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कृषि विभाग की लापरवाही के चलते 230 एकड़ भूमि बंजर होने के कगार पर

Thu, 19 Jul 2018 02:37 AM IST
Updated Thu, 19 Jul 2018 02:37 AM IST
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कृषि विभाग की लापरवाही के चलते 230 एकड़ भूमि बंजर होने के कगार पर
कोटाबाग में सोयाबीन का बीज नहीं जमा - फोटो : अमर उजाला
कालाढूंगी (नैनीताल)। कृषि विभाग की लापरवाही से कोटाबाग के किसान एक बार फिर बर्बादी के कगार पर आ गए हैं। विभाग द्वारा अनुदान पर दिया गया सोयाबीन का बीज इस साल खेतों में अंकुरित ही नहीं हुआ। इससे 257 एकड़ भूमि में बीज बोने में खर्च किए गए 14 लाख, 39 हजार, दो सौ रुपये मिट्टी में मिल गए हैं। साथ ही वे अब जल्द ही दूसरी फसल भी नहीं उगा पाएंगे। बुधवार को जब राष्ट्रीय बीज निगम के अधिकारियों ने निरीक्षण किया तो उन्होंने किसानों को मुआवजा देने की मांग उठाई। उधर, खेतों के निरीक्षण के बाद उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजने की बात कही जा रही है।
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कृषि विभाग ने कोटाबाग के किसानों को सोयाबीन की खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर जुलाई के प्रथम सप्ताह में 25 फीसदी अनुदान पर 4500 रुपये क्विंटल के हिसाब से बीज उपलब्ध कराया था। बीज खरीदने के बाद किसानों ने आमदनी बढ़ने की चाहत में कड़ी मेहनत कर अपने खेतों को जोतकर इसे बोया। लेकिन दो हफ्ते बीतने के बावजूद ये बीज अंकुरित तक नहीं हुए, जबकि इन्हें दो दिन में जम जाना चाहिए था। इससे किसानों के माथे पर बल पड़ गए। क्षेत्र के किसान सुरेश भट्ट, राम सिंह, गंगा सिंह कन्याल, दीवान सिंह मेहरा, रेखा भट्ट, सरोज भट्ट, जीवन सिंह धरियाल आदि ने बताया कि पूरे ब्लॉक में न्याय पंचायत स्तर पर खुले छह कृषि केंद्रों के माध्यम से 77 क्विंटल बीज किसानों ने खरीदा था। जिसे 257 एकड़ भूमि में बोया गया। बताया कि एक एकड़ भूमि में तीस किलो बीज लगता है, यानी 1500 रुपये का बीज एक एकड़ में लगता है। इसके अलावा बीज को बोने के लिए पांच बार जुताई करनी पड़ती है, जिसकी लागत करीब 3500 रुपये प्रति एकड़ आती है। इसके साथ ही अन्य खर्चे मिलाकर 5600 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से 257 एकड़ के लिए 14 लाख, 39 हजार, दो सौ रुपये अब तक खर्च हो चुके हैं। बताया कि पांच महीने में सोयाबीन की फसल तैयार हो जाती है। उन्हें उम्मीद थी कि 34 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से उन्हें करीब 87 लाख 38 हजार रुपये का लाभ होगा। लेकिन सारी मेहनत मिट्टी में मिल गई। किसानों के अनुसार अब इन खेतों में दोबारा सोयाबीन नहीं बोया जा सकता। उन्हें उड़द, काली भट, उर्दी या दालें बोनी पड़ेंगी, लेकिन वे बहुत महंगी हैं। कई किसानों ने खेतों की जुताई कर दी है। उधर, कृषि विभाग के अनुसार यह बीज राष्ट्रीय बीज निगम (एनएससी) ने विभाग को उपलब्ध कराया था।
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कृषि विभाग की लापरवाही से ठगे गए कोटाबाग के किसान
अनुदान पर दिया गया था सोयाबीन का बीज
257 एकड़ भूमि में सोयाबीन उगाने के लिए किसानों के बर्बाद हो गए 14 लाख, 39 हजार, दो सौ रुपये

किसानों की शिकायत पर राष्ट्रीय बीज निगम के अधिकारियों के साथ बुधवार को खेतों का मुआयना किया गया। किसानों की शिकायत वाजिब है। इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी। अधिकारियों के आदेश पर अगली कार्रवाई की जाएगी। - निहारिका बिष्ट, सहायक कृषि अधिकारी कोटाबाग।
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