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मानहानि मामले में निचली अदालत का रिकार्ड तलब किया उच्च न्यायालय ने
Updated Tue, 05 Dec 2017 02:04 AM IST
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अदालत।
- फोटो : amar ujala
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नैनीताल। उच्च न्यायालय ने मानहानि के मामले में निचली अदालत से दोषमुक्त हुए अभियुक्तों से संबंधित निचली अदालत का रिकार्ड तलब किया है।
पिथौरागढ़ निवासी नंद सिंह कोश्यारी ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अल्मोड़ा के 13 मई 2016 के आदेश चुनौती दी थी। इस आदेश मेें मानहानि किये जाने के मामले में शिव सिंह सेमवाल और आदेश गुप्ता को दोषमुक्त कि या गया था। याचिका के मुताबिक शिव सिंह सेमवाल ‘पर्वत जन’ पत्रिका का संपादक हैं और उन्होंने अपनी पत्रिका के दिसंबर 2006 के अंक पांच के पृष्ठ16 व 17 में नंद सिंह कोेश्यारी केसगे भाई भगत सिंह कोश्यारी के विरुद्ध उन्हें अपमानित करने व उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने के आशय से लेख प्रकाशित किया। इस लेख में कहा गया कि होटल व्यवसायी और प्रिंटिंग प्रेस मालिक भाई नंदन सिंह कोश्यारी को मुख्यमंत्री के विवेकाधीन कोष से दो लाख रुपये भगत सिंह कोश्यारी ने ही स्वीकृत कराये। याचिका में कहा इस लेख से उनके भाई की छवि धूमिल हुई है। इस प्रकरण में निचली अदालत ने अभियुक्तों को दोषमुक्त कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ याची ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ ने पक्षों की सुनवाई के बाद याचिका को स्वीकार कर निचली अदालत का रिकार्ड तलब किया।
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पिथौरागढ़ निवासी नंद सिंह कोश्यारी ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अल्मोड़ा के 13 मई 2016 के आदेश चुनौती दी थी। इस आदेश मेें मानहानि किये जाने के मामले में शिव सिंह सेमवाल और आदेश गुप्ता को दोषमुक्त कि या गया था। याचिका के मुताबिक शिव सिंह सेमवाल ‘पर्वत जन’ पत्रिका का संपादक हैं और उन्होंने अपनी पत्रिका के दिसंबर 2006 के अंक पांच के पृष्ठ16 व 17 में नंद सिंह कोेश्यारी केसगे भाई भगत सिंह कोश्यारी के विरुद्ध उन्हें अपमानित करने व उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने के आशय से लेख प्रकाशित किया। इस लेख में कहा गया कि होटल व्यवसायी और प्रिंटिंग प्रेस मालिक भाई नंदन सिंह कोश्यारी को मुख्यमंत्री के विवेकाधीन कोष से दो लाख रुपये भगत सिंह कोश्यारी ने ही स्वीकृत कराये। याचिका में कहा इस लेख से उनके भाई की छवि धूमिल हुई है। इस प्रकरण में निचली अदालत ने अभियुक्तों को दोषमुक्त कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ याची ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ ने पक्षों की सुनवाई के बाद याचिका को स्वीकार कर निचली अदालत का रिकार्ड तलब किया।