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राष्ट्र खेल की तैयारियां छोड़े जिला खेल कुंभ में फेल
Updated Wed, 22 Nov 2017 02:06 AM IST
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हल्द्वानी। राष्ट्रीय खेल के आयोजन की तैयारी को परखने का सरकार का दावा खेल महाकुंभ के आते ही हवा हवाई साबित हो गया है। हाल यह है कि न खेल के लिए सभी मैदान तैयार हो सके हैं और न ही खिलाड़ियों के ठहरने की पूरी व्यवस्था हो पाई है। जिला स्तर पर ही आयोजकों को अन्य संस्थाओं के मैदान और अन्य सुविधाओं का उपयोग करना पड़ रहा है।
अगले साल 2018 में सूबे में राष्ट्रीय खेल आयोजित करने के हिसाब से प्रदेश में अवस्थापना का विकास करने का दावा किया जा रहा है। कहा तो यहां तक गया था कि नवंबर में खेल महाकुंभ के आयोजन में इस तैयारी की परख भी हो जाएगी। अब यह दिख रहा है कि खेल अवस्थापना को लेकर सरकार व सरकारी अधिकारी कतई संजीदा नहीं है। राष्ट्रीय खेल से पहले हर जनपद में खिलाड़ियों को तराशने के मकसद से खेल महाकुंभ का आयोजन किया गया लेकिन इस आयोजन में ही तैयारियां पूरी नहीं हो सकी है। जिस स्टेडियम में खेल होने हैं वहां मैदान अभी तक तैयार नहीं है। हालत यह है कि चारों तरफ धूल और मिट्टी से खिलाड़ियों का अभ्यास करना भी दूभर है। खिलाड़ी मास्क पहन कर अभ्यास करने को मजबूर है। बैडमिंटन के लिए कोर्ट भी तैयार नहीं हो सका है। गनीमत है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग बैडमिंटन कोर्ट उधार देने को तैयार हो गया वरना यह प्रतियोगिता भी लटक जाती है। यही हालत ताइक्वांडो, फुटबाल के मैदान की है। फुटबाल के लिए वानिकी प्रशिक्षण अकादमी का मैदान उधार मांगा गया है। अब सवाल यह है कि जब ढांचा ही तैयार नहीं हुआ है तो ऐसे में खिलाड़ियों को कैसे तराशा जाएगा।
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अगले साल 2018 में सूबे में राष्ट्रीय खेल आयोजित करने के हिसाब से प्रदेश में अवस्थापना का विकास करने का दावा किया जा रहा है। कहा तो यहां तक गया था कि नवंबर में खेल महाकुंभ के आयोजन में इस तैयारी की परख भी हो जाएगी। अब यह दिख रहा है कि खेल अवस्थापना को लेकर सरकार व सरकारी अधिकारी कतई संजीदा नहीं है। राष्ट्रीय खेल से पहले हर जनपद में खिलाड़ियों को तराशने के मकसद से खेल महाकुंभ का आयोजन किया गया लेकिन इस आयोजन में ही तैयारियां पूरी नहीं हो सकी है। जिस स्टेडियम में खेल होने हैं वहां मैदान अभी तक तैयार नहीं है। हालत यह है कि चारों तरफ धूल और मिट्टी से खिलाड़ियों का अभ्यास करना भी दूभर है। खिलाड़ी मास्क पहन कर अभ्यास करने को मजबूर है। बैडमिंटन के लिए कोर्ट भी तैयार नहीं हो सका है। गनीमत है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग बैडमिंटन कोर्ट उधार देने को तैयार हो गया वरना यह प्रतियोगिता भी लटक जाती है। यही हालत ताइक्वांडो, फुटबाल के मैदान की है। फुटबाल के लिए वानिकी प्रशिक्षण अकादमी का मैदान उधार मांगा गया है। अब सवाल यह है कि जब ढांचा ही तैयार नहीं हुआ है तो ऐसे में खिलाड़ियों को कैसे तराशा जाएगा।
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