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संकटग्रस्त हैं 173 वनस्पतियां
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 22 May 2017 02:02 AM IST
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पाौधाराोपण
- फोटो : अमर उजाला
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हिमालयी क्षेत्र में लगभग 15000 जैव विविधता की प्रजातियां रहती हैं। इनमें 79 हजार आवृतबीजी और 1748 औषधि प्रजातियां भी शामिल हैं। लेकिन अंधाधुंध निर्माण प्राकृतिक आवासों को नष्ट कर रहा है। इससे प्रजातियां विलुप्त हो रही हैं।
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इनमें कुटकी, अष्टवर्ग की प्रजाति काकोली, छीर काकोली, मेदा, महामेदा, रिसभक, जीवक, रिद्धी और वृद्धि के अलावा आदि जटामापी, पारिस पोडोफिलम सहित 173 वनस्पतियां शामिल हैं। जंतुओं में कस्तुरी मृग, स्नो लेपर्ड, गौरिला, गरुड, गौरय्या और गिद्ध संकटग्रस्त हैं।
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इसलिए मनाया जाता है जैव विविधता दिवस
जैव विविधता दिवस हर साल संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से प्रसिद्ध वर्गीकरण शास्त्री कार्ल वान लिनियस के जन्म दिन के रूप में मनाया जाता है। कार्ल वान लिनियस को आधुनिक वर्गीकरण का पिता भी कहा जाता है। 1993 से यह दिवस जैविक प्रजातियों को बचाने और प्राकृतिक संतुलन एवं सतत् विकास की नीति के अंतर्गत मनाया जाता है।
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इस साल की थीम
संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस वर्ष की थीम जैव विविधता एवं सतत पर्यटन रखी है।
जैव विविधता पृथ्वी की शान और जान है। अब तक 17 लाख 50 हजार प्रजातियां ज्ञात हो चुकी हैं जिसमें मानव भी शामिल हैं। 11 प्रतिशत तक विश्व आर्थिकी जैव विविधता का आधार है। 10 से 30 प्रतिशत तक जीडीपी जैव विविधता पर निर्भर है इसलिए मानव पर बड़ी जिम्मेदारी है कि जलवायु परिवर्तन और ग्रीन हाउस से निपटने के लिए सतत् विकास में जैव विविधता को बचाएं।
-प्रो. ललित तिवारी, वनस्पति विज्ञान विभाग, डीएसबी परिसर कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल