदियों की स्थिति सुधारने के मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए दो जनवरी तक प्रदेश सरकार को स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश हैं।
न्यायमूर्ति वीके बिष्ट एवं न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने इस मामले में सुनवाई के बाद सरकार से पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के क्रम में उसने जेलों में बंद कैदियों की स्थिति सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में चार बिंदुओं पर दिशा निर्देश जारी किए थे। इनमें कैदियों की खराब दशा, अभिरक्षा में कैदियों की अप्राकृतिक मौत, जेल में स्टाफ कम होने तथा जेलों में प्रशिक्षित स्टाफ का न होना शामिल हैं। इन बिंदुओं पर सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाइकोर्ट को आदेश भी दिए थे कि वह अपने राज्य में इस संबंध में स्वयं जनहित याचिका योजित करें। इसी क्रम में हाइकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर याचिका पर सुनवाई की और राज्य सरकार से दो जनवरी तक स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
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न्यायमूर्ति वीके बिष्ट एवं न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने इस मामले में सुनवाई के बाद सरकार से पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के क्रम में उसने जेलों में बंद कैदियों की स्थिति सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में चार बिंदुओं पर दिशा निर्देश जारी किए थे। इनमें कैदियों की खराब दशा, अभिरक्षा में कैदियों की अप्राकृतिक मौत, जेल में स्टाफ कम होने तथा जेलों में प्रशिक्षित स्टाफ का न होना शामिल हैं। इन बिंदुओं पर सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाइकोर्ट को आदेश भी दिए थे कि वह अपने राज्य में इस संबंध में स्वयं जनहित याचिका योजित करें। इसी क्रम में हाइकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर याचिका पर सुनवाई की और राज्य सरकार से दो जनवरी तक स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
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