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ट्रकों में ओवरलोडिंग पर सरकार से जवाब तलब
Updated Thu, 21 Sep 2017 02:27 AM IST
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नैनीताल। हाइकोर्ट ने पर्वतीय मार्गों पर 12 टायरा ट्रकों से क्षमता से अधिक भार ले जाने के मामले में दायर जनहित याचिका में सुनवाई के बाद सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
बुधवार को मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। अधिवक्ता सुंदर सिंह मेहरा ने हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि टनकपुर-चंपावत-पिथौरागढ़ मार्ग कच्ची पहाड़ियों से होकर जाता है। इस पर अधिकतर बने पुल बहुत पुराने हैं। इस मार्ग पर बहुत ही तीव्र व घुमावदार मोड़ हैं, जिनसे हमेशा जाम की स्थिति रहती है। याचिका में कहा कि अधिक भार वाले ट्रकों की वजह से सड़क की सुरक्षा दीवारें कमजोर पड़ रही हैं। बारिश में भूस्खलन हो रहा है। इन सड़कों की अधिकतम भार ले जाने की मानक क्षमता 90 कुंतल तक है। याचिका में कहा कि इनमें परिवहन विभाग की अनदेखी कर 12 टायरा ट्रक चलाए जा रहे हैं। सड़क पर दो सौ कुंतल तक भार ढोने की क्षमता वाले ट्रक दौड़ रहे हैं। ज्यादा भार वाले वाहनों की वजह से ही सेराघाट का पुल क्षतिग्रस्त हो गया। इन बड़े वाहनों को रोकने के लिए देवभूमि ट्रक एसोसिएशन पिथौरागढ़ के अध्यक्ष शमशेर सिंह महर द्वारा संभागीय परिवहन अधिकारी हल्द्वानी को प्रत्यावेदन दिया गया था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के अनुपालन की प्रार्थना की थी, जिसमें पर्वतीय मार्गों पर ओवरलोडिंग पर पाबंदी लगाने का उल्लेख था। इस आदेश के अनुपालन के लिए कुमाऊं आयुक्त को कहा गया था, मगर आदेश का अनुपालन नहीं किया गया। पक्षों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने कानिर्देश दिया है।
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बुधवार को मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। अधिवक्ता सुंदर सिंह मेहरा ने हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि टनकपुर-चंपावत-पिथौरागढ़ मार्ग कच्ची पहाड़ियों से होकर जाता है। इस पर अधिकतर बने पुल बहुत पुराने हैं। इस मार्ग पर बहुत ही तीव्र व घुमावदार मोड़ हैं, जिनसे हमेशा जाम की स्थिति रहती है। याचिका में कहा कि अधिक भार वाले ट्रकों की वजह से सड़क की सुरक्षा दीवारें कमजोर पड़ रही हैं। बारिश में भूस्खलन हो रहा है। इन सड़कों की अधिकतम भार ले जाने की मानक क्षमता 90 कुंतल तक है। याचिका में कहा कि इनमें परिवहन विभाग की अनदेखी कर 12 टायरा ट्रक चलाए जा रहे हैं। सड़क पर दो सौ कुंतल तक भार ढोने की क्षमता वाले ट्रक दौड़ रहे हैं। ज्यादा भार वाले वाहनों की वजह से ही सेराघाट का पुल क्षतिग्रस्त हो गया। इन बड़े वाहनों को रोकने के लिए देवभूमि ट्रक एसोसिएशन पिथौरागढ़ के अध्यक्ष शमशेर सिंह महर द्वारा संभागीय परिवहन अधिकारी हल्द्वानी को प्रत्यावेदन दिया गया था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के अनुपालन की प्रार्थना की थी, जिसमें पर्वतीय मार्गों पर ओवरलोडिंग पर पाबंदी लगाने का उल्लेख था। इस आदेश के अनुपालन के लिए कुमाऊं आयुक्त को कहा गया था, मगर आदेश का अनुपालन नहीं किया गया। पक्षों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने कानिर्देश दिया है।
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