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तो सीतापुर नेत्र चिकित्सालय पर छावनी परिषद बनाएगी कमर्शियल काम्प्लैक्स
Updated Fri, 25 May 2018 11:40 PM IST
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। नेत्र चिकित्सालय सीतापुर अस्पताल प्रबंधन ने अपनी भूमि छावनी परिषद को हस्तांतरित कर दी है। सीतापुर अस्पताल परिसर की भूमि पर अब छावनी परिषद कॉमर्शियल कॉम्प्लैक्स बनाएगी। लंबे समय से देखरेख के अभाव में अस्पताल के भवन जीर्णशीर्ण हो चले थे यह भवन असामाजिक तत्वों का अड्डा बने थे।
छावनी परिषद का प्राथमिक विद्यालय भी 1962 में इसी स्थान पर था। शिव मंदिर के पास छावनी परिषद की इस भूमि पर 1960 से पूर्व सामान्य अस्पताल था। 1962 में छावनी परिषद ने यहां प्राथमिक विद्यालय की स्थापना की। कुछ साल तक प्राथमिक विद्यालय चला। 1965 में सीतापुर अस्पताल प्रबंधन ने छावनी परिषद से 1.113 एकड़ भूमि 30 साल के लिए लीज पर ली। भूमि को भवन सहित लीज पर लेकर यहां आंखों का बड़ा अस्पताल खुला। उस वक्त आंखों के अस्पताल बहुत कम संख्या में थे। भतरौंजखान, भिकियासैंण, सल्ट, चौखुटिया, द्वाराहाट सहित पूरे उपमंडल के नेत्र रोगी यहां इलाज को आते थे। तब यहां डॉक्टर, फार्मेसिस्ट, वार्डब्वॉय सहित भरा-पूरा स्टाफ था, आंखों के ऑपरेशन भी यहीं होते थे। 1969 में यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्ता ने इस स्थान पर एक भवन बनवाया, जिसे डॉक्टरों का आवास बनाया गया। 1980 के बाद कई स्थानों पर आंख के अस्पताल खुले, धीरे धीरे रोगियों की संख्या घट गई। 1990 के बाद भवनों की हालत खराब है। 1995 में लीज भी खत्म हो चुकी है। पूर्व में छावनी उपाध्यक्ष मोहन नेगी सहित कई सभासदों ने भी तत्कालीन अधिशासी अधिकारियों को ज्ञापन भेजकर अस्पताल प्रबंधन से भूमि वापस लेने की मांग की थी।
सीतापुर अस्पताल की भूमि छावनी परिषद को हस्तांतरित
देखरेख के अभाव में जीर्णशीर्ण भवन बना असामाजिक तत्वों का अड्डा
- सीतापुर अस्पताल प्रबंधन इस भवन का रखरखाव नहीं करवा पा रहा था। लंबे समय से भूमि वापस लेने के प्रयास चल रहे थे। अब प्रबंधन ने कैंट की भूमि का हस्तांतरण छावनी परिषद को कर दिया है। छावनी परिषद ने अब इस भूमि पर कॉमर्शियल कॉम्प्लैक्स बनाने की योजना पर अमल शुरू कर दिया है।
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-ज्योति कपूर, सीईओ, कैंट बोर्ड, रानीखेत।
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छावनी परिषद का प्राथमिक विद्यालय भी 1962 में इसी स्थान पर था। शिव मंदिर के पास छावनी परिषद की इस भूमि पर 1960 से पूर्व सामान्य अस्पताल था। 1962 में छावनी परिषद ने यहां प्राथमिक विद्यालय की स्थापना की। कुछ साल तक प्राथमिक विद्यालय चला। 1965 में सीतापुर अस्पताल प्रबंधन ने छावनी परिषद से 1.113 एकड़ भूमि 30 साल के लिए लीज पर ली। भूमि को भवन सहित लीज पर लेकर यहां आंखों का बड़ा अस्पताल खुला। उस वक्त आंखों के अस्पताल बहुत कम संख्या में थे। भतरौंजखान, भिकियासैंण, सल्ट, चौखुटिया, द्वाराहाट सहित पूरे उपमंडल के नेत्र रोगी यहां इलाज को आते थे। तब यहां डॉक्टर, फार्मेसिस्ट, वार्डब्वॉय सहित भरा-पूरा स्टाफ था, आंखों के ऑपरेशन भी यहीं होते थे। 1969 में यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्ता ने इस स्थान पर एक भवन बनवाया, जिसे डॉक्टरों का आवास बनाया गया। 1980 के बाद कई स्थानों पर आंख के अस्पताल खुले, धीरे धीरे रोगियों की संख्या घट गई। 1990 के बाद भवनों की हालत खराब है। 1995 में लीज भी खत्म हो चुकी है। पूर्व में छावनी उपाध्यक्ष मोहन नेगी सहित कई सभासदों ने भी तत्कालीन अधिशासी अधिकारियों को ज्ञापन भेजकर अस्पताल प्रबंधन से भूमि वापस लेने की मांग की थी।
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सीतापुर अस्पताल की भूमि छावनी परिषद को हस्तांतरित
देखरेख के अभाव में जीर्णशीर्ण भवन बना असामाजिक तत्वों का अड्डा
- सीतापुर अस्पताल प्रबंधन इस भवन का रखरखाव नहीं करवा पा रहा था। लंबे समय से भूमि वापस लेने के प्रयास चल रहे थे। अब प्रबंधन ने कैंट की भूमि का हस्तांतरण छावनी परिषद को कर दिया है। छावनी परिषद ने अब इस भूमि पर कॉमर्शियल कॉम्प्लैक्स बनाने की योजना पर अमल शुरू कर दिया है।
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-ज्योति कपूर, सीईओ, कैंट बोर्ड, रानीखेत।