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पहले सहकारिता न्यायाधिकरण में दायर करें अपील

Tue, 21 Nov 2017 02:06 AM IST
Updated Tue, 21 Nov 2017 02:06 AM IST
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पहले सहकारिता न्यायाधिकरण में दायर करें अपील
नैनीताल। उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ के अंतर्गत कार्यरत सहकारी समिति सदस्यों की सदस्यता खत्म करने के मामले में सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को निस्तारित करते हुए कहा है कि वे सहकारिता न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) में अपील दायर करें।
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न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। याचिका में कहा था कि पिछले दिनों सरकार ने राज्य की 96 सहकारी समितियों को भंग कर दिया था। सरकार के इस आदेश को देहरा कृषि उत्पादन एवं रसायन विपणन समिति, भागीरथी कृषि उत्पादन एवं रसायन विपणन समिति, बारह खेड़ा कृषि उत्पादन, रसायन विपणन समिति, मां देवी भवानी कृषि उत्पादन समिति ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर चुनौती दी थी। याचिका में कहा था कि ये समितियां वर्षों से उत्तराखंड सहकारिता संघ की सदस्य हैं। समितियों में गड़बड़ी भी नही है, लेकिन सरकार ने राजनीतिक कारणों से समितियों की सदस्यता खत्म की है। सरकार की ओर से समितियों को सुनवाई का कोई मौका तक नहीं दिया गया।
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सरकार की ओर से कहा गया कि समितियों की नियमावली के अनुसार विपणन के लिए समितियों का कार्य क्षेत्र या तो जिले का एक भाग या एक से अधिक जिलों का एक भाग होना चाहिए। इन समितियों का कार्य क्षेत्र संपूर्ण जिला या एक का गढ़वाल मंडल है। संघ का सदस्य होने के नाते विक्रय क्षेत्र होना जरूरी है। इन समितियों की ओर से क्रय विक्रय नहीं किया गया। नोटिस जारी कर समितियों को सुनवाई का अवसर प्रदान किया गया था। एकल पीठ ने समितियों को अपनी अपील न्यायाधिकरण में करने तथा न्यायाधिकरण को दो माह में अपील निस्तारित करने का आदेश पारित किया है।
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