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आपरेशन से पहले चार बार ली गई थी स्वीकृति
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डेमो
- फोटो : डेमो
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हल्द्वानी। साईं हास्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉ. मोहन सती का कहना है कि किडनी निकाले जाने का आरोप निराधार और बेबुनियाद है। मरीज का आपरेशन करने से पहले चार बार संस्तुति ली गई थी।
पत्रकारों से बातचीत में डॉ. सती ने कहा कि नरेंद्र सिंह रावत ने सेंट्रल हास्पिटल में वरिष्ठ गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. एचएस भंडारी से परामर्श लिया था। साथ ही आंख में संक्रमण होने के कारण डॉ. भानु प्रताप पांगती को भी दिखा रहा था। जबकि मधुमेह के कारण डॉ. मोहन तिवारी को भी दिखा रहा था। डॉ. भंडारी ने 17 जनवरी को यूरो सर्जन के पास रिफर कर दिया था। 19 जनवरी की शाम को तीमारदार गंभीर अवस्था में मरीज को लाए थे। अस्पताल ने मरीज का इमरजेंसी में तत्काल इलाज शुरू किया और आईसीयू में भर्ती किया। साथ ही मरीज के तीमारदारों को जान के खतरे और इलाज संबंधित विस्तृत जानकारी दी थी। आपरेशन के दौरान खराब और पस पड़ी किडनी को निकाला गया। साथ ही मरीज की पत्नी को गुर्दा बाइप्सी कराने के लिए दी गई। मल्टी आर्गन फेल होने के कारण नरेंद्र की मौत हुई थी। कहा कि किडनी निकालने को लेकर कुछ लोग दुष्प्रचार कर अस्पताल की छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं।
डॉ. जेएस खुराना ने कहा कि आईएमए की कमेटी ने सभी प्रपत्र देखे हैं और अस्पताल की ओर से कोई कमी नहीं की गई। आपरेशन से पहले तीमारदारों से चार बार अनुमति ली गई थी। बताया मरीज निजी अस्पताल में आने से पहले एसटीएच में भी इलाज करा रहा था। इस दौरान आईएमए हल्द्वानी के अध्यक्ष डॉ. डीसी पंत, डॉ. अनिल अग्रवाल, डॉ. बीसी पांडे, डॉॅ. प्रकाश पंत, डॉ. संजय जुयाल, डॉ. अजय पाल, डॉ. भूपेंद्र बिष्ट आदि थे।
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आपरेशन से पहले चार बार ली गई थी स्वीकृति
साईं हास्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉ. मोहन सती बोले मृतक की पत्नी को जांच के लिए दी थी किडनी
किडनी निकालने के आरोप निराधार, शुगर और संक्रमण के कारण खराब हो चुकी थी किडनी
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पत्रकारों से बातचीत में डॉ. सती ने कहा कि नरेंद्र सिंह रावत ने सेंट्रल हास्पिटल में वरिष्ठ गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. एचएस भंडारी से परामर्श लिया था। साथ ही आंख में संक्रमण होने के कारण डॉ. भानु प्रताप पांगती को भी दिखा रहा था। जबकि मधुमेह के कारण डॉ. मोहन तिवारी को भी दिखा रहा था। डॉ. भंडारी ने 17 जनवरी को यूरो सर्जन के पास रिफर कर दिया था। 19 जनवरी की शाम को तीमारदार गंभीर अवस्था में मरीज को लाए थे। अस्पताल ने मरीज का इमरजेंसी में तत्काल इलाज शुरू किया और आईसीयू में भर्ती किया। साथ ही मरीज के तीमारदारों को जान के खतरे और इलाज संबंधित विस्तृत जानकारी दी थी। आपरेशन के दौरान खराब और पस पड़ी किडनी को निकाला गया। साथ ही मरीज की पत्नी को गुर्दा बाइप्सी कराने के लिए दी गई। मल्टी आर्गन फेल होने के कारण नरेंद्र की मौत हुई थी। कहा कि किडनी निकालने को लेकर कुछ लोग दुष्प्रचार कर अस्पताल की छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं।
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डॉ. जेएस खुराना ने कहा कि आईएमए की कमेटी ने सभी प्रपत्र देखे हैं और अस्पताल की ओर से कोई कमी नहीं की गई। आपरेशन से पहले तीमारदारों से चार बार अनुमति ली गई थी। बताया मरीज निजी अस्पताल में आने से पहले एसटीएच में भी इलाज करा रहा था। इस दौरान आईएमए हल्द्वानी के अध्यक्ष डॉ. डीसी पंत, डॉ. अनिल अग्रवाल, डॉ. बीसी पांडे, डॉॅ. प्रकाश पंत, डॉ. संजय जुयाल, डॉ. अजय पाल, डॉ. भूपेंद्र बिष्ट आदि थे।
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साईं हास्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉ. मोहन सती बोले मृतक की पत्नी को जांच के लिए दी थी किडनी
किडनी निकालने के आरोप निराधार, शुगर और संक्रमण के कारण खराब हो चुकी थी किडनी