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कॉर्बेट लेंडस्केप में हाथी टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ने से हो रहे हैं आक्रामक
Updated Wed, 22 Nov 2017 02:02 AM IST
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रामनगर (नैनीताल)। कार्बेट नेशनल पार्क में घूमने आए पर्यटकों को हाथी को नजदीक से देखने की इच्छा पूरी नहीं कर पाए। कारण यह था कि यह हाथी का व्यवहार आक्रामक था। वन्य विशेषज्ञों के मुताबिक मद में चूर हाथी इस तरह का व्यवहार करते हैं इस हाथी को देखने के बाद कॉर्बेट प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। मंगलवार को झिरना रेंज में नाले के पास ऐसे हाथी को देख कर नेचर गाइड ने पर्यटकों की जिप्सी को दूरी पर ही रोक लिया था।
वन्यजीव विशेषज्ञ दीप रजवार का कहना है कि मस्त नर हाथियों में एक ऐसी अवस्था होती है, जिनमें उनके मस्तिष्क में स्थित टेंपोरल ग्लांड्स (लौकिक ग्रंथियों) से एक द्रव्य बहता है जो नर हाथी के व्यवहार को बेहद आक्रामक बना देता है। एक हाथी में लौकिक का स्तर सामान्य से 60 गुना अधिक हो जाता है। इसी कारण जाड़े में इस अवस्था के दौरान नर हाथी अत्यधिक हिंसक हो जाते हैं। कुछ दिन पहले एक मस्त टस्कर के हमले में सीटीआर की एक पालतू मादा हथिनी घायल हो गई थी। मस्त अवस्था उत्तेजना या प्रभुत्व स्थापित करने से जुड़ा है, जंगली नर हाथी ऐसे में अक्सर एक विशेष प्रकार की आवाज (चिंगाढ़) निकालते हैं, (जिसे मुंह गड़गड़ाहट कहा जाता है)। अन्य हाथी इस आवाज को काफी दूरी से सुन लेते हैं। यह आवाज विरोधी नर हाथियों के लिए एक प्रकार की चेतावनी होती है जबकि मिलन के लिए तैयार मादा हथनियों के लिए एक आमंत्रण। ऐसे उद्दंड नर हाथियों को झुंड से निकाल दिया जाता है। वर्ना वह बच्चों के लिए खतरनाक हो जाते हैं। ऐसी अवस्था में नर हाथी अपने को ठंडा करने के लिए शरीर पर धूल, कीचड़, पानी डालते हैं तो कभी वह आक्रामक होकर पेड़ों को तोड़ देते हैं।
कॉर्बेट लैंडस्केप में सतर्कता बढ़ाई गई
विशेषज्ञों के मुताबिक मद में चूर हाथी होता है आक्रामक
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वन्यजीव विशेषज्ञ दीप रजवार का कहना है कि मस्त नर हाथियों में एक ऐसी अवस्था होती है, जिनमें उनके मस्तिष्क में स्थित टेंपोरल ग्लांड्स (लौकिक ग्रंथियों) से एक द्रव्य बहता है जो नर हाथी के व्यवहार को बेहद आक्रामक बना देता है। एक हाथी में लौकिक का स्तर सामान्य से 60 गुना अधिक हो जाता है। इसी कारण जाड़े में इस अवस्था के दौरान नर हाथी अत्यधिक हिंसक हो जाते हैं। कुछ दिन पहले एक मस्त टस्कर के हमले में सीटीआर की एक पालतू मादा हथिनी घायल हो गई थी। मस्त अवस्था उत्तेजना या प्रभुत्व स्थापित करने से जुड़ा है, जंगली नर हाथी ऐसे में अक्सर एक विशेष प्रकार की आवाज (चिंगाढ़) निकालते हैं, (जिसे मुंह गड़गड़ाहट कहा जाता है)। अन्य हाथी इस आवाज को काफी दूरी से सुन लेते हैं। यह आवाज विरोधी नर हाथियों के लिए एक प्रकार की चेतावनी होती है जबकि मिलन के लिए तैयार मादा हथनियों के लिए एक आमंत्रण। ऐसे उद्दंड नर हाथियों को झुंड से निकाल दिया जाता है। वर्ना वह बच्चों के लिए खतरनाक हो जाते हैं। ऐसी अवस्था में नर हाथी अपने को ठंडा करने के लिए शरीर पर धूल, कीचड़, पानी डालते हैं तो कभी वह आक्रामक होकर पेड़ों को तोड़ देते हैं।
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कॉर्बेट लैंडस्केप में सतर्कता बढ़ाई गई
विशेषज्ञों के मुताबिक मद में चूर हाथी होता है आक्रामक