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घायल बाघों के पुनर्वास के लिए कार्बेट में रेस्क्यू सेंटर बनाओ
Updated Thu, 06 Sep 2018 01:56 AM IST
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tiger
नैनीताल। हाईकोर्ट ने काजीरंगा की तर्ज पर कार्बेट नेशनल पार्क में घायल बाघों के पुनर्वास के लिए रेस्क्यू सेंटर बनाने का आदेश दिया है। अधिकारियों ने आज कोर्ट को गलत जानकारी देने पर माफी भी मांगी। एक सामान्य सी जानकारी न मिलने पर नाराज कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने वाले अधिकारी पूरी जानकारी के साथ ही कोर्ट में आएं।
हिमालयन युवा ग्रामीण संस्था की याचिका पर सुनवाई में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने कहा कि जहां बेजुबान वन्य जीवों के हित की बात आती है, अधिकारी खामोश हो जाते हैं। पूर्व में कोर्ट ने कहा था कि अधिकारियों को वन्य जीवों की तुलना में अतिक्रमणकारियों की अधिक चिंता है। पीठ ने मंगलवार को हुई सुनवाई में मृत बाघों की बिसरा रिपोर्ट तलब की थी।
बुधवार को कोर्ट में अपर मुख्य सचिव रणवीर सिंह, निदेशक कार्बेट टाइगर रिजर्व, मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक, डीएफओ रामनगर , वन संरक्षक रामनगर सहित अन्य आईएफएस पेश हुए। अधिकारियों ने बताया कि मृत बाघों की बिसरा रिपोर्ट उसी दिन जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दी जाती है। कोर्ट ने रिपोर्ट की जांच में पाया कि बिसरा रिपोर्ट उसी दिन नहीं भेजी गई थी। पीठ ने कहा कि अधिकारी कोर्ट को गुमराह कर रहे हैं। इस पर इन अधिकारियों ने अपनी गलती के लिए कोर्ट से माफी मांगी। कोर्ट में अधिकारी कार्बेट का पूरा क्षेत्रफल भी नहीं बता पाए। इस पर पीठ ने कहा कि व्यक्तिगत रूप से पेश होने वाले अधिकारी पूर्ण जानकारी के साथ ही कोर्ट में आएं। अगली सुनवाई 14 सितंबर को होगी।
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हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश, गलत जानकारी देने पर अधिकारियों ने माफी मांगी
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हिमालयन युवा ग्रामीण संस्था की याचिका पर सुनवाई में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने कहा कि जहां बेजुबान वन्य जीवों के हित की बात आती है, अधिकारी खामोश हो जाते हैं। पूर्व में कोर्ट ने कहा था कि अधिकारियों को वन्य जीवों की तुलना में अतिक्रमणकारियों की अधिक चिंता है। पीठ ने मंगलवार को हुई सुनवाई में मृत बाघों की बिसरा रिपोर्ट तलब की थी।
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बुधवार को कोर्ट में अपर मुख्य सचिव रणवीर सिंह, निदेशक कार्बेट टाइगर रिजर्व, मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक, डीएफओ रामनगर , वन संरक्षक रामनगर सहित अन्य आईएफएस पेश हुए। अधिकारियों ने बताया कि मृत बाघों की बिसरा रिपोर्ट उसी दिन जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दी जाती है। कोर्ट ने रिपोर्ट की जांच में पाया कि बिसरा रिपोर्ट उसी दिन नहीं भेजी गई थी। पीठ ने कहा कि अधिकारी कोर्ट को गुमराह कर रहे हैं। इस पर इन अधिकारियों ने अपनी गलती के लिए कोर्ट से माफी मांगी। कोर्ट में अधिकारी कार्बेट का पूरा क्षेत्रफल भी नहीं बता पाए। इस पर पीठ ने कहा कि व्यक्तिगत रूप से पेश होने वाले अधिकारी पूर्ण जानकारी के साथ ही कोर्ट में आएं। अगली सुनवाई 14 सितंबर को होगी।
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हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश, गलत जानकारी देने पर अधिकारियों ने माफी मांगी