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पहले दिन मेयर का एक भी नामांकन पत्र दाखिल नहीं

Sun, 21 Oct 2018 01:57 AM IST
Updated Sun, 21 Oct 2018 01:57 AM IST
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पहले दिन मेयर का एक भी नामांकन पत्र दाखिल नहीं
हल्द्वानी। मेयर की दावेदारी करते हुए शनिवार को 18 लोगों ने नामांकन पत्र खरीदे। हालांकि नामांकन पत्र जमा करने के लिए पहले दिन कोई भी दावेदार निर्वाचन अधिकारी के दफ्तर नहीं पहुंचा। मेयर पद के लिए कुल 22 नामांकन पत्रों की बिक्री हो चुकी है।
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शनिवार को मेयर पद के लिए सुमित कुमार हृदयेश, शिव गणेश, सुहेल अहमद, कैलाश चंद्र, सौरभ भट्ट, महेंद्र सिंह अधिकारी, खजान पांडे, गीता बल्यूटिया, मनोज कुमार जाटव, रूपेंद्र नागर, पदम पाल, योगेश शर्मा ने नामांकन पत्र खरीदे। मेयर के लिए कुल 22 नामांकन पत्रों की बिक्री हो चुकी है। निर्वाचन अधिकारी पंकज उपाध्याय के मुताबिक शनिवार से नामांकन पत्र जमा होने थे लेकिन शनिवार को मेयर के किसी भी दावेदार ने नामांकन पत्र जमा नहीं किया।
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मेयर के लिए अब तक कांग्रेस से ही पांच दावेदार
हल्द्वानी। निकाय चुनाव में कांग्रेस किसे मेयर का उम्मीदवार घोषित करेगी, यह तय नहीं हुआ है लेकिन टिकट की आस में कांग्रेस के पांच नेता मेयर का नामांकन पत्र खरीद चुके हैं। एक कांग्रेसी नेता ने तो बाकायदा दो नामांकन पत्र खरीदे हैं। ऐसे में टिकट वितरण के बाद पार्टी में असंतोष, घमासान होना तय है।
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नामांकन पत्र खरीदने की प्रक्रिया 17 अक्तूबर से शुरू हुई थी। 18 अक्तूबर को कांग्रेस के अब्दुल मतीन सिद्दीकी ने एक, ललित जोशी ने दो नामांकन पत्र खरीदे, जबकि शनिवार को तीन कांग्रेसी नेता नामांकन पत्र खरीदने पहुंच गए। इनमें पूर्व कबीना मंत्री इंदिरा हृदयेश के पुत्र सुमित हृदयेश, खजान पांडे, सुहेल अहमद सिद्दीकी शामिल हैं। खजान पांडे इससे पहले भी टिकट की दावेदारी कर चुके हैं लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी है जबकि सुहेल दो बार दर्जा राज्य मंत्री रह चुके हैं। नामांकन पत्र खरीदने वाले हर कांग्रेसी को उम्मीद है कि इस बार उन्हें ही टिकट मिलेगा।



नामांकन कराने पहुंचे तो सूची से गायब मिला नाम
हल्द्वानी। काठगोदाम क्षेत्र निवासी पूर्व सभासद प्रेमा शाही के पति शिवराज सिंह शनिवार को नामांकन कराने निर्वाचन दफ्तर पहुंचे थे लेकिन तब वह हैरत में पड़ गए जब उन्हें पता चला कि उनका और उनके परिवार के दो सदस्यों का नाम मतदाता सूची में दर्ज ही नहीं है। उन्होंने निर्वाचन अधिकारी पंकज उपाध्याय को बीएलओ द्वारा नाम दर्ज कराते वक्त दी गई रसीदें दिखाईं और बताया कि उनके अन्य परिजनों का नाम मतदाता सूची में दर्ज है लेकिन उनका और उनकी पत्नी आदि का नाम दर्ज नहीं है। बाद में उन्होंने तहसील में भी अपनी इस समस्या को रखा।
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