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तो क्या 19 के लिए जमीन तलाश रहे हैं रावत
Updated Tue, 23 Jan 2018 02:16 AM IST
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हल्द्वानी। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत अब कुमाऊं में खासे सक्रिय हो गए हैं। उनकी इस सक्रियता से कांग्रेस में भी बेचैनी है और रावत का यह नया पैंतरा 2019 के लोक सभा चुनाव की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि रावत खुद अपने इन दौरों को विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के कारण की तलाश बता रहे हैं।
विधानसभा चुनाव में हरीश रावत प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए दो सीटों से चुनाव लड़े थे। उन्हें दोनों ही सीटों से हार का सामना करना पड़ा था और इस चुनाव में कांग्रेस को भी प्रदेश में अभूतपूर्व हार का सामना करना पड़ा था। इस हार के बाद कुछ समय तक शांत बैठे हरीश रावत अब कुमाऊं में अति सक्रिय हो गए हैं। उनके पिछले कुछ दिनों के कुमाऊं में हुए कार्यक्रम यह साफ बयान भी कर रहे हैं। पहले उन्होंने अल्मोड़ा और बागेश्वर में दौरा किया। इसके बाद उनका फोकस तराई में रहा। उन्होंने नैनीताल में भी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की थी। कार्यक्रमों के बहाने राजनीतिक संबंध बढ़ाने के साथ ही रावत ने कांग्रेस की ओर से सरकार के खिलाफ चल रहे राजनीतिक आंदोलनों में भी भाग लिया।
कुमाऊं में अपनी इस सक्रियता को रावत 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के कारण की तलाश बता रहे हैं। रावत के इस तर्क को कांग्रेस के ही कई नेता पचा नहीं पा रहे हैं। माना जा रहा है कि रावत की यह सक्रियता 2019 के लोक सभा चुनाव को देखते हुए हैं। रावत 2019 के चुनाव के लिए कार्यकर्ताओं के मन की थाह भी ले रहे हैं और अपने लिए सीट की तलाश भी कर रहे हैं।
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-अपने लिए नहीं बल्कि पार्टी के हिसाब से तैयारी कर रहा हूं। अब घूम-घूम कर वोटरों के कांग्रेस से दूर होने का कारण तलाश रहा हूं। अल्मोड़ा में कुछ सीटों पर तीन हजार और कुछ पर पांच हजार से जीत-हार हुई है। थोड़ी और मेहनत की जाती तो बेहतर हो सकता था।
-हरीश रावत, पूर्व मुख्यमंत्री
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विधानसभा चुनाव में हरीश रावत प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए दो सीटों से चुनाव लड़े थे। उन्हें दोनों ही सीटों से हार का सामना करना पड़ा था और इस चुनाव में कांग्रेस को भी प्रदेश में अभूतपूर्व हार का सामना करना पड़ा था। इस हार के बाद कुछ समय तक शांत बैठे हरीश रावत अब कुमाऊं में अति सक्रिय हो गए हैं। उनके पिछले कुछ दिनों के कुमाऊं में हुए कार्यक्रम यह साफ बयान भी कर रहे हैं। पहले उन्होंने अल्मोड़ा और बागेश्वर में दौरा किया। इसके बाद उनका फोकस तराई में रहा। उन्होंने नैनीताल में भी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की थी। कार्यक्रमों के बहाने राजनीतिक संबंध बढ़ाने के साथ ही रावत ने कांग्रेस की ओर से सरकार के खिलाफ चल रहे राजनीतिक आंदोलनों में भी भाग लिया।
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कुमाऊं में अपनी इस सक्रियता को रावत 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के कारण की तलाश बता रहे हैं। रावत के इस तर्क को कांग्रेस के ही कई नेता पचा नहीं पा रहे हैं। माना जा रहा है कि रावत की यह सक्रियता 2019 के लोक सभा चुनाव को देखते हुए हैं। रावत 2019 के चुनाव के लिए कार्यकर्ताओं के मन की थाह भी ले रहे हैं और अपने लिए सीट की तलाश भी कर रहे हैं।
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-अपने लिए नहीं बल्कि पार्टी के हिसाब से तैयारी कर रहा हूं। अब घूम-घूम कर वोटरों के कांग्रेस से दूर होने का कारण तलाश रहा हूं। अल्मोड़ा में कुछ सीटों पर तीन हजार और कुछ पर पांच हजार से जीत-हार हुई है। थोड़ी और मेहनत की जाती तो बेहतर हो सकता था।
-हरीश रावत, पूर्व मुख्यमंत्री