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झाड़ फूंक से इलाज करवाने आई महिला की मौत
Updated Mon, 02 Oct 2017 01:51 AM IST
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कालाढूंगी (नैनीताल)। बीमारी का झाड़ फूंक से इलाज करवाने आई बाजपुर के मुंडियाकलां की महिला की बाइक में ही तबियत बिगड़ गई। उसे सरकारी अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
कुंवर सैन की 40 वर्षीय पत्नी बीना देवी का स्वास्थ्य खराब रहता था। रविवार को उसका बेटा संजय राणा उसे यहां गुलजारपुर में झाड़ फूंक करने वाले भगत के वहां लाया था। दोनों भगत के वहां से सुबह आठ बजे बाइक से घर लौट रहे थे। बोरपुल के पास बाइक में ही बीना का स्वास्थ्य बिगड़ गया। बेहोश होने पर संजय परेशान हो गया। वह बीना देवी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गया। जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सूचना के बाद घर वाले भी आ गए। बीना देवी के सात बच्चे हैं। वह पति कुंवर सैन के साथ मजदूरी कर अपने बच्चों का भरण पोषण कर रही थी। एसआई हरीश पुरी ने बताया महिला के शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं पाए गए हैं। मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा। घर वालों ने कोई तहरीर नहीं दी है।
बेटे का आरोप, एक घंटे तक अस्पताल में तड़पती रहीं
संजय का आरोप है कि अस्पताल लाने के बाद वह डॉक्टरों को बुलाने के लिए इधर-उधर भटकता रहा। आरोप है कि एक घंटे तक कोई डॉक्टर देखने नहीं आया। उसकी मां अस्पताल के फर्श पर तड़पती रही। कुछ देर बाद उसने दम तोड़ दिया। संजय का कहना है कि यदि समय से इलाज मिल जाता तो शायद जान बच सकती थी।
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कुंवर सैन की 40 वर्षीय पत्नी बीना देवी का स्वास्थ्य खराब रहता था। रविवार को उसका बेटा संजय राणा उसे यहां गुलजारपुर में झाड़ फूंक करने वाले भगत के वहां लाया था। दोनों भगत के वहां से सुबह आठ बजे बाइक से घर लौट रहे थे। बोरपुल के पास बाइक में ही बीना का स्वास्थ्य बिगड़ गया। बेहोश होने पर संजय परेशान हो गया। वह बीना देवी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गया। जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सूचना के बाद घर वाले भी आ गए। बीना देवी के सात बच्चे हैं। वह पति कुंवर सैन के साथ मजदूरी कर अपने बच्चों का भरण पोषण कर रही थी। एसआई हरीश पुरी ने बताया महिला के शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं पाए गए हैं। मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा। घर वालों ने कोई तहरीर नहीं दी है।
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बेटे का आरोप, एक घंटे तक अस्पताल में तड़पती रहीं
संजय का आरोप है कि अस्पताल लाने के बाद वह डॉक्टरों को बुलाने के लिए इधर-उधर भटकता रहा। आरोप है कि एक घंटे तक कोई डॉक्टर देखने नहीं आया। उसकी मां अस्पताल के फर्श पर तड़पती रही। कुछ देर बाद उसने दम तोड़ दिया। संजय का कहना है कि यदि समय से इलाज मिल जाता तो शायद जान बच सकती थी।
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