{"_id":"5ac294c84f1c1beb618b5156","slug":"61522701512-nainital-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"न हो कमीज तो पांवों से पेट ढक लेंगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
न हो कमीज तो पांवों से पेट ढक लेंगे
Updated Tue, 03 Apr 2018 02:25 AM IST
विज्ञापन
मंडी में नाट्योत्सव की दूसरी संध्या में एक्टिव मोनाल कल्चरल एसोसिएशन की ओर से चिडिय़ा के बहाने नाटक का मंचन किया गया।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हल्द्वानी। अस्तित्व नाट्य कला विकास समिति की ओर से रामपुर रोड स्थित वानिकी प्रशिक्षण संस्थान के प्रेक्षागृह में नाटक पांच लोफर का मंचन किया गया। कलाकार की ओर से मंचन में कहा गया कि आज मैं भीख नहीं लूंगा, दिल बहुत भारी है... ने दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।
उर्दू के प्रसिद्ध उपन्यासकार कृशन चंदर की कृति पांच लोफर का मंचन करते हुए किरदारों ने मानवीय संवेदनाओं को जीवंत कर दिया। नाटक समाज से तिरस्कृत और मुंबई में जीवन यापन कर रहे पांच लोग लेखक, चोर, चाकूबाज, भिखारी, वेश्या पर आधारित है, जो फुटपाथ पर रहते हुए अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं और आपस में मित्र तो हैं पर एक दिन उनकी जिंदगी में ऐसा मोड़ आता है जब सारी संवेदनाओं का गला घोंट दिया जाता है। इस दौरान कलाकार ने कहा, न हो कमीज तो पांवों से, पेट ढक लेंगे, ये लोग कितने मुनासिब हैं, इस सफर के लिए...। मंचन ने मंत्रमुग्ध कर दिया।
वेश्या की घर बसाने की चाह से लेकर उसकी मौत तक का सफर आज की उस नारी की कहानी से भी कम नहीं जो न तो घर पर सुरक्षित है न ही बाहर। वहीं नाटक को आधुनिकता से जोड़ा गया है जो आज के हालातों पर केंद्रित है। नाटक के निदेशक हरीश पांडे ने बताया कि उपन्यासकार कृशन चंदर ने यह नाटक पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की मृत्यु के बाद लिखा था, मगर उन्होंने थोड़ा फेरबदल करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद इसे समसामयिक बनाने के लिए नया रूप दिया।
विज्ञापन
मंच पर राजीव शर्मा, नताशा परगांई, शंभूदत्त, अंकित चौधरी, सुनील गौतम, घनश्याम भट्ट, अनन्या सिंह, अर्जुन सिंह उर्फ टारजन ने किरदारों के साथ न्याय करते हुए प्रेक्षागार में बैठे लोगों को समाप्ति तक बांधे रखा।
इस दौरान वानिकी प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य एवं मुख्य संरक्षक आरएस बिष्ट, मोहन जोशी, रोहित मेलकानी, राजीव शर्मा, जगदीश उपाध्याय, भावना भट्ट और डॉ. प्रदीप उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
उर्दू के प्रसिद्ध उपन्यासकार कृशन चंदर की कृति पांच लोफर का मंचन करते हुए किरदारों ने मानवीय संवेदनाओं को जीवंत कर दिया। नाटक समाज से तिरस्कृत और मुंबई में जीवन यापन कर रहे पांच लोग लेखक, चोर, चाकूबाज, भिखारी, वेश्या पर आधारित है, जो फुटपाथ पर रहते हुए अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं और आपस में मित्र तो हैं पर एक दिन उनकी जिंदगी में ऐसा मोड़ आता है जब सारी संवेदनाओं का गला घोंट दिया जाता है। इस दौरान कलाकार ने कहा, न हो कमीज तो पांवों से, पेट ढक लेंगे, ये लोग कितने मुनासिब हैं, इस सफर के लिए...। मंचन ने मंत्रमुग्ध कर दिया।
विज्ञापन
वेश्या की घर बसाने की चाह से लेकर उसकी मौत तक का सफर आज की उस नारी की कहानी से भी कम नहीं जो न तो घर पर सुरक्षित है न ही बाहर। वहीं नाटक को आधुनिकता से जोड़ा गया है जो आज के हालातों पर केंद्रित है। नाटक के निदेशक हरीश पांडे ने बताया कि उपन्यासकार कृशन चंदर ने यह नाटक पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की मृत्यु के बाद लिखा था, मगर उन्होंने थोड़ा फेरबदल करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद इसे समसामयिक बनाने के लिए नया रूप दिया।
विज्ञापन
मंच पर राजीव शर्मा, नताशा परगांई, शंभूदत्त, अंकित चौधरी, सुनील गौतम, घनश्याम भट्ट, अनन्या सिंह, अर्जुन सिंह उर्फ टारजन ने किरदारों के साथ न्याय करते हुए प्रेक्षागार में बैठे लोगों को समाप्ति तक बांधे रखा।
इस दौरान वानिकी प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य एवं मुख्य संरक्षक आरएस बिष्ट, मोहन जोशी, रोहित मेलकानी, राजीव शर्मा, जगदीश उपाध्याय, भावना भट्ट और डॉ. प्रदीप उपाध्याय आदि मौजूद रहे।