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नैनीताल की लोअर माल रोड पर वाहन नहीं चलने थे
Updated Mon, 20 Aug 2018 01:47 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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नैनीताल। नगर की मुख्य माल रोड अपर माल में 1840 के दशक में इसके निर्माण के 100 साल बाद तक भी वाहन नहीं चलते थे। ब्रिटिश शासक इसके प्रति इतने संवेदनशील थे कि इसमें केवल प्रदेश के राज्यपाल के नैनीताल आगमन पर उनका वाहन चलने की अनुमति थी वह भी केवल एक बार उनके आगमन पर और दूसरी बार वापसी के अवसर पर। यहां तक कि कार ले जाने पर तत्कालीन पालिकाध्यक्ष जसौद सिंह ने प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे गोविंद बल्लभ पंत तक का चालान करवा दिया था जबकि यातायात के अत्यधिक बोझ से झील में समाई लोअर माल रोड पर आजादी के बाद भी लंबे समय तक वाहन चलते ही नहीं थे।
दरअसल इसे अंग्रेजों ने वाहनों के लिए बनाया ही नहीं था। 1840 के दशक में अपर माल के साथ ही निर्माण के लगभग 130 वर्षों तक यह कच्ची ही थी और इस पर केवल घुड़सवारी होती थी। सत्तर के दशक में यातायात बढ़ने पर इसे पक्की रोड बनाया गया और 1990 के दशक में यातायात का दबाव बढ़ने पर अपर और लोअर माल में वनवे यातायात की व्यवस्था हुई। 1995 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 2000 में हाईकोर्ट के दखल पर नैनीताल के कैचमेंट क्षेत्र में घुड़सवारी प्रतिबंधित होने के बाद से यह केवल वाहनों की आवाजाही के लिए रह गई। इन दोनों ही माल रोड में वाहनों की तादाद अत्यधिक बढ़ जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रो. अजय रावत की याचिका पर भारी वाहन प्रतिबंधित करने के साथ ही हल्के वाहनों का दबाव कम करने के निर्देश दिए थे लेकिन इस पर भी अमल नहीं हुआ। प्रो. रावत के मुताबिक जसौद 1941 से 53 तक नगरपालिका के पूर्णकालिक अध्यक्ष रहे थे। कानून का सख्त पालन करने के लिए वे मशहूर रहे। तत्कालीन सीएम पंत शरीर से भारी थे। इसलिए वह माल रोड में गाड़ी ले आए तो जसौद ने उनका चालान करवा दिया। बाद में पंडित पंत ने माल रोड में वाहनों की एंट्री की शुरुआत करवाई। प्रो. रावत के अनुसार झील में मोटरबोट उतारने पर झील का जल प्रदूषित होने का हवाला देकर जसौद ने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पेड़ की कुछ टहनियां काटने पर स्वयं अपनी पत्नी का भी चालान करवा दिया था।
अपर माल में भी केवल राज्यपाल के वाहन की अनुमति थी
मुख्यमंत्री तक के वाहन का चालान कर दिया गया था
झील में मोटरबोट चलाने पर प्रधानमंत्री तक का चालान हो चुका है
नैनीताल में थीं तीन माल रोड
नैनीताल। शहर में अपर, लोअर माल के अलावा ब्रिटिश काल में ठंडी सड़क को भी माल रोड कहा जाता था। इसका नाम साउथ माल था। आम तौर पर माल रोड उसे कहा जाता है, जिसके दोनों ओर छायादार वृक्ष हों और कुछ शॉपिंग स्थल हों। माल रोड मुख्यत: पैदल घूमने के उद्देश्य से बनाई जाती है।
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दरअसल इसे अंग्रेजों ने वाहनों के लिए बनाया ही नहीं था। 1840 के दशक में अपर माल के साथ ही निर्माण के लगभग 130 वर्षों तक यह कच्ची ही थी और इस पर केवल घुड़सवारी होती थी। सत्तर के दशक में यातायात बढ़ने पर इसे पक्की रोड बनाया गया और 1990 के दशक में यातायात का दबाव बढ़ने पर अपर और लोअर माल में वनवे यातायात की व्यवस्था हुई। 1995 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 2000 में हाईकोर्ट के दखल पर नैनीताल के कैचमेंट क्षेत्र में घुड़सवारी प्रतिबंधित होने के बाद से यह केवल वाहनों की आवाजाही के लिए रह गई। इन दोनों ही माल रोड में वाहनों की तादाद अत्यधिक बढ़ जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रो. अजय रावत की याचिका पर भारी वाहन प्रतिबंधित करने के साथ ही हल्के वाहनों का दबाव कम करने के निर्देश दिए थे लेकिन इस पर भी अमल नहीं हुआ। प्रो. रावत के मुताबिक जसौद 1941 से 53 तक नगरपालिका के पूर्णकालिक अध्यक्ष रहे थे। कानून का सख्त पालन करने के लिए वे मशहूर रहे। तत्कालीन सीएम पंत शरीर से भारी थे। इसलिए वह माल रोड में गाड़ी ले आए तो जसौद ने उनका चालान करवा दिया। बाद में पंडित पंत ने माल रोड में वाहनों की एंट्री की शुरुआत करवाई। प्रो. रावत के अनुसार झील में मोटरबोट उतारने पर झील का जल प्रदूषित होने का हवाला देकर जसौद ने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पेड़ की कुछ टहनियां काटने पर स्वयं अपनी पत्नी का भी चालान करवा दिया था।
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अपर माल में भी केवल राज्यपाल के वाहन की अनुमति थी
मुख्यमंत्री तक के वाहन का चालान कर दिया गया था
झील में मोटरबोट चलाने पर प्रधानमंत्री तक का चालान हो चुका है
नैनीताल में थीं तीन माल रोड
नैनीताल। शहर में अपर, लोअर माल के अलावा ब्रिटिश काल में ठंडी सड़क को भी माल रोड कहा जाता था। इसका नाम साउथ माल था। आम तौर पर माल रोड उसे कहा जाता है, जिसके दोनों ओर छायादार वृक्ष हों और कुछ शॉपिंग स्थल हों। माल रोड मुख्यत: पैदल घूमने के उद्देश्य से बनाई जाती है।
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