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आज से खुल जाएगा वीरभट्टी पुल
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल।
Updated Sat, 02 Dec 2017 01:47 AM IST
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वीरभट्टी का वैली ब्रिज
- फोटो : अमर उजाला
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ज्योलीकोट (नैनीताल)। ज्योलीकोट-कर्णप्रयाग राष्ट्रीय राजमार्ग में वीरभट्टी में गैस वाहन हादसे के बाद वीरगति को प्राप्त ब्रिटिशकालीन पुल के विकल्प के रूप में बन रहे घाटी पुल को आखिरकार शनिवार को यातायात के लिए खोल दिया जाएगा। शुक्रवार देर शाम तक अंतिम चरण का काम पूरा कर लिया गया। पूरे 68 दिन बाद कुमाऊं की लाइफ लाइन में यातायात सुचारू होने के बाद इस मार्ग से सटे दर्जनों गांवों के लोगों, भीमताल मार्ग में बढ़े दबाव से परेशान यात्रियों, पर्यटकों और वाहन चालकों को राहत मिलेगी।
25 सितंबर को गैस वाहन में आग लगने के बाद विस्फोट से वीरभट्टी पुल क्षति ग्रस्त हो गया था। इसके बाद इस पुल को यातायात के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया था। 26 अक्तूबर को जब पुल के काटे गये हिस्से को क्रेन के मदद से हटाने का काम किया जा रहा था तो अचानक एक हिस्सा भार सहन नहीं कर पाया और लचक खा कर झुक गया। इस कारण पुल पर यातायात सुचारू होने की सभी संभावनाएं खत्म हो गई। विकल्प के रूप में यहां घाटी पुल का निर्माण शुरू किया गया। हादसे के दो महीने में रानीबाग से ऊपर निवास करने वाली हजारों की आबादी, कास्तकार, रोज आवागमन करने वाले यात्री खासकर वीर भट्टी, गेठिया, खूपी और भूमियाधार के लोगों की जिन्दगी ठहर सी गई थी।
बलियानाला में निर्माणाधीन घाटी पुल का निर्माण कार्य 26 अक्तूबर को शुरू कर दिया गया और कार्यदायी संस्था एनएच ने इसे 15 नवंबर तक तैयार करने का दावा किया। जिलाधिकारी ने 5 दिन का अतिरिक्त समय देकर 20 नवंबर की समय सीमा तय दी लेकिन विभाग अपने दावे में खरा नहीं उतर पाया और आखिरकार शनिवार की तारीख तय की गई।
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घाटी पुल का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। दोनों छोर में कंक्रीट कर दिया गया है और पुल के सभी हिस्सों की जांच पूरी कर ली गई है। शानिवार को दस बजे बाद पुन: निरीक्षण कर इसे यातायात के लिए खोल दिया जाएगा। -महेंद्र कुमार ईई एनएच
पुल की कहानी
25 सितंबर : गैस सिलेंडर लेकर जा रहे ट्रक में आग लगने से ब्रिटिशकालीन पुल क्षतिग्रस्त हुआ।
04 अक्तूबर : 11 दिन बाद रुड़की के प्रो संजय किरमानी ने किया निरीक्षण।
18 अक्तूबर : मरम्मत कार्य शुरू लेकिन वेल्डर श्रमिकों के भरोसे छोड़ दिया गया काम।
26 अक्तूबर : अप्रशिक्षित कारीगरों के कारण ऐतिहासिक पुल वीरगति को प्राप्त हुआ।
27 अक्तूबर : एडीएम, मुख्य अभियंता, विधायक संजीव आर्य ने किया दौरा, घाटी पुल बनाने का निर्णय।
28 अक्तूबर : जिलाधिकारी ने किया निरीक्षण, पुल सूचारू करने के लिए पांच दिन का अतिरिक्त समय दिया।
20 नवंबर : एनएच कार्य पूरा नहीं कर पाया। 26 नवंबर को को खोलने का किया दावा।
ब्रिटिश वास्तुकला का अद्भुत नमूना था वह पुल
101 वर्ष पूरा कर वीरगति को प्राप्त वीरभट्टी पुल ब्रिटिश वास्तुकला का अद्भुत नमूना था। इसे 1906 में द केनाल वर्कशॉप एंड आयरन फाउंड्री रुड़की ने बनाया था। इसकी मुहर अब तक पुल पर चमचमा रही है। इसमें ब्रिटिश इंजीनियरों ने उस समय की उपलब्ध उच्चतम संरचना तकनीक का प्रयोग किया था जिस कारण सौ वर्ष बीत जाने के बाद भी यह पुल जस का तस खड़ा था। पिछले दिनों 25 सितंबर को गैस सिलिंडरों से लदे एक ट्रक में आग लग जाने से इस पुल के दो चेंबर टेड़े हो गए थे। एनएच 87- ई के इंजीनियरों का कौशल देखिए... उन्होंने पहले तो पुल को एक महीने तक बंद करा दिया और बाद में मरम्मत के नाम पर ऐसे काट दिया कि अमर सा जान पड़ता यह पुल एक तरफ झुक गया। घाटी पुल बनवाने में आज के इंजीनियरों लोहे के चने चबवाने पड़े।
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25 सितंबर को गैस वाहन में आग लगने के बाद विस्फोट से वीरभट्टी पुल क्षति ग्रस्त हो गया था। इसके बाद इस पुल को यातायात के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया था। 26 अक्तूबर को जब पुल के काटे गये हिस्से को क्रेन के मदद से हटाने का काम किया जा रहा था तो अचानक एक हिस्सा भार सहन नहीं कर पाया और लचक खा कर झुक गया। इस कारण पुल पर यातायात सुचारू होने की सभी संभावनाएं खत्म हो गई। विकल्प के रूप में यहां घाटी पुल का निर्माण शुरू किया गया। हादसे के दो महीने में रानीबाग से ऊपर निवास करने वाली हजारों की आबादी, कास्तकार, रोज आवागमन करने वाले यात्री खासकर वीर भट्टी, गेठिया, खूपी और भूमियाधार के लोगों की जिन्दगी ठहर सी गई थी।
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बलियानाला में निर्माणाधीन घाटी पुल का निर्माण कार्य 26 अक्तूबर को शुरू कर दिया गया और कार्यदायी संस्था एनएच ने इसे 15 नवंबर तक तैयार करने का दावा किया। जिलाधिकारी ने 5 दिन का अतिरिक्त समय देकर 20 नवंबर की समय सीमा तय दी लेकिन विभाग अपने दावे में खरा नहीं उतर पाया और आखिरकार शनिवार की तारीख तय की गई।
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घाटी पुल का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। दोनों छोर में कंक्रीट कर दिया गया है और पुल के सभी हिस्सों की जांच पूरी कर ली गई है। शानिवार को दस बजे बाद पुन: निरीक्षण कर इसे यातायात के लिए खोल दिया जाएगा। -महेंद्र कुमार ईई एनएच
पुल की कहानी
25 सितंबर : गैस सिलेंडर लेकर जा रहे ट्रक में आग लगने से ब्रिटिशकालीन पुल क्षतिग्रस्त हुआ।
04 अक्तूबर : 11 दिन बाद रुड़की के प्रो संजय किरमानी ने किया निरीक्षण।
18 अक्तूबर : मरम्मत कार्य शुरू लेकिन वेल्डर श्रमिकों के भरोसे छोड़ दिया गया काम।
26 अक्तूबर : अप्रशिक्षित कारीगरों के कारण ऐतिहासिक पुल वीरगति को प्राप्त हुआ।
27 अक्तूबर : एडीएम, मुख्य अभियंता, विधायक संजीव आर्य ने किया दौरा, घाटी पुल बनाने का निर्णय।
28 अक्तूबर : जिलाधिकारी ने किया निरीक्षण, पुल सूचारू करने के लिए पांच दिन का अतिरिक्त समय दिया।
20 नवंबर : एनएच कार्य पूरा नहीं कर पाया। 26 नवंबर को को खोलने का किया दावा।
ब्रिटिश वास्तुकला का अद्भुत नमूना था वह पुल
101 वर्ष पूरा कर वीरगति को प्राप्त वीरभट्टी पुल ब्रिटिश वास्तुकला का अद्भुत नमूना था। इसे 1906 में द केनाल वर्कशॉप एंड आयरन फाउंड्री रुड़की ने बनाया था। इसकी मुहर अब तक पुल पर चमचमा रही है। इसमें ब्रिटिश इंजीनियरों ने उस समय की उपलब्ध उच्चतम संरचना तकनीक का प्रयोग किया था जिस कारण सौ वर्ष बीत जाने के बाद भी यह पुल जस का तस खड़ा था। पिछले दिनों 25 सितंबर को गैस सिलिंडरों से लदे एक ट्रक में आग लग जाने से इस पुल के दो चेंबर टेड़े हो गए थे। एनएच 87- ई के इंजीनियरों का कौशल देखिए... उन्होंने पहले तो पुल को एक महीने तक बंद करा दिया और बाद में मरम्मत के नाम पर ऐसे काट दिया कि अमर सा जान पड़ता यह पुल एक तरफ झुक गया। घाटी पुल बनवाने में आज के इंजीनियरों लोहे के चने चबवाने पड़े।