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कार्यशालाओं से शोध प्रवृत्ति का होता है विकास
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नैनीताल। आईसीएसएसआर के सहयोग से कुमाऊं विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यशालाओं पर कुलपति डीके नौड़ियाल ने शोधार्थियों के साथ विचार-विमर्श किया। साथ ही कार्यशालाओं के प्रतिफल पर प्रतिक्रियाएं ली। इसके बाद शोधार्थियों ने अपने-अपने विचार रखे। कार्यशाला में दिए गए व्याख्यानों का शोध क्षेत्र में उपयोगिता को दर्शाया। इस बीच शोधार्थियों में सुमित राणा ने प्रो. रेड्डी के व्याख्यान को देश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए लाभकर बताया। जंतु विज्ञान विभाग शोध छात्र दीपक मल्कानी ने कार्यशाला को शोध गतिविधियों के लिए सराहनीय पहल बताते हुए कहा कि ऐसी कार्यशालाओं से शोध छात्रों की शोध प्रवृत्ति का विकास होता है। इस दौरान विचार विमर्श के दौरान सुमित, पूजा, रवि, शक्ति, कविता, दीपक, कैलाश, शीतल आदि थे।
कार्यशालाओं से शोध प्रवृत्ति का होता है विकास
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