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जंगल में आग से लाखों की इमारती लकड़ियां जली
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हल्द्वानी में जंगल की आग बुझने के बावजूद पेड़ जलते रहे
- फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। वन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा बेजुबान जंगली जानवरों को उठाना पड़ रहा है। जंगल में लगी आग से हजारों पेड़ के साथ लाखों रुपये की इमारती लकड़ियां भी जल गईं।
जंगल की आग रोकने के लिए वन विभाग की ओर से बड़े-बड़े दावे किए गए थे। इसके लिए मोटा बजट भी खर्च किया गया, लेकिन विभागीय दावों की पोल सोमवार को उस समय खुल गई जब हल्द्वानी रेंज और पीपलपड़ाव रेंज के जंगलों में आग लग गई। आग से कई हेक्टेयर जंगल जल गया। इससे जहां हजारों पेड़ और वनस्पति जल गई। लाखों रुपये की इमरती लकड़ियां दूसरे दिन भी धधकती रहीं। अमर उजाला की टीम मंगलवार को आग से हुए नुकसान और कारणों को जानने के लिए रामपुर रोड एस मोड़ के पास हल्द्वानी रेंज के जंगल में पहुंची। जंगल में सैकड़ों पेड़ जल गए थे। कई सूखे पेड़ दूसरे दिन भी सुलग रहे थे। वन विभाग का कोई कर्मचारी मौके पर दिखाई नहीं दिया। विभाग की ओर से फायर लाइन की सफाई भी नहीं की गई थी। फायर लाइन में घास और झाड़ियां थीं। अब सवाल उठते हैं कि अगर विभाग की ओर से फायर लाइन साफ की होती तो इतने भारी मात्रा में जंगल नहीं जलते।
फायर लाइन सफाई का पैसा कहां गया?
तराई केंद्रीय के जंगलों में कटी होती फायर लाइन तो नहीं जलता जंगल
जंगल में आग से हजारों पेड़ और लाखों रुपये की इमारती लकड़ियां भी जली
जानवरों के सामने खाने का संकट
चिड़ियाओं के घोंसले और अंडे भी जले
हल्द्वानी। तराई केंद्रीय वन प्रभाग हल्द्वानी के जंगल जंगली जानवरों के लिए मुफीद माने जाते हैं। आग लगने से जंगली जानवरों के सामने खाने का संकट हो गया है। सोमवार को लगी आग से पक्षियों के घोंसले, अंडे, बच्चे भी जल गए।
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जंगल की आग रोकने के लिए वन विभाग की ओर से बड़े-बड़े दावे किए गए थे। इसके लिए मोटा बजट भी खर्च किया गया, लेकिन विभागीय दावों की पोल सोमवार को उस समय खुल गई जब हल्द्वानी रेंज और पीपलपड़ाव रेंज के जंगलों में आग लग गई। आग से कई हेक्टेयर जंगल जल गया। इससे जहां हजारों पेड़ और वनस्पति जल गई। लाखों रुपये की इमरती लकड़ियां दूसरे दिन भी धधकती रहीं। अमर उजाला की टीम मंगलवार को आग से हुए नुकसान और कारणों को जानने के लिए रामपुर रोड एस मोड़ के पास हल्द्वानी रेंज के जंगल में पहुंची। जंगल में सैकड़ों पेड़ जल गए थे। कई सूखे पेड़ दूसरे दिन भी सुलग रहे थे। वन विभाग का कोई कर्मचारी मौके पर दिखाई नहीं दिया। विभाग की ओर से फायर लाइन की सफाई भी नहीं की गई थी। फायर लाइन में घास और झाड़ियां थीं। अब सवाल उठते हैं कि अगर विभाग की ओर से फायर लाइन साफ की होती तो इतने भारी मात्रा में जंगल नहीं जलते।
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फायर लाइन सफाई का पैसा कहां गया?
तराई केंद्रीय के जंगलों में कटी होती फायर लाइन तो नहीं जलता जंगल
जंगल में आग से हजारों पेड़ और लाखों रुपये की इमारती लकड़ियां भी जली
जानवरों के सामने खाने का संकट
चिड़ियाओं के घोंसले और अंडे भी जले
हल्द्वानी। तराई केंद्रीय वन प्रभाग हल्द्वानी के जंगल जंगली जानवरों के लिए मुफीद माने जाते हैं। आग लगने से जंगली जानवरों के सामने खाने का संकट हो गया है। सोमवार को लगी आग से पक्षियों के घोंसले, अंडे, बच्चे भी जल गए।
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