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निकाय परिसीमन पर सरकार को झटका
Updated Tue, 15 May 2018 02:20 AM IST
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court
नैनीताल। हाईकोर्ट ने नगर निगम कोटद्वार में 35 ग्राम सभाओं को शामिल करने के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के बाद सरकार को बड़ा झटका दिया है। सरकार की ओर से इस संबंध में जारी पांच अप्रैल की अधिसूचना को निरस्त कर दिया है। अधिसूचना राज्यपाल के बजाय शहरी विकास विभाग की ओर से जारी होने के आधार पर कोर्ट ने इसे निरस्त किया है।
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था। मामले के अनुसार कोटद्वार के मवाकोट के 35 ग्राम सभाओं सहित भवाली, डोईवाला, तिलवाडा, हल्द्वानी, काशीपुर, टनकपुर, पिथौरागढ़ सहित दो दर्जन से अधिक निकायों की सीमा विस्तार के मामले में अलग-अलग याचिकाएं दायर कर सरकार की ओर से जारी पांच अप्रैल 2018 के नोटिफिकेशन को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया कि संविधान में स्पष्ट प्रावधान है कि राज्यपाल ही किसी भी क्षेत्र को नगरपालिका में शामिल करने के लिए अधिकृत हैं और प्रावधान द्वारा प्रदत शक्ति किसी अन्य को हस्तांतरित नही की जा सकती है।
सरकार की ओर से कहा गया कि उसके द्वारा किया गया कोई भी कार्य राज्यपाल द्वारा किया गया ही माना जाता है। इस प्रकरण पर कोर्ट ने आठ मई को सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था। अधिसूचना निरस्त होने के बाद चुनाव को लेकर असमंजस्य की स्थिति बन गई है। जानकारों के मुताबिक सरकार को पुराने परिसीमन के आधार पर चुनाव कराने पड़ सकते हैं।
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यह भी संभावना है कि पांच अप्रैल को जारी अधिसूचना को राज्यपाल के पास भेजकर उनसे जल्द निर्णय लेने का आग्रह किया जाए। हालांकि चुनाव निर्वाचन आयोग की ओर से जल्द चुनाव कराने की अन्य याचिका पर कोर्ट के रुख पर निर्भर करेगा।
हाईकोर्ट ने सरकार की ओर से जारी अधिसूचना निरस्त की, चुनाव के संभावित कार्यक्रम पर संशय बरकरार
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न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था। मामले के अनुसार कोटद्वार के मवाकोट के 35 ग्राम सभाओं सहित भवाली, डोईवाला, तिलवाडा, हल्द्वानी, काशीपुर, टनकपुर, पिथौरागढ़ सहित दो दर्जन से अधिक निकायों की सीमा विस्तार के मामले में अलग-अलग याचिकाएं दायर कर सरकार की ओर से जारी पांच अप्रैल 2018 के नोटिफिकेशन को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया कि संविधान में स्पष्ट प्रावधान है कि राज्यपाल ही किसी भी क्षेत्र को नगरपालिका में शामिल करने के लिए अधिकृत हैं और प्रावधान द्वारा प्रदत शक्ति किसी अन्य को हस्तांतरित नही की जा सकती है।
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सरकार की ओर से कहा गया कि उसके द्वारा किया गया कोई भी कार्य राज्यपाल द्वारा किया गया ही माना जाता है। इस प्रकरण पर कोर्ट ने आठ मई को सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था। अधिसूचना निरस्त होने के बाद चुनाव को लेकर असमंजस्य की स्थिति बन गई है। जानकारों के मुताबिक सरकार को पुराने परिसीमन के आधार पर चुनाव कराने पड़ सकते हैं।
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यह भी संभावना है कि पांच अप्रैल को जारी अधिसूचना को राज्यपाल के पास भेजकर उनसे जल्द निर्णय लेने का आग्रह किया जाए। हालांकि चुनाव निर्वाचन आयोग की ओर से जल्द चुनाव कराने की अन्य याचिका पर कोर्ट के रुख पर निर्भर करेगा।
हाईकोर्ट ने सरकार की ओर से जारी अधिसूचना निरस्त की, चुनाव के संभावित कार्यक्रम पर संशय बरकरार