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प्राचीन भारतीय पंचांग निर्माण पद्वति को संरक्षित करना जरूरी: कुलपति
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हल्द्वानी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग की ओर से ‘ज्योतिषशास्त्र का लोक कल्याण कारी स्वरूप’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। मुख्य अतिथि उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार के कुलपति प्रो. देवी प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि अनेक विज्ञान ज्योतिष से निकलते हैं। ज्योतिष शास्त्र है, उसकी सीमा शून्य से अंत तक है। इसमें असीमित संभावनाएं हैं।
महादेव गिरी संस्कृत विद्यालय के डॉ. नवीन चन्द्र जोशी एवं सनातन संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. गोपाल दत्त त्रिपाठी ने कहा कि ज्योतिष नेत्र के रूप में हमें मार्ग दर्शन कराता है, यह जीवन का नेतृत्व करता है। प्रो. जग्गनाथ ने ज्योतिष पर विशेष कार्य करने व शोध किए जाने पर जोर दिया। अध्यक्षता मानवीय विद्याशाखा के निदेशक प्रो. एचपी शुक्ल ने की। समापन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ओपीएस नेगी ने किया। संचालन डॉ. देवेश मिश्र ने किया। संयोजक डॉ. नंदन तिवारी ने आभार जताया। इस अवसर पर डॉ. महेश चंद्र जोशी, डॉ. नवीन चंद्र बेलवाल, डॉ. सूर्यभान, डॉ. दिनेश कुमार, डॉ. अफ जल आदि मौजूद रहे।
ज्योतिष की सीमा शून्य से अंत तक : प्रो. त्रिपाठी
यूओयू में ज्योतिष विभाग की संगोष्ठी
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महादेव गिरी संस्कृत विद्यालय के डॉ. नवीन चन्द्र जोशी एवं सनातन संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. गोपाल दत्त त्रिपाठी ने कहा कि ज्योतिष नेत्र के रूप में हमें मार्ग दर्शन कराता है, यह जीवन का नेतृत्व करता है। प्रो. जग्गनाथ ने ज्योतिष पर विशेष कार्य करने व शोध किए जाने पर जोर दिया। अध्यक्षता मानवीय विद्याशाखा के निदेशक प्रो. एचपी शुक्ल ने की। समापन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ओपीएस नेगी ने किया। संचालन डॉ. देवेश मिश्र ने किया। संयोजक डॉ. नंदन तिवारी ने आभार जताया। इस अवसर पर डॉ. महेश चंद्र जोशी, डॉ. नवीन चंद्र बेलवाल, डॉ. सूर्यभान, डॉ. दिनेश कुमार, डॉ. अफ जल आदि मौजूद रहे।
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यूओयू में ज्योतिष विभाग की संगोष्ठी