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गौला कॉरपस फंड से मानव वन्य जीव टकराव रोकने में होगा इस्तेमाल
Updated Thu, 18 Jan 2018 02:13 AM IST
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हल्द्वानी। अब तराई भाबर के जंगलों में मानव वन्य जीवों के टकराव को कम करने के लिए जिम कार्बेट पार्क और नैनीताल जू के पशु चिकित्सकों पर निर्भर नहीं रहना होगा। गौला कॉरपस फंड से दो वन्य जीव पशु चिकित्सकों की नियुक्ति की जाएगी। जो, पश्चिमी वन वृत्त में कहीं भी वन्य जीव की हलचल होने पर सटीक कार्रवाई को अंजाम देंगे।
तराई पूर्वी, तराई केंद्रीय, तराई पश्चिमी, हल्द्वानी एवं रामनगर वन प्रभागों को शामिल किया हुआ पश्चिमी वन वृत्त नैनीताल, ऊधम सिंह नगर से टनकपुर तक फैला हुआ है। इस वृत्त में नंधौर अभ्यारण्य, सुरई, रामनगर, टांडा जैसे जंगल भी हैं जिनमें बाघ, गुलदार, हाथियों की सबसे ज्यादा हलचल है। इधर, एक साल में वन्य जीवों की आबादी में घुसने की सबसे ज्यादा घटनाएं पश्चिमी वृत्त में हुई। यहां कहीं भी ऐसी घटना होने पर जिम कार्बेट नेशनल पार्क और नैनीताल जू से पशु चिकित्सकों को बुलाया जाता है। घंटों इंतजार के बाद पशु चिकित्सक के आने तक मानव, वन्य जीव दोनों को ही खतरा बना रहता है। इसी के मद्देनजर पश्चिमी वन वृत्त सरंक्षक डॉ. पराग मधुकर धकाते ने गौला कॉरपस फंड से संविदा पर दो पशु चिकित्सकों की तैनाती का प्रस्ताव बनाया। जिसे शासन ने मंजूरी प्रदान कर दी है। जल्द ही साक्षात्कार के जरिए संविदा पर दो पशु चिकित्सकों की तैनाती की जाएगी। जो पश्चिमी वन वृत्त के किसी भी क्षेत्र में वन्य जीव की आबादी में घुसपैठ, घायल, होने की सूचना पर तुरंत कार्रवाई करेंगे। इस बाबत सभी कागजी कार्रवाई पूरी हो गई है। जल्द ही चिकित्सकों की तैनाती कर दी जाएगी।
वन्य जीव के पहुंचने पर तुरंत पहुंचेगी क्यूआरटी
तराई पूर्वी के प्रभागीय वनाधिकारी नीतिश मणि त्रिपाठी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय जू में एक क्यूआरटी (क्विक रिस्पांस दल) का गठन किया जाएगा। जहां वन्य जीव को काबू में करने के लिए पिंजड़ा, कंबल, ट्रैंकुलाइज गन, बेहोशी दवाएं, छह-सात विशेषज्ञों की टीम रहेगी जो किसी भी घटना पर तत्काल कार्रवाई करेगी। इसी तरह जू में एक रेस्क्यू सेंटर बनाया जाएगा जहां वन्य जीवों का उपचार किया जाएगा।
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साक्षात्कार समिति करेगी चयन
पशु चिकित्सकों की तैनाती के लिए वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय साक्षात्कार समिति का गठन किया गया है। प्रभागीय वनाधिकारी नीतिश मणि त्रिपाठी इसमें सचिव होंगे। जबकि डब्ल्यूआइआइ, डब्ल्यू एफएफ, जू के अधिकारी सदस्य होंगे।
कोट
- गौला कॉरपस फंड से दो पशु चिकित्सकों की तैनाती और क्यूआरटी, रेस्क्यू सेंटर बनाया जाएगा। जिसका मकसद मानव वन्य जीव के टकराव को कम करना होगा। - डॉ. पराग मधुकर धकाते, वन संरक्षक पश्चिमी वन वृत्त।
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तराई पूर्वी, तराई केंद्रीय, तराई पश्चिमी, हल्द्वानी एवं रामनगर वन प्रभागों को शामिल किया हुआ पश्चिमी वन वृत्त नैनीताल, ऊधम सिंह नगर से टनकपुर तक फैला हुआ है। इस वृत्त में नंधौर अभ्यारण्य, सुरई, रामनगर, टांडा जैसे जंगल भी हैं जिनमें बाघ, गुलदार, हाथियों की सबसे ज्यादा हलचल है। इधर, एक साल में वन्य जीवों की आबादी में घुसने की सबसे ज्यादा घटनाएं पश्चिमी वृत्त में हुई। यहां कहीं भी ऐसी घटना होने पर जिम कार्बेट नेशनल पार्क और नैनीताल जू से पशु चिकित्सकों को बुलाया जाता है। घंटों इंतजार के बाद पशु चिकित्सक के आने तक मानव, वन्य जीव दोनों को ही खतरा बना रहता है। इसी के मद्देनजर पश्चिमी वन वृत्त सरंक्षक डॉ. पराग मधुकर धकाते ने गौला कॉरपस फंड से संविदा पर दो पशु चिकित्सकों की तैनाती का प्रस्ताव बनाया। जिसे शासन ने मंजूरी प्रदान कर दी है। जल्द ही साक्षात्कार के जरिए संविदा पर दो पशु चिकित्सकों की तैनाती की जाएगी। जो पश्चिमी वन वृत्त के किसी भी क्षेत्र में वन्य जीव की आबादी में घुसपैठ, घायल, होने की सूचना पर तुरंत कार्रवाई करेंगे। इस बाबत सभी कागजी कार्रवाई पूरी हो गई है। जल्द ही चिकित्सकों की तैनाती कर दी जाएगी।
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वन्य जीव के पहुंचने पर तुरंत पहुंचेगी क्यूआरटी
तराई पूर्वी के प्रभागीय वनाधिकारी नीतिश मणि त्रिपाठी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय जू में एक क्यूआरटी (क्विक रिस्पांस दल) का गठन किया जाएगा। जहां वन्य जीव को काबू में करने के लिए पिंजड़ा, कंबल, ट्रैंकुलाइज गन, बेहोशी दवाएं, छह-सात विशेषज्ञों की टीम रहेगी जो किसी भी घटना पर तत्काल कार्रवाई करेगी। इसी तरह जू में एक रेस्क्यू सेंटर बनाया जाएगा जहां वन्य जीवों का उपचार किया जाएगा।
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साक्षात्कार समिति करेगी चयन
पशु चिकित्सकों की तैनाती के लिए वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय साक्षात्कार समिति का गठन किया गया है। प्रभागीय वनाधिकारी नीतिश मणि त्रिपाठी इसमें सचिव होंगे। जबकि डब्ल्यूआइआइ, डब्ल्यू एफएफ, जू के अधिकारी सदस्य होंगे।
कोट
- गौला कॉरपस फंड से दो पशु चिकित्सकों की तैनाती और क्यूआरटी, रेस्क्यू सेंटर बनाया जाएगा। जिसका मकसद मानव वन्य जीव के टकराव को कम करना होगा। - डॉ. पराग मधुकर धकाते, वन संरक्षक पश्चिमी वन वृत्त।