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दून सहित 14 निकायों के सीमा विस्तार का मामला पहुंचा उच्च न्यायालय
Updated Tue, 05 Dec 2017 02:05 AM IST
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नैनीताल। कांग्रेस और भाजपा के बीच खींचतान का सबब बना निकायों के सीमा विस्तार का मामला अब उच्च न्यायालय पहुंच गया है। सोमवार को दून नगर निगम से संबंधित एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद खंडपीठ ने सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। देहरादून निवासी कुलविंदर सिंह ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर 28 अक्टूबर 2017 को जारी अधिसूचना को चुनौती देते हुए उसे निरस्त करने की मांग की थी। इस अधिसूचना मे दून समेत 14 निकायों का सीमा विस्तार किया गया है। याची के मुताबिक शहरी विकास विभाग ने 40 नगर निकायों के सीमा विस्तार का निर्णय लिया। सभी निकायों के प्रस्ताव कैबिनेट में मंजूर हो चुके हैं। मंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को 30 अक्टूबर 2017 तक सीमा विस्तार पर अंतिम रिपोर्ट शासन को प्रेषित करने के निर्देश दिए थे। सरकार अब खाला, भांडर, डाम, कुठाल, बगरल, किरशाली, दानियों का डांडा, मक्कावाला, सिनोला, मालसी व जोहरी इत्यादि को भी सीमा विस्तार के प्रस्ताव में शामिल कर रही है। इसे रोका जाए। याची के मुताबिक कि इस क्षेत्र में 50 से 75 प्रतिशत भूभाग जंगल, नदी, नालों वाला और शेष भाग में आबादी तथा लीची के बगीचे, महत्वपूर्ण शिक्षण संस्थान, सरकारी कार्यालय स्थित हैं। इनको नगर निगम में शामिल न किया जाए। इसकी आपत्ति याचिकाकर्ता द्वारा शहरी विकास विभाग को भी भेजी गई। याची के अनुसार आपत्ति पर गौर नहीं किया गया। खंडपीठ ने सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिए।
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मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। देहरादून निवासी कुलविंदर सिंह ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर 28 अक्टूबर 2017 को जारी अधिसूचना को चुनौती देते हुए उसे निरस्त करने की मांग की थी। इस अधिसूचना मे दून समेत 14 निकायों का सीमा विस्तार किया गया है। याची के मुताबिक शहरी विकास विभाग ने 40 नगर निकायों के सीमा विस्तार का निर्णय लिया। सभी निकायों के प्रस्ताव कैबिनेट में मंजूर हो चुके हैं। मंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को 30 अक्टूबर 2017 तक सीमा विस्तार पर अंतिम रिपोर्ट शासन को प्रेषित करने के निर्देश दिए थे। सरकार अब खाला, भांडर, डाम, कुठाल, बगरल, किरशाली, दानियों का डांडा, मक्कावाला, सिनोला, मालसी व जोहरी इत्यादि को भी सीमा विस्तार के प्रस्ताव में शामिल कर रही है। इसे रोका जाए। याची के मुताबिक कि इस क्षेत्र में 50 से 75 प्रतिशत भूभाग जंगल, नदी, नालों वाला और शेष भाग में आबादी तथा लीची के बगीचे, महत्वपूर्ण शिक्षण संस्थान, सरकारी कार्यालय स्थित हैं। इनको नगर निगम में शामिल न किया जाए। इसकी आपत्ति याचिकाकर्ता द्वारा शहरी विकास विभाग को भी भेजी गई। याची के अनुसार आपत्ति पर गौर नहीं किया गया। खंडपीठ ने सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिए।
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