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हरीनगर के भूस्खलन से बलिया नाला खतरे में
Updated Sat, 04 Aug 2018 01:56 AM IST
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नैनीताल। हरिनगर (रईस होटल) क्षेत्र को भूस्खलन से बचाने के लिए सिंचाई विभाग ने आपदा प्रबंधन विभाग और टीएचडीसी को डीपीआर तैयार करने के लिए रिपोर्ट भेजी है। दोनों संस्थाएं यहां पहुंच कर सर्वे करेंगी और डीपीआर तैयार करेंगी।
रईस होटल क्षेत्र में भूस्खलन जारी रहने से बाढ़ का खतरा है। यहां से कई परिवारों को दूसरे स्थानों पर विस्थापित किया जा चुका है। बलिया नाले में करोड़ों रुपये खर्च करके कराया गया निर्माण भी खतरे में है। क्षेत्र का लगभग चार हजार वर्गमीटर क्षेत्र भूस्खलन की जद में है। बलिया नाला और रईस होटल में रहने वालों को बचाने के लिए सिंचाई विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर आपदा प्रबंधन विभाग और चेयरमैन टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (टीएचडीसी) को भेजा है। अब यह संस्थाएं यहां पहुंच कर भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का सर्वे करेंगी। इसके बाद डीपीआर तैयार कर बजट का प्रस्ताव बनाया जाएगा। इस प्रक्रिया में अधिक समय लगना तय है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो हरिनगर क्षेत्र में भूस्खलन रुक जाएगा। सिंचाई विभाग के एई मदन मोहन जोशी ने बताया कि हरिनगर, रईस होटल क्षेत्र में कई जगह पत्थर दिखने लगे हैं जबकि बीच का हिस्सा सबसे ज्यादा संवेदनशील है। अनहोनी से बचने के लिए रिपोर्ट भेजी गई है।
हरिनगर को भूस्खलन से बचाने को आपदा प्रबंधन को रिपोर्ट भेजी
सिंचाई विभाग ने डीपीआर बनाने के लिए आपदा प्रबंधन और टीएचडीसी से कहा
हरिनगर का 4000 वर्गमीटर क्षेत्र भूस्खलन की जद में
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रईस होटल क्षेत्र में भूस्खलन जारी रहने से बाढ़ का खतरा है। यहां से कई परिवारों को दूसरे स्थानों पर विस्थापित किया जा चुका है। बलिया नाले में करोड़ों रुपये खर्च करके कराया गया निर्माण भी खतरे में है। क्षेत्र का लगभग चार हजार वर्गमीटर क्षेत्र भूस्खलन की जद में है। बलिया नाला और रईस होटल में रहने वालों को बचाने के लिए सिंचाई विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर आपदा प्रबंधन विभाग और चेयरमैन टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (टीएचडीसी) को भेजा है। अब यह संस्थाएं यहां पहुंच कर भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का सर्वे करेंगी। इसके बाद डीपीआर तैयार कर बजट का प्रस्ताव बनाया जाएगा। इस प्रक्रिया में अधिक समय लगना तय है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो हरिनगर क्षेत्र में भूस्खलन रुक जाएगा। सिंचाई विभाग के एई मदन मोहन जोशी ने बताया कि हरिनगर, रईस होटल क्षेत्र में कई जगह पत्थर दिखने लगे हैं जबकि बीच का हिस्सा सबसे ज्यादा संवेदनशील है। अनहोनी से बचने के लिए रिपोर्ट भेजी गई है।
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हरिनगर को भूस्खलन से बचाने को आपदा प्रबंधन को रिपोर्ट भेजी
सिंचाई विभाग ने डीपीआर बनाने के लिए आपदा प्रबंधन और टीएचडीसी से कहा
हरिनगर का 4000 वर्गमीटर क्षेत्र भूस्खलन की जद में