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खांस रहा टीबी अस्पताल
Updated Tue, 10 Jul 2018 02:01 AM IST
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tb medicine shimla
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भवाली (नैनीताल)। कभी पूरे एशिया में विख्यात टीबी अस्पताल आज खुद बीमार है। अव्यवस्थाओं के चलते अस्पताल में बजट, स्टाफ की कमी है। कभी 278 बेडों वाला यह अस्पताल अब मात्र 56 बेडों में सिमट कर रह गया है।
वर्ष 1912 में स्थापित यह अस्पताल टीबी रोगियों के इलाज के लिए बनाया गया था। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की पत्नी कमला नेहरू भी भर्ती रही थीं, जिनके नाम पर एक महिला वार्ड बना है। तब से यह अस्पताल भारत से बाहर तक अपनी खास पहचान रखता है। यहां रोजाना 30 से 35 मरीज इलाज करवाने आते हैं। इनमें से अधिक गंभीर मरीजों को भर्ती किया जाता है, जिन्हें यहां 15 दिनों तक भर्ती रखा जाता है। बेडों की कमी के चलते नए मरीजों के आने पर पुराने मरीजों को 15 दिन से पहले ही छुट्टी दे दी जाती है। अस्पताल के टॉयलेट में नल टूटा है, जिससे रोगियों को दूसरी जगह से बर्तन में पानी भरकर लाना पड़ता है। टॉयलेट के दरवाजे पुराने और क्षतिग्रस्त हैं, जिनमें लॉक करने के लिए कुंडियां तक नहीं हैं।
सेनेटोरियम के टीबी अस्पताल में बजट, स्टाफ, शासन की अनदेखा पड़ी भारी
कमला नेहरू भी रही थी अस्पताल में भर्ती
स्टाफ की है बेहद कमी
अस्पताल में मानकों के अनुरूप आठ चिकित्साधिकारी के पद सृजित हैं, जिनमें से पांच पद खाली हैं। स्टाफ नर्स अधीक्षक, सिस्टर के चार पद खाली, 17 नर्स, तीन लैब टेक्नीशियन सहित एक संविदा का पद खाली है।
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1- वर्ष 2002-03 में केंद्र सरकार का डॉट्स कार्यक्रम चलने से टीबी सेनेटोरियम की महत्ता कम हुई है। इसको मल्टीस्पेश्लिटी अस्पताल बनाने की तैयारी चल रही है। स्टाफ की कमी दूर की जाएगी
- डॉ. टीएस पंत, डीजी हेल्थ देहरादून।
2- अस्पताल में बजट की कमी है, जिसके चलते परेशानी हो रही है। जल्द व्यवस्थाएं सुधारी जाएंगी।
- डॉ. विनोद कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी।
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वर्ष 1912 में स्थापित यह अस्पताल टीबी रोगियों के इलाज के लिए बनाया गया था। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की पत्नी कमला नेहरू भी भर्ती रही थीं, जिनके नाम पर एक महिला वार्ड बना है। तब से यह अस्पताल भारत से बाहर तक अपनी खास पहचान रखता है। यहां रोजाना 30 से 35 मरीज इलाज करवाने आते हैं। इनमें से अधिक गंभीर मरीजों को भर्ती किया जाता है, जिन्हें यहां 15 दिनों तक भर्ती रखा जाता है। बेडों की कमी के चलते नए मरीजों के आने पर पुराने मरीजों को 15 दिन से पहले ही छुट्टी दे दी जाती है। अस्पताल के टॉयलेट में नल टूटा है, जिससे रोगियों को दूसरी जगह से बर्तन में पानी भरकर लाना पड़ता है। टॉयलेट के दरवाजे पुराने और क्षतिग्रस्त हैं, जिनमें लॉक करने के लिए कुंडियां तक नहीं हैं।
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सेनेटोरियम के टीबी अस्पताल में बजट, स्टाफ, शासन की अनदेखा पड़ी भारी
कमला नेहरू भी रही थी अस्पताल में भर्ती
स्टाफ की है बेहद कमी
अस्पताल में मानकों के अनुरूप आठ चिकित्साधिकारी के पद सृजित हैं, जिनमें से पांच पद खाली हैं। स्टाफ नर्स अधीक्षक, सिस्टर के चार पद खाली, 17 नर्स, तीन लैब टेक्नीशियन सहित एक संविदा का पद खाली है।
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1- वर्ष 2002-03 में केंद्र सरकार का डॉट्स कार्यक्रम चलने से टीबी सेनेटोरियम की महत्ता कम हुई है। इसको मल्टीस्पेश्लिटी अस्पताल बनाने की तैयारी चल रही है। स्टाफ की कमी दूर की जाएगी
- डॉ. टीएस पंत, डीजी हेल्थ देहरादून।
2- अस्पताल में बजट की कमी है, जिसके चलते परेशानी हो रही है। जल्द व्यवस्थाएं सुधारी जाएंगी।
- डॉ. विनोद कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी।