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किसानों ने उत्पादन तो बढ़ाया है लेकिन गन्ने बेकद्री बरकरार
Updated Thu, 26 Jul 2018 12:34 AM IST
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खटीमा। सीमांत क्षेत्र में गन्ने का क्षेत्रफल सिकुड़ने एवं तमाम असुविधाओं के बाद भी वैज्ञानिक तरीके से गन्ना उत्पादन में किसानों की पैदावार में वृद्धि हुई है। किसान बेहतरीन उपज होने के साथ ही गन्ने की सप्लाई को लेकर बेहद चिंतित हैं।
सहकारी गन्ना विकास समिति के रिकार्डों की माने तो सितारगंज और खटीमा क्षेत्र में जहां पहले बमुश्किल प्रति एकड़ चार से पांच सौ क्विंटल गन्ना पैदा होता था वहीं अब गन्ना क्षेत्र घटने के बाद भी सात से आठ सौ कुंतल प्रति एकड़ गन्ना पैदा हो रहा है।
खटीमा-मझोला सहकारी गन्ना विकास समिति अध्यक्ष बलविंदर सिंह ढिल्लो ने बताया कि पैदावार तो वैज्ञानिक तरीके से बेहतर होने लगी है लेकिन सितारगंज चीनी मिल बंद होने से सीमांत क्षेत्र का किसान मायूस हैं।
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किसानों को गन्ने की बेकद्री बनी रहती है। सोसायटी सचिव ताहिर खान ने बताया कि कृषि विज्ञानियों की नई तकनीक से गन्ने की पैदावार में वृद्धि हुई है। सीमांत क्षेत्र में अभी गन्ना 49 प्रतिशत बोया जा रहा है। किसान सितारगंज चीनी मिल को तत्काल चालू कराने की मांग कर रहा है।
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सहकारी गन्ना विकास समिति के रिकार्डों की माने तो सितारगंज और खटीमा क्षेत्र में जहां पहले बमुश्किल प्रति एकड़ चार से पांच सौ क्विंटल गन्ना पैदा होता था वहीं अब गन्ना क्षेत्र घटने के बाद भी सात से आठ सौ कुंतल प्रति एकड़ गन्ना पैदा हो रहा है।
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खटीमा-मझोला सहकारी गन्ना विकास समिति अध्यक्ष बलविंदर सिंह ढिल्लो ने बताया कि पैदावार तो वैज्ञानिक तरीके से बेहतर होने लगी है लेकिन सितारगंज चीनी मिल बंद होने से सीमांत क्षेत्र का किसान मायूस हैं।
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किसानों को गन्ने की बेकद्री बनी रहती है। सोसायटी सचिव ताहिर खान ने बताया कि कृषि विज्ञानियों की नई तकनीक से गन्ने की पैदावार में वृद्धि हुई है। सीमांत क्षेत्र में अभी गन्ना 49 प्रतिशत बोया जा रहा है। किसान सितारगंज चीनी मिल को तत्काल चालू कराने की मांग कर रहा है।