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होश उड़े
Updated Mon, 26 Jun 2017 10:55 PM IST
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करोड़ों के कर नोटिस से लीज धारकों के होश उड़े
रानीखेत (अल्मोड़ा)। लीज नवीनीकरण कर में भारी वृद्धि कर दिए जाने से छावनी क्षेत्र में रह रहे लीज धारकों में हड़कंप मचा हुआ है। नवीनीकरण कर के रूप में लीज धारकों के पास लाखों, करोड़ों रुपये के नोटिस आ रहे हैं, यह धनराशि तीन माह में जमा करनी है, जिसके चलते लीज धारक परेशान हैं। इधर व्यापार मंडल और लीज धारकों की संयुक्त बैठक में इसे तानाशाही करार देते हुए नई लीज नीति का विरोध करने का निर्णय लिया गया। कहा कि यदि इस मामले में संशोधन अथवा ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।
यहां शिव मंदिर सभागार में हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि आजादी से पहले छावनी क्षेत्र में अंग्रेज हुक्मरानों ने न्यूनतम दरों पर भूमि लीज पर आवंटित की थी। आजादी के बाद कई लीजें समाप्त हो गई हैं। लीज खत्म होने से पहले ही लीजधारकों ने नवीनीकरण के लिए आवदेन कर दिया था, लेकिन रक्षा संपदा विभाग और रक्षा मंत्रालय ने इन मामलों को लटकाए रखा। अब नई लीज नीति घोषित कर दी गई है। जिसके तहत छावनी परिषद द्वारा लीज नवीनीकरण कर के रूप में लीज धारकों को लाखों, करोड़ों रुपये जमा करने के नोटिस जारी किए गए हैं, जिसके चलते लीज धारकों में हड़कंप मचा हुआ है। इस राशि को तीन माह के भीतर जमा करने को कहा गया है। सेवानिवृत्त ले. जनरल मोहन चंद्र भंडारी ने कहा कि नई लीज नीति कतई ठीक नहीं है। गरीब, किसान, काश्तकार इतनी बड़ी धनराशि देने की स्थिति में नहीं हैं। व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष मोहन नेगी ने कहा कि छावनी परिषद की बोर्ड बैठक में नई लीज नीति के तहत बढ़े हुए किराए का विरोध कर दिया गया था। व्यापार संघ अध्यक्ष भगवंत नेगी, महासचिव हर्ष पंत ने इसे तानाशाही पूर्ण नीति करार देते हुए कहा कि लीज धारकों के साथ मिलकर इसका विरोध किया जाएगा। सांसद, विधायकों के माध्यम से रक्षा संपदा विभाग को ज्ञापन भेजे जाएंगे। बैठक में व्यापार संघ उपाध्यक्ष दीपक अग्रवाल, दीपक पंत, मनोज पंत, दीप भगत, पंकज प्रसाद, सभासद विनोद चंद्र, मो. इदरीश बाबा, कामरान कुरेशी आदि मौजूद थे।
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। लीज नवीनीकरण कर में भारी वृद्धि कर दिए जाने से छावनी क्षेत्र में रह रहे लीज धारकों में हड़कंप मचा हुआ है। नवीनीकरण कर के रूप में लीज धारकों के पास लाखों, करोड़ों रुपये के नोटिस आ रहे हैं, यह धनराशि तीन माह में जमा करनी है, जिसके चलते लीज धारक परेशान हैं। इधर व्यापार मंडल और लीज धारकों की संयुक्त बैठक में इसे तानाशाही करार देते हुए नई लीज नीति का विरोध करने का निर्णय लिया गया। कहा कि यदि इस मामले में संशोधन अथवा ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।
यहां शिव मंदिर सभागार में हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि आजादी से पहले छावनी क्षेत्र में अंग्रेज हुक्मरानों ने न्यूनतम दरों पर भूमि लीज पर आवंटित की थी। आजादी के बाद कई लीजें समाप्त हो गई हैं। लीज खत्म होने से पहले ही लीजधारकों ने नवीनीकरण के लिए आवदेन कर दिया था, लेकिन रक्षा संपदा विभाग और रक्षा मंत्रालय ने इन मामलों को लटकाए रखा। अब नई लीज नीति घोषित कर दी गई है। जिसके तहत छावनी परिषद द्वारा लीज नवीनीकरण कर के रूप में लीज धारकों को लाखों, करोड़ों रुपये जमा करने के नोटिस जारी किए गए हैं, जिसके चलते लीज धारकों में हड़कंप मचा हुआ है। इस राशि को तीन माह के भीतर जमा करने को कहा गया है। सेवानिवृत्त ले. जनरल मोहन चंद्र भंडारी ने कहा कि नई लीज नीति कतई ठीक नहीं है। गरीब, किसान, काश्तकार इतनी बड़ी धनराशि देने की स्थिति में नहीं हैं। व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष मोहन नेगी ने कहा कि छावनी परिषद की बोर्ड बैठक में नई लीज नीति के तहत बढ़े हुए किराए का विरोध कर दिया गया था। व्यापार संघ अध्यक्ष भगवंत नेगी, महासचिव हर्ष पंत ने इसे तानाशाही पूर्ण नीति करार देते हुए कहा कि लीज धारकों के साथ मिलकर इसका विरोध किया जाएगा। सांसद, विधायकों के माध्यम से रक्षा संपदा विभाग को ज्ञापन भेजे जाएंगे। बैठक में व्यापार संघ उपाध्यक्ष दीपक अग्रवाल, दीपक पंत, मनोज पंत, दीप भगत, पंकज प्रसाद, सभासद विनोद चंद्र, मो. इदरीश बाबा, कामरान कुरेशी आदि मौजूद थे।
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