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रानीखेत, द्वाराहाट में धूम धाम से मनाई गई दीपावली
Updated Fri, 20 Oct 2017 10:51 PM IST
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रानीखेत (द्वाराहाट)। दीपावली का पर्व उमंग और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। नगर और ग्रामीण क्षेत्र में लोगों ने घरों में मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की। कई स्थानों पर गन्ने से लोगों ने मां लक्ष्मी की मूर्तियां तैयार कीं और सुख समृद्धि की कामना की। घरों को रंगबिरंगी मालाओं से सजाया गया था। लोगों ने देर रात तक आतिशबाजी की।
लोग सुबह से मां लक्ष्मी के स्वागत की तैयारियों में जुटे रहे। शुभ मुहूर्त में लोगों ने विधिविधान के साथ मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की। देर रात तक लोगों ने जमकर आतिशबाजी की।
बच्चों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। इससे पूर्व दिन में दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से लोग खरीददारी करने बाजार पहुंचे। शुक्रवार की सुबह गोवर्द्धन पूजा का आयोजन किया गया। उधर, द्वाराहाट में भी दीपावली का पर्व धूमधाम से मनाया। नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की गई। देर रात तक यहां भी लोग आतिशबाजी का लुत्फ उठाते रहे।
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च्यूड़े का भोग लगाकर लगाया
दीपावली पर्व पर लक्ष्मी माता को धान से बने च्यूड़ों का भोग लगाया जाता है। कुलदेवता को भी च्यूड़े चढ़ाने की रस्म है। कहते हैं कि इससे खुशहाली आती है। भीगे धानों को पूजा-अर्चना के बाद ओखली में मूसलों के सहारे कूटा जाता है।
महालक्ष्मी की पूजा-अर्चना को लेकर क्षेत्र में अलग-अलग परंपराएं हैं। उपमंडल क्षेत्र में महालक्ष्मी को च्यूड़ों का भोग लगाने की परंपरा है। ग्रामीण अपने-अपने कुलदेवता को भी हाथ से बने च्यूड़े चढ़ाते हैं। धान को 10 दिन पूर्व पीतल के पतीले में भिगा दिया जाता है। महालक्ष्मी पूजन से एक दिन पूर्व इन्हें कढ़ाई में भूनकर ओखली और मूसलों से कूटा जाता है।
च्यूड़े कूटने के लिए एक और परंपरा है। सर्वप्रथम ओखली में सिर्फ एक महिला इन्हें कूटती है। इसके बाद दो महिलाओं की जोड़ी च्यूड़े कूटती हैं। कुलदेवता को भोग लगाते समय ग्रामीण क्षेत्र में धन, धान्य और खुशहाली की कामना करते हैं। किसी-किसी क्षेत्र में चावल को तेल में भूनकर च्यूड़े बनाने की परंपरा भी है।
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लोग सुबह से मां लक्ष्मी के स्वागत की तैयारियों में जुटे रहे। शुभ मुहूर्त में लोगों ने विधिविधान के साथ मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की। देर रात तक लोगों ने जमकर आतिशबाजी की।
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बच्चों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। इससे पूर्व दिन में दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से लोग खरीददारी करने बाजार पहुंचे। शुक्रवार की सुबह गोवर्द्धन पूजा का आयोजन किया गया। उधर, द्वाराहाट में भी दीपावली का पर्व धूमधाम से मनाया। नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की गई। देर रात तक यहां भी लोग आतिशबाजी का लुत्फ उठाते रहे।
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च्यूड़े का भोग लगाकर लगाया
दीपावली पर्व पर लक्ष्मी माता को धान से बने च्यूड़ों का भोग लगाया जाता है। कुलदेवता को भी च्यूड़े चढ़ाने की रस्म है। कहते हैं कि इससे खुशहाली आती है। भीगे धानों को पूजा-अर्चना के बाद ओखली में मूसलों के सहारे कूटा जाता है।
महालक्ष्मी की पूजा-अर्चना को लेकर क्षेत्र में अलग-अलग परंपराएं हैं। उपमंडल क्षेत्र में महालक्ष्मी को च्यूड़ों का भोग लगाने की परंपरा है। ग्रामीण अपने-अपने कुलदेवता को भी हाथ से बने च्यूड़े चढ़ाते हैं। धान को 10 दिन पूर्व पीतल के पतीले में भिगा दिया जाता है। महालक्ष्मी पूजन से एक दिन पूर्व इन्हें कढ़ाई में भूनकर ओखली और मूसलों से कूटा जाता है।
च्यूड़े कूटने के लिए एक और परंपरा है। सर्वप्रथम ओखली में सिर्फ एक महिला इन्हें कूटती है। इसके बाद दो महिलाओं की जोड़ी च्यूड़े कूटती हैं। कुलदेवता को भोग लगाते समय ग्रामीण क्षेत्र में धन, धान्य और खुशहाली की कामना करते हैं। किसी-किसी क्षेत्र में चावल को तेल में भूनकर च्यूड़े बनाने की परंपरा भी है।