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उच्चशिक्षामंत्री के वायदे कितने अधूरे, कैसे होगी महाविद्यालयों में पढ़ाई
Updated Fri, 23 Jun 2017 11:35 PM IST
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वादे पूरे करने के लिए भी होते हैं मंत्री जी
हल्द्वानी।
उच्चशिक्षामंत्री डा. धनसिंह रावत ने राजकीय महाविद्यालयों में पहली जुलाई से नया शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले प्राचार्यों, प्राध्यापकों की तैनाती करने समेत कई वायदे किए थे। हाल यह है कि नया सत्र शुरू होने में अब केवल एक सप्ताह ही बाकी है, मगर उच्चशिक्षामंत्री अपने सभी वायदे पूरे नहीं कर सके।
बिना प्राध्यापकों एवं प्राचार्यों के महाविद्यालयों में पढ़ाई कैसे सुचारु होगी, इसको लेकर शासन एवं उच्चशिक्षा विभाग की कोई तैयारी नहीं है। उच्चशिक्षा मंत्री ने महाविद्यालयों में छात्र-छात्राओं की 75 प्रतिशत उपस्थिति की अनिवार्यता को सख्ती से लागू करने के मकसद से सभी में छात्रों के लिए भी बायोमैट्रिक मशीनें की बात कही थी, मगर यह भी अधूरी है।
15 कॉलेज अभी भी प्राचार्य विहीन
उच्चशिक्षा मंत्री ने यहां नैनीताल में 19 अप्रैल को विभागीय समीक्षा बैठक में इस बात की घोषणा की थी कि नया शिक्षा सत्र 2017-18 शुरू होने से पहले प्रदेश के सभी डिग्री कालेजों में प्राचार्य पहुंच जाएंगे। साथ ही कोई कॉलेज प्राचार्य विहीन नहीं रहेगा लेकिन दो माह बीतने के बाद भी यह दावा पूरा नहीं हो सका है।
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डीपीसी के बाद शासन ने प्रदेश के 58 डिग्री कॉलेजों में प्राचार्यों के रिक्त पदों पर तैनाती की थी। प्राचार्यों को 17 जून तक हर हाल में ज्वाइन करने के आदेश दिए गए थे लेकिन इनमें से 15 डिग्री कालेजों में प्राचार्यों ने ज्वाइन नहीं किया। इस कारण कपकोट, स्याल्दे, माजरा महादेव, गैरसैंण, पोखड़ा, पोखरी पट्टी क्वीली, दुर्गनाकुरी, तल्ला सल्ट, गुप्तकाशी, उफरैखाल, त्यूनी, बेदीखाल, बड़कोट, तलवाड़ी, थलीसैंण महाविद्यालय प्राचार्य विहीन हैं।
588 प्राध्यापकों की नहीं हुई तैनाती
प्रदेश के 100 डिग्री कालेजों में प्राध्यापकों के कुल 2084 पद स्वीकृत हैं मगर इसके सापेक्ष मात्र 1092 पदों पर नियमित प्राध्यापक तैनात हैं। इसके अलावा 404 पदों पर संविदा/गेस्ट प्राध्यापक कार्यरत हैं। इस तरह प्राध्यापकों के 588 पद रिक्त हैं।
उच्चशिक्षा मंत्री का दावा था कि जुलाई में नया शिक्षा सत्र शुरू होने से पूर्व रिक्त पदों पर तैनाती हो जाएगी मगर यह दावा अधूरा ही रहा। स्थिति जस की तस है। बिना प्राध्यापकों के पढ़ाई कैसे बेहतर होगी, यह तो उच्चशिक्षामंत्री ही जानें।
बिना सिस्टम के ऑनलाइन प्रवेश
पहली जुलाई से प्रारंभ होने वाले नये शिक्षा सत्र में महाविद्यालयों में इस बार ऑनलाइन प्रवेश किए जाने का दावा भी किया गया था। कुमाऊं विश्वविद्यालय ने ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया शुरू भी कर दी लेकिन पर्वतीय दूरस्थ क्षेत्रों में संचार सुविधाएं बेहतर न होने के कारण विद्यार्थी ऑनलाइन प्रवेश के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।
पतलोट, बेतालघाट, पोखड़ा, ब्रह्मखाल, दुर्गनाकुरी, मांसी, लमगड़ा समेत कई महाविद्यालय हैं जहां इंटरनेट की समस्या है। महाविद्यालयों में पर्याप्त कंप्यूटर तक नहीं हैं। माजरा महादेव महाविद्यालय में तो विद्युत कनेक्शन ही नहीं है। हल्द्वानी के एमबी कालेज जहां करीब 12 हजार प्रवेश होते हैं वहां भी ऑनलाइन प्रवेश के लिए कोई सिस्टम नहीं है।
10 वर्षों से जमे प्राध्यापकों के नहीं हुए तबादले
उच्चशिक्षामंत्री ने दावा किया था कि महाविद्यालयों में 10 वर्षों से अधिक समय से जमे प्राध्यापकों के तबादले किए जाएंगे मगर यह दावा भी अधूरा ही रहा। हल्द्वानी एमबीपीजी कालेज ही को लें यहां 10 नहीं बल्कि 17 वर्षों से प्राध्यापक जमे हैं इनका अन्यत्र तबादला नहीं हुआ।
इसी तरह मंत्री ने यह भी दावा किया था प्रमोशन होने पर जो प्राध्यापक प्राचार्य के पद पर ज्वाइन नहीं करेगा, उसे उस महाविद्यालय से हटाकर दूसरे महाविद्यालय में स्थानांतरित किया जाएगा, पर कुछ नहीं हुआ।
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हल्द्वानी।
उच्चशिक्षामंत्री डा. धनसिंह रावत ने राजकीय महाविद्यालयों में पहली जुलाई से नया शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले प्राचार्यों, प्राध्यापकों की तैनाती करने समेत कई वायदे किए थे। हाल यह है कि नया सत्र शुरू होने में अब केवल एक सप्ताह ही बाकी है, मगर उच्चशिक्षामंत्री अपने सभी वायदे पूरे नहीं कर सके।
बिना प्राध्यापकों एवं प्राचार्यों के महाविद्यालयों में पढ़ाई कैसे सुचारु होगी, इसको लेकर शासन एवं उच्चशिक्षा विभाग की कोई तैयारी नहीं है। उच्चशिक्षा मंत्री ने महाविद्यालयों में छात्र-छात्राओं की 75 प्रतिशत उपस्थिति की अनिवार्यता को सख्ती से लागू करने के मकसद से सभी में छात्रों के लिए भी बायोमैट्रिक मशीनें की बात कही थी, मगर यह भी अधूरी है।
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15 कॉलेज अभी भी प्राचार्य विहीन
उच्चशिक्षा मंत्री ने यहां नैनीताल में 19 अप्रैल को विभागीय समीक्षा बैठक में इस बात की घोषणा की थी कि नया शिक्षा सत्र 2017-18 शुरू होने से पहले प्रदेश के सभी डिग्री कालेजों में प्राचार्य पहुंच जाएंगे। साथ ही कोई कॉलेज प्राचार्य विहीन नहीं रहेगा लेकिन दो माह बीतने के बाद भी यह दावा पूरा नहीं हो सका है।
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डीपीसी के बाद शासन ने प्रदेश के 58 डिग्री कॉलेजों में प्राचार्यों के रिक्त पदों पर तैनाती की थी। प्राचार्यों को 17 जून तक हर हाल में ज्वाइन करने के आदेश दिए गए थे लेकिन इनमें से 15 डिग्री कालेजों में प्राचार्यों ने ज्वाइन नहीं किया। इस कारण कपकोट, स्याल्दे, माजरा महादेव, गैरसैंण, पोखड़ा, पोखरी पट्टी क्वीली, दुर्गनाकुरी, तल्ला सल्ट, गुप्तकाशी, उफरैखाल, त्यूनी, बेदीखाल, बड़कोट, तलवाड़ी, थलीसैंण महाविद्यालय प्राचार्य विहीन हैं।
588 प्राध्यापकों की नहीं हुई तैनाती
प्रदेश के 100 डिग्री कालेजों में प्राध्यापकों के कुल 2084 पद स्वीकृत हैं मगर इसके सापेक्ष मात्र 1092 पदों पर नियमित प्राध्यापक तैनात हैं। इसके अलावा 404 पदों पर संविदा/गेस्ट प्राध्यापक कार्यरत हैं। इस तरह प्राध्यापकों के 588 पद रिक्त हैं।
उच्चशिक्षा मंत्री का दावा था कि जुलाई में नया शिक्षा सत्र शुरू होने से पूर्व रिक्त पदों पर तैनाती हो जाएगी मगर यह दावा अधूरा ही रहा। स्थिति जस की तस है। बिना प्राध्यापकों के पढ़ाई कैसे बेहतर होगी, यह तो उच्चशिक्षामंत्री ही जानें।
बिना सिस्टम के ऑनलाइन प्रवेश
पहली जुलाई से प्रारंभ होने वाले नये शिक्षा सत्र में महाविद्यालयों में इस बार ऑनलाइन प्रवेश किए जाने का दावा भी किया गया था। कुमाऊं विश्वविद्यालय ने ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया शुरू भी कर दी लेकिन पर्वतीय दूरस्थ क्षेत्रों में संचार सुविधाएं बेहतर न होने के कारण विद्यार्थी ऑनलाइन प्रवेश के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।
पतलोट, बेतालघाट, पोखड़ा, ब्रह्मखाल, दुर्गनाकुरी, मांसी, लमगड़ा समेत कई महाविद्यालय हैं जहां इंटरनेट की समस्या है। महाविद्यालयों में पर्याप्त कंप्यूटर तक नहीं हैं। माजरा महादेव महाविद्यालय में तो विद्युत कनेक्शन ही नहीं है। हल्द्वानी के एमबी कालेज जहां करीब 12 हजार प्रवेश होते हैं वहां भी ऑनलाइन प्रवेश के लिए कोई सिस्टम नहीं है।
10 वर्षों से जमे प्राध्यापकों के नहीं हुए तबादले
उच्चशिक्षामंत्री ने दावा किया था कि महाविद्यालयों में 10 वर्षों से अधिक समय से जमे प्राध्यापकों के तबादले किए जाएंगे मगर यह दावा भी अधूरा ही रहा। हल्द्वानी एमबीपीजी कालेज ही को लें यहां 10 नहीं बल्कि 17 वर्षों से प्राध्यापक जमे हैं इनका अन्यत्र तबादला नहीं हुआ।
इसी तरह मंत्री ने यह भी दावा किया था प्रमोशन होने पर जो प्राध्यापक प्राचार्य के पद पर ज्वाइन नहीं करेगा, उसे उस महाविद्यालय से हटाकर दूसरे महाविद्यालय में स्थानांतरित किया जाएगा, पर कुछ नहीं हुआ।