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शिक्षा का निजीकरण देश के लिए घातक : प्रो.आनंद कुमार
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नैनीताल। शिक्षा व्यवस्था का निजीकरण देश के लिए घातक है। इस कारण शिक्षा महंगी हो गई है और आम जनता काफी परेशान है। ऐसे में हर वर्ग के शिक्षा पाने के संवैधानिक अधिकार को भी पूरा नहीं किया जा सकता है। ये कहना है जेएनयू में समाजशास्त्र विभाग प्राध्यापक प्रो.आनंद कुमार का।
डीएसबी परिसर के समाजशास्त्र विभाग की ओर से कला संकाय के सेमिनार हॉल में बृहस्पतिवार को व्याख्यान माला हुई। मुख्य अतिथि प्रो.कुमार ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य किसी भी विकासशील देश की प्राथमिकताओं में शामिल है लेकिन हमारे देश में इन दोनों सेवाओं के तेजी से निजी हाथों में आने के कारण यह आम आदमी की पहुंच से दूर हो रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति करीब पांच सौ साल पुरानी है और शिक्षा, स्वास्थ्य सहित कई आवश्यकताओं की अहम व्यवस्था थी तो चिकित्सा पर व्यापक शोध और दवाएं भी उपलब्ध थी। प्रो. आनंद ने कहा कि कालीदास का जैसा साहित्य दुनिया में कहीं नहीं है लेकिन गुलामी के कारण दुनिया में स्थान नहीं मिल सका। इस दौरान विभागाध्यक्ष समाजशास्त्र प्रो. इंदु पाठक, डीएसडब्ल्यू प्रो. पीएस बिष्ट, प्रो. भगवान सिंह बिष्ट, प्रो. एमसी जोशी, प्रो. लता पांडे, प्रो. शुचि बिष्ट, राजीव लोचन साह, डॉ. केतकी तार कुमैया, डीएन भट्ट, अरविंद पडियार, अभिषेक मेहरा आदि थे। संचालन प्रो. देवेंद्र बिष्ट ने किया।
शिक्षा का निजीकरण देश के लिए घातक : प्रो. आनंद कुमार
डीएसबी परिसर के समाजशास्त्र विभाग की ओर से व्याख्यानमाला हुई
युवाओं के हाथ में है बागडोर
व्याख्यान माला के प्रश्नसत्र के दौरान प्रो.कुमार से देश के वर्तमान हालातों को लेकर सवाल पूछा। जवाब में कहा कि देश को आगे ले जाने की पूरी बागडोर युवाओं के हाथ में है। उन्होंने ही इसे आगे बढ़ाना है।
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मातृ-शिशु मृत्युदर को कम करने के लिए मधुमेह प्रबंधन जरूरी
नैनीताल। मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से बीडी पांडे जिला अस्पताल में दो दिनी मधुमेह सर्टिफिकेट कोर्स बृहस्पतिवार को शुरू हो गया। इसमें चिकित्सकों को मधुमेह पीड़ित गर्भवती महिलाओं में मधुमेह का प्रबंधन नई विधि से कैसे किया जाएगा, यह सिखाया जाएगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग जनपद नैनीताल की ओर से आयोजित कार्यक्रम में जिले के सभी विकासखंडों से चिकित्सक प्रशिक्षण लेने पहुंचे। कार्यक्रम का शुभारंभ सीएमओ डॉ. भारती राणा ने किया। उन्होंने कहा कि मधुमेह पीड़ित गर्भवती महिलाओं को सही समय पर इलाज देने से मातृ-शिशु मृत्युदर में भी कमी आएगी। इस दौरान प्रशिक्षक आलोक कुमार, डॉ. टीके टम्टा, मदन मेहरा, दीवान बिष्ट, हेम जलाल, दिनेश बोरा आदि थे।
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डीएसबी परिसर के समाजशास्त्र विभाग की ओर से कला संकाय के सेमिनार हॉल में बृहस्पतिवार को व्याख्यान माला हुई। मुख्य अतिथि प्रो.कुमार ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य किसी भी विकासशील देश की प्राथमिकताओं में शामिल है लेकिन हमारे देश में इन दोनों सेवाओं के तेजी से निजी हाथों में आने के कारण यह आम आदमी की पहुंच से दूर हो रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति करीब पांच सौ साल पुरानी है और शिक्षा, स्वास्थ्य सहित कई आवश्यकताओं की अहम व्यवस्था थी तो चिकित्सा पर व्यापक शोध और दवाएं भी उपलब्ध थी। प्रो. आनंद ने कहा कि कालीदास का जैसा साहित्य दुनिया में कहीं नहीं है लेकिन गुलामी के कारण दुनिया में स्थान नहीं मिल सका। इस दौरान विभागाध्यक्ष समाजशास्त्र प्रो. इंदु पाठक, डीएसडब्ल्यू प्रो. पीएस बिष्ट, प्रो. भगवान सिंह बिष्ट, प्रो. एमसी जोशी, प्रो. लता पांडे, प्रो. शुचि बिष्ट, राजीव लोचन साह, डॉ. केतकी तार कुमैया, डीएन भट्ट, अरविंद पडियार, अभिषेक मेहरा आदि थे। संचालन प्रो. देवेंद्र बिष्ट ने किया।
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शिक्षा का निजीकरण देश के लिए घातक : प्रो. आनंद कुमार
डीएसबी परिसर के समाजशास्त्र विभाग की ओर से व्याख्यानमाला हुई
युवाओं के हाथ में है बागडोर
व्याख्यान माला के प्रश्नसत्र के दौरान प्रो.कुमार से देश के वर्तमान हालातों को लेकर सवाल पूछा। जवाब में कहा कि देश को आगे ले जाने की पूरी बागडोर युवाओं के हाथ में है। उन्होंने ही इसे आगे बढ़ाना है।
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मातृ-शिशु मृत्युदर को कम करने के लिए मधुमेह प्रबंधन जरूरी
नैनीताल। मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से बीडी पांडे जिला अस्पताल में दो दिनी मधुमेह सर्टिफिकेट कोर्स बृहस्पतिवार को शुरू हो गया। इसमें चिकित्सकों को मधुमेह पीड़ित गर्भवती महिलाओं में मधुमेह का प्रबंधन नई विधि से कैसे किया जाएगा, यह सिखाया जाएगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग जनपद नैनीताल की ओर से आयोजित कार्यक्रम में जिले के सभी विकासखंडों से चिकित्सक प्रशिक्षण लेने पहुंचे। कार्यक्रम का शुभारंभ सीएमओ डॉ. भारती राणा ने किया। उन्होंने कहा कि मधुमेह पीड़ित गर्भवती महिलाओं को सही समय पर इलाज देने से मातृ-शिशु मृत्युदर में भी कमी आएगी। इस दौरान प्रशिक्षक आलोक कुमार, डॉ. टीके टम्टा, मदन मेहरा, दीवान बिष्ट, हेम जलाल, दिनेश बोरा आदि थे।