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चेयरमैन के अधिकार सीमित वादे बड़े-बड़े

Sun, 18 Nov 2018 01:56 AM IST
Updated Sun, 18 Nov 2018 01:56 AM IST
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चेयरमैन के अधिकार सीमित वादे बड़े-बड़े
neta ji
नैनीताल। नगर निकाय चुनाव में कई प्रत्याशी क्षेत्रीय जनता से ऐसे हवाई वादे कर रहे हैं जो नगर पालिकाध्यक्ष के अधिकार में ही नहीं हैं। प्रत्याशी नगर को बलियानाले के भूस्खलन से बचाने तक का सब्जबाग दिखाने में नहीं चूक रहे हैं।
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अलग राज्य बनने के बाद भी प्रदेश में उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 का अनुपालन हो रहा है। शुरुआती दौर में वन संपदा, स्वास्थ्य, बिजली, जल निगम, जल संस्थान, प्राथमिक शिक्षा, स्थानीय सड़कों के निर्माण जैसे तमाम महत्वपूर्ण दायित्व नगर पालिका के अधीन होते थे, लेकिन समय के साथ-साथ पालिका के अधिकार कम होते चले गए। सबसे पहले बीडी पांडे अस्पताल को पालिका से अलग किया गया। पालिका ने सभी मशीनें अस्पताल को दे दीं। 1970-80 के दशक में महत्वपूर्ण विभाग बिजली, वन संपदा, प्राथमिक शिक्षा, पेयजल, सिंचाई जल आदि पालिका के अधिकार क्षेत्र से बाहर हो गए। अब पालिका के पास सफाई, भवन कर, जमीनी स्वामित्व समेत कुछ ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां बची हैं। जबकि चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी लोगों से पेयजल व्यवस्था दुरुस्त कराने, सुरक्षा देने, नगर को भ्रष्टाचार मुक्त करने, अवैध कब्जे वाली जमीनों को फ्रीहोल्ड कराने, सड़कों में सुधार करने, नैनी झील की हालत सुधारने, भूस्खलन से मुक्ति दिलाने समेत तमाम वादे कर रहे हैं। जीतने वाला प्रत्याशी इन्हें कैसे पूरा करेगा ये किसी के पास जवाब नहीं है।
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