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कोश्यारी ने हरीश रावत को कहा एकलू वानर
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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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हल्द्वानी। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के नैनीताल संसदीय सीट के प्रत्याशी हरीश रावत ने भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को ‘मैं उज्याड़ खाणी बल्द’ (खेत में खड़ी फसल को चरने वाला बैल) बताया तो शुक्रवार को कोश्यारी ने हरीश रावत को ‘यकलू बानर’ (झुंड से अलग हटकर रहने वाला अकेला बंदर) करार दिया।
बरेली रोड स्थित एक सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम में उन्होंने हरीश रावत को ‘यकलू बानर’ कहा। इसके साथ ही उन्होंने पुुराने मामलों का जिक्र भी किया। कोश्यारी के अनुसार यह बात वह पहले भी कहते रहे हैं। 24 मार्च को नैनीताल रोड स्थित भाजपा के चुनाव कार्यालय के उद्घाटन पर पूर्व मुख्यमंत्री कोश्यारी ने ‘हरदा’ को ‘हारदा’ कहकर निशाना साधा था। इस पर हरीश रावत ने भी कोश्यारी को ‘उज्याड़ खाणी बल्द’ बताया था। पहाड़ की खेती किसानी में रचे बसे इस बैल की आदत ही यह होती है कि वह जहां हरी भरी फसल देखता है, वहां मुंह मारने चल पड़ता है। दूसरी ओर अकेला बंदर भी पहाड़ के ठेठपन को अपने में समेटे हुए हैं। यह बंदर झुंड से दूर ही रहता है और सामान्य रूप से अन्य बंदरों की तुलना में अधिक कटखना माना जाता है। दोनों ही नेता एक-एक बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं और पहाड़ की लोक संस्कृति में रचे बसे हैं।
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बरेली रोड स्थित एक सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम में उन्होंने हरीश रावत को ‘यकलू बानर’ कहा। इसके साथ ही उन्होंने पुुराने मामलों का जिक्र भी किया। कोश्यारी के अनुसार यह बात वह पहले भी कहते रहे हैं। 24 मार्च को नैनीताल रोड स्थित भाजपा के चुनाव कार्यालय के उद्घाटन पर पूर्व मुख्यमंत्री कोश्यारी ने ‘हरदा’ को ‘हारदा’ कहकर निशाना साधा था। इस पर हरीश रावत ने भी कोश्यारी को ‘उज्याड़ खाणी बल्द’ बताया था। पहाड़ की खेती किसानी में रचे बसे इस बैल की आदत ही यह होती है कि वह जहां हरी भरी फसल देखता है, वहां मुंह मारने चल पड़ता है। दूसरी ओर अकेला बंदर भी पहाड़ के ठेठपन को अपने में समेटे हुए हैं। यह बंदर झुंड से दूर ही रहता है और सामान्य रूप से अन्य बंदरों की तुलना में अधिक कटखना माना जाता है। दोनों ही नेता एक-एक बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं और पहाड़ की लोक संस्कृति में रचे बसे हैं।
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