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66 साल पुराने प्राणी संग्रहालय को दिया जा रहा नया स्वरूप
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डीएसबी नैनीताल
- फोटो : अमर उजाला
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नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर के जंतु विज्ञान विभाग में स्थित 66 साल पुराना प्राणी संग्रहालय बहुत जल्द नए स्वरूप में नजर आएगा। परिसर के विद्यार्थियों के साथ ही अन्य शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थी भी यहां दुर्लभ प्रजातियों का सरलता से अध्ययन कर सकेंगे।
सन 1952 में नैनीताल डीएसबी परिसर के जंतु विज्ञान विभाग में प्राणी संग्रहालय की स्थापना की गई थी। उस समय डीएसबी परिसर आगरा विश्वविद्यालय के अधीन था। उस दौर में डीएसबी परिसर के प्राणी संग्रहालय को आगरा विवि में सर्वश्रेष्ठ प्राणी संग्रहालय का दर्जा प्राप्त था। इस संग्रहालय को समय के साथ बदलने की आवश्यकताओं के बीच नया स्वरूप देने की पहल जंतुविज्ञान विभाग की ओर से की गई है। रूसा के तहत प्राणी संग्रहालय का कायाकल्प किया जा रहा है। जंतुविज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. एचसीएस बिष्ट का कहना है कि संग्रहालय में चिड़िया, समुद्री जीवों, पहाड़ी क्षेत्रों में पाए जाने वाले सांपों, मछलियों के साथ ही कई दुर्लभ प्रजातियों के नमूनों को संरक्षित किया गया है। बताया कि स्कूलों, शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को भी प्राणी संग्रहालय में अध्ययन के अवसर दिलाने पर परिसर प्रशासन विचार कर रहा है। बताया कि संग्रहालय में सभी शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को निशुल्क प्रवेश दिया जाएगा। कुमाऊं विवि में नोडल अधिकारी रूसा परियोजना प्रो. एसपीएस बिष्ट ने बताया कि करीब 30 लाख रुपये की लागत से प्राणी संग्रहालय को नया स्वरूप दिया जा रहा है। प्रो. बिष्ट ने बताया कि इस माह के अंत तक प्राणी संग्रहालय का काम पूरा होने की उम्मीद है।
66 साल पुराने प्राणी संग्रहालय को दिया जा रहा नया स्वरूप
1952 में डीएसबी के जंतु विज्ञान विभाग में स्थापित किया गया था प्राणी संग्रहालय
कई दुर्लभ प्रजाति के नमूनों को किया गया है संरक्षित
स्कूली बच्चों, शोधार्थियों को मिलेगा निशुल्क प्रवेश
प्राणी संग्रहालय को किया जाएगा डिजिटल
जीव विज्ञान विभाग की ओर से प्राणी संग्रहालय को डिजिटल करने पर विचार किया जा रहा है। प्रो. एचसीएस बिष्ट ने बताया कि संग्रहालय में संरक्षित नमूनों को डिजिटल करने का काम एमएससी जीवविज्ञान के विद्यार्थियों को प्रोजेक्ट के तौर पर करेंगे। बताया कि नमूनों की जानकारी को डिजिटल कर फोटो सहित कुमाऊं विवि की वेबसाइट पर जारी किया जाएगा।
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सन 1952 में नैनीताल डीएसबी परिसर के जंतु विज्ञान विभाग में प्राणी संग्रहालय की स्थापना की गई थी। उस समय डीएसबी परिसर आगरा विश्वविद्यालय के अधीन था। उस दौर में डीएसबी परिसर के प्राणी संग्रहालय को आगरा विवि में सर्वश्रेष्ठ प्राणी संग्रहालय का दर्जा प्राप्त था। इस संग्रहालय को समय के साथ बदलने की आवश्यकताओं के बीच नया स्वरूप देने की पहल जंतुविज्ञान विभाग की ओर से की गई है। रूसा के तहत प्राणी संग्रहालय का कायाकल्प किया जा रहा है। जंतुविज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. एचसीएस बिष्ट का कहना है कि संग्रहालय में चिड़िया, समुद्री जीवों, पहाड़ी क्षेत्रों में पाए जाने वाले सांपों, मछलियों के साथ ही कई दुर्लभ प्रजातियों के नमूनों को संरक्षित किया गया है। बताया कि स्कूलों, शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को भी प्राणी संग्रहालय में अध्ययन के अवसर दिलाने पर परिसर प्रशासन विचार कर रहा है। बताया कि संग्रहालय में सभी शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को निशुल्क प्रवेश दिया जाएगा। कुमाऊं विवि में नोडल अधिकारी रूसा परियोजना प्रो. एसपीएस बिष्ट ने बताया कि करीब 30 लाख रुपये की लागत से प्राणी संग्रहालय को नया स्वरूप दिया जा रहा है। प्रो. बिष्ट ने बताया कि इस माह के अंत तक प्राणी संग्रहालय का काम पूरा होने की उम्मीद है।
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66 साल पुराने प्राणी संग्रहालय को दिया जा रहा नया स्वरूप
1952 में डीएसबी के जंतु विज्ञान विभाग में स्थापित किया गया था प्राणी संग्रहालय
कई दुर्लभ प्रजाति के नमूनों को किया गया है संरक्षित
स्कूली बच्चों, शोधार्थियों को मिलेगा निशुल्क प्रवेश
प्राणी संग्रहालय को किया जाएगा डिजिटल
जीव विज्ञान विभाग की ओर से प्राणी संग्रहालय को डिजिटल करने पर विचार किया जा रहा है। प्रो. एचसीएस बिष्ट ने बताया कि संग्रहालय में संरक्षित नमूनों को डिजिटल करने का काम एमएससी जीवविज्ञान के विद्यार्थियों को प्रोजेक्ट के तौर पर करेंगे। बताया कि नमूनों की जानकारी को डिजिटल कर फोटो सहित कुमाऊं विवि की वेबसाइट पर जारी किया जाएगा।
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