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सूखी नदी में किया जा रहा है खनन
Updated Tue, 24 Oct 2017 01:39 AM IST
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हल्द्वानी। हाथी कॉरिडोर वाली सूखी नदी से पत्थर निकाल कर बेचे जा रहे हैं। यह हाल तब है जबकि नदी में खनन पूरी तरह से प्रतिबंधित है और वन विभाग की सीधी निगरानी में है। गौला पार पूर्वी खेड़ा के पिछले इलाके में सूखी नदी है। इस नदी से नंधौर का जंगल सटा है। यहां हाथियों की आवाजाही की वजह से इसको हाथी कॉरिडोर भी घोषित किया गया है। पिछले कई हफ्तों से यहां लगातार हाथी देखा जा रहा है।
इस नदी पर भी अब खनन माफिया की निगाह पड़ गई है। ग्रामीणों के अनुसार देर रात नदी में ट्रैक्टर ट्रॉलियों से भरकर अवैध ढंग से पत्थरों की तस्करी की जाती है। रात ही रात में माफिया नदी से टनों पत्थर निकाल कर ले जाते हैं, जब सुबह होने वाली होती है तो नदी किनारे ही पत्थरों का स्टॉक कर दिया जाता है। दिन में इन पत्थरों के खरीदार मिल गए तो ठीक। नहीं तो पत्थरों को सीधे क्रशर में पहुंचा दिया जाता है। इस तरह माफिया प्रतिबंधित क्षेत्र में खनन कर जेब भर रहे हैं। सड़क से महज कुछ दूरी होने पर भी वन महकमे को इसकी भनक नहीं है। रातभर ट्रैक्टर ट्रॉली चलती है और गश्ती दल को भनक तक नहीं लगती है।
विरोध करो तो झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी
हल्द्वानी। ग्रामीणों की मानें तो अगर नदी में खनन का विरोध किया जाए तो माफिया भिड़ जाते हैं। उनके गुर्गे मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देते हैं। वन कर्मियों से कई बार इसकी शिकायत की गई, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई तो ग्रामीण भी शांत हो गए।
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इस नदी पर भी अब खनन माफिया की निगाह पड़ गई है। ग्रामीणों के अनुसार देर रात नदी में ट्रैक्टर ट्रॉलियों से भरकर अवैध ढंग से पत्थरों की तस्करी की जाती है। रात ही रात में माफिया नदी से टनों पत्थर निकाल कर ले जाते हैं, जब सुबह होने वाली होती है तो नदी किनारे ही पत्थरों का स्टॉक कर दिया जाता है। दिन में इन पत्थरों के खरीदार मिल गए तो ठीक। नहीं तो पत्थरों को सीधे क्रशर में पहुंचा दिया जाता है। इस तरह माफिया प्रतिबंधित क्षेत्र में खनन कर जेब भर रहे हैं। सड़क से महज कुछ दूरी होने पर भी वन महकमे को इसकी भनक नहीं है। रातभर ट्रैक्टर ट्रॉली चलती है और गश्ती दल को भनक तक नहीं लगती है।
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विरोध करो तो झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी
हल्द्वानी। ग्रामीणों की मानें तो अगर नदी में खनन का विरोध किया जाए तो माफिया भिड़ जाते हैं। उनके गुर्गे मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देते हैं। वन कर्मियों से कई बार इसकी शिकायत की गई, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई तो ग्रामीण भी शांत हो गए।
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