रामनगर में वन भूमि पर बने 81 घर ध्वस्त किए: घर टूटते देख दो महिलाओं को आया हार्ट अटैक, एक युवक छत से गिरा
रामनगर के ग्राम पूछड़ी में 10 हेक्टेयर वन भूमि पर 20 साल से बने 81 घरों को शनिवार को ध्वस्त कर दिया गया। पुलिस, वन विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम ने सुबह छह से 11 बजे तक कार्रवाई की। अपने घर टूटते देख दो महिलाओं को हार्ट अटैक आया।
विस्तार
रामनगर के ग्राम पूछड़ी में 10 हेक्टेयर वन भूमि करीब 20 साल से बने 81 घरों कोे शनिवार को ध्वस्त कर दिया गया। अतिक्रमण हटाने के लिए पुलिस, वन विभाग प्रशासन समेत विभिन्न विभागों की संयुक्त टीमों ने सुबह छह बजे से करीब 11 बजे तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। आंखों को सामने अपने घरों को टूटते देख दो महिलाओं को हार्ट अटैक आ गया और एक युवक छत से गिर गया।
तराई पश्चिमी वन प्रभाग की रामनगर रेंज स्थित पूछड़ी क्षेत्र में बीस साल से 200 से अधिक परिवार वन विभाग की भूमि पर रहे हैं। इन लोगों के खिलाफ अतिक्रमण की कार्रवाई के लिए शुक्रवार को द्वितीय चरण के लिए एक हजार से अधिक पुलिस बल, वनकर्मी तैनात किए गए थे। पूरे क्षेत्र को दो सुपर जोन, सात जोन और 14 सेक्टरों में बांटा गया था।
शनिवार सुबह पांच बजे सभी टीमें अपने-अपने सेक्टर व जोनों में तैनात कर दी गईं।इसके बाद संबंधित सेक्टर अधिकारियों की ओर से कर्मियों को ब्रीफिंग की गई। ब्रीफिंग के बाद 40 जेसीबी मशीन, 10 पोकलेन और 20 डंपरों की मदद से अतिक्रमण ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू की गई। अतिक्रमण मुक्त कराई गई 10 हे. वन भूमि में से पांच हे. पर मकान बने थे जबकि पांच हेक्टेयर भूमि पर कृषि की जा रही थी।
दो महिलाओं को आया हार्ट अटैक, युवक छत से गिरा
अतिक्रमण हटाने के दौरान दो महिलाएं मोमिना (28) पत्नी जाहिद और फातमा (47) पत्नी रियासत को हार्टअटैक पड़ गया जबकि शमशाद (34) पुत्र फयान छत से गिरकर घायल हो गया। तीनों को रामनगर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
तीन किलोमीटर के दायरे में बंद रही लोगों की आवाजाही
प्रशासन ने अतिक्रमण प्रभावित क्षेत्र से तीन किलोमीटर की परिधि में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू की थी। क्षेत्र में लोगों की आवाजाही और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई। इस दौरान पूछड़ी को जोड़ने वाले सभी प्रवेश केंद्रों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। साथ ही लोगों की आवाजाही को बंद रखा गया। केवल जरूरी कार्य होने पर लोगों को आवाजाही की अनुमति दी गई।
कार्रवाई के बाद बेघर परिवारों के सामने रहने का संकट
पूछड़ी में हुई कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों के सामने सर्दी के इस मौसम में रहने की व्यवस्था करने की चुनौती है। कुछ ही घंटों में मकान टूटने के बाद परिवारों को अपने सामान और जरूरी दस्तावेज को सुरक्षित रखने की चिंता सताने लगी। वर्षों से जिस स्थान को उन्होंने अपना घर समझकर बसाया था, वहां अब मलबा बिखरा हुआ है।
भारी पुलिस बल रहा तैनात
पूरी कार्रवाई में पांच अपर पुलिस अधीक्षक, छह क्षेत्राधिकारी, 25 निरीक्षक, 82 उपनिरीक्षक, 310 हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल तथा 125 महिला हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल तैनात किए गए थे। इसके अतिरिक्त पीएसी की तीन कंपनियों को भी लगाया गया था। वन विभाग की ओर से दो प्रभागीय वनाधिकारी, पांच उप प्रभागीय वनाधिकारी, 14 रेंजर और 240 डिप्टी रेंजर व बीट अधिकारियों सहित वन कर्मियों की तैनाती की गई थी। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए फायर टीम, बम निरोधक दस्ता, एंटी राइट टीम, आंसू गैस दस्ता और क्यूआरटी को भी तैयार रखा गया था।
पहले चरण में हटाए गए थे 51 अतिक्रमण
जानकारी के अनुसार, पूछड़ी क्षेत्र में वन विभाग की भूमि से विगत वर्ष सात दिसंबर को पहले चरण की कार्रवाई की गई थी। इसमें 51 परिवारों के अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। इस दौरान 15 पक्के मकानों समेत अन्य निर्माणों को ध्वस्त किया गया था। साथ ही 25 हेक्टेयर वनक्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त किया था।
एक दशक पहले शुरू हुआ था अतिक्रमण
पूछड़ी क्षेत्र में करीब एक दशक पहले तराई पश्चिमी वन प्रभाग की रामनगर रेंज की वन भूमि पर अतिक्रमण का सिलसिला शुरू हुआ था। धीरे-धीरे यहां अवैध कॉलोनियां बस गईं और बड़ी संख्या में परिवार रहने लगे। आरोप है कि कुछ लोगों ने 10 रुपये के स्टांप पर जमीन बेचकर लोगों को बसाया। इस मामले में जमीन बेचने के आरोप में छह लोगों के खिलाफ मुकदमे भी दर्ज किए गए थे।
पूछड़ी कार्रवाई के विरोध में धरना, हाईकोर्ट से लगाई गुहार
नई बस्ती पूछड़ी में वन विभाग और प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में संयुक्त संघर्ष समिति के नेतृत्व में ग्रामीणों ने शनिवार को उपजिलाधिकारी कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने कार्रवाई को वन अधिकार अधिनियम का उल्लंघन बताते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन भेजकर मामले का स्वतः संज्ञान लेने की मांग की। शनिवार को संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक मुनीष कुमार ने आरोप लगाया कि 30 अक्तूबर को मुनादी कराने के बाद 31 अक्तूबर की सुबह भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कई मकानों को ध्वस्त कर दिया गया।
आरोप लगाया कि वन अधिकारों से जुड़े दावे और अपील लंबित होने के बावजूद कार्रवाई की है। विरोध करने और वीडियो बनाने वाले ग्रामीणों को हिरासत में लेने तथा मीडिया के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने पर भी सवाल उठाए गए। उन्होंने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक लगाने, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने, हिरासत में लिए गए ग्रामीणों को रिहा करने और प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा व वैकल्पिक व्यवस्था देने की मांग की गई। इस अवसर पर प्रभात ध्यानी, दुर्गा देवी, शारदा, सीमा तिवारी, धना तिवारी, खष्टी, पुष्पा, आशा, भुवन चंद्र आदि मौजूद रहे।
पूछड़ी में वन विभाग, पुलिस, प्रशासन समेत विभिन्न विभागों ने संयुक्त रूप से इस कार्रवाई को अंजाम देकर एकता दिवस का उदाहरण दिया है। दूसरे चरण का यह क्षेत्र अतिक्रमण की दृष्टि से सबसे अधिक महत्वपूर्ण था। इस क्षेत्र में सबसे अधिक पक्के मकानों के माध्यम से अतिक्रमण किया गया था। संयुक्त टीम ने 81 अतिक्रमण को ध्वस्त कर 10 हेक्टेयर से अधिक भूमि को कब्जे में लिया है। वन भूमि पर हुए कब्जों को लगातार हटाने की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। - पुनीत तोमर, डीएफओ, तराई पश्चिमी वनप्रभाग