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बाघों की गणना होगी
Updated Sun, 25 Feb 2018 02:33 AM IST
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हल्द्वानी। तराई के जंगल से उत्तर प्रदेश और नेपाल सीमा तक कैमरा ट्रैप लगा कर बाघों की गणना शुरू हो गई है। गणना में विश्व प्रकृति निधि (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) और ज्योलॉजिकल सोसायटी ऑफ लंदन (जेएसएल) की मदद ली जा रही है। एक महीने तक इन कैमरों से बाघों की निगरानी की जाएगी।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण अधिकरण (एनटीसीए) के मानकों के अनुरूप 200 वर्ग किमी क्षेत्रफल के जंगल में बाघों की गणना शुरू हो गई है। पहले चरण में तराई पूर्वी, हल्द्वानी, चंपावत वन प्रभागों में बाघों की गणना की जाएगी। तराई पूर्वी वन प्रभाग की गौला से शांतिपुरी तक नौ रेंजों में 447 कैमरे लगाए गए हैं। इस प्रभाग का कंट्रोल रूम बाराकोली रेंज मुख्यालय में स्थापित किया गया है। हल्द्वानी वन प्रभाग की पांच रेंजों, अभ्यारण्य में कुल 420 कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। इनका कंट्रोल रूम चोरगलिया रेंज दफ्तर में स्थापित किया गया है। वहीं चंपावत में 80 कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरे में 24 फरवरी से 24 मार्च तक बाघों की आवाजाही रिकॉर्ड की जाएगी। कैमरों में कैद तस्वीरों का रिकार्ड वन्यजीव संस्थान देहरादून भेजा जाएगा।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण अधिकरण करवा रहा यह गणना
पहले चरण में तराई पूर्वी, हल्द्वानी, चंपावत में कैमरे लगाए गए
मोबाइल एप से गणना पूरी हुई
हल्द्वानी। बाघों की गणना में इस बार इकोलॉजिकल मोबाइल एप का भी इस्तेमाल किया गया है। इस एप में बाघ, आहार, वासस्थल आदि का पूर्ण विवरण देना होगा। बाद में इस एप में आए डाटा को वन्यजीव संस्थान भेजा जाएगा। फिलहाल तराई पूर्वी, हल्द्वानी वन प्रभागों में एप से गणना का काम पूरा हो गया है।
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एमपी, कोटा विवि के भी स्कॉलर कर रहे मदद
हल्द्वानी। बाघों की गणना में मध्य प्रदेश, कुमाऊं विवि, कोटा विवि के 15-20 विज्ञान परास्नातक के विद्यार्थी, शोधार्थी, एमएससी, पीएचडी स्कॉलर आदि भी मदद कर रहे हैं। ये सभी कैमरा ट्रैप की देखरेख में वनकर्मियों की मदद करेंगे।
बाघों की गणना के लिए कैमरा ट्रैप स्थापित कर दिए हैं। एक माह तक कैमरा की मदद से बाघों की आवाजाही का डाटा तैयार होगा। फिर बाघों की गणना का परिणाम सामने आएगा।
-डॉ. पराग मधुकर धकाते
वन संरक्षक, पश्चिमी वृत्त, हल्द्वानी
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राष्ट्रीय बाघ संरक्षण अधिकरण (एनटीसीए) के मानकों के अनुरूप 200 वर्ग किमी क्षेत्रफल के जंगल में बाघों की गणना शुरू हो गई है। पहले चरण में तराई पूर्वी, हल्द्वानी, चंपावत वन प्रभागों में बाघों की गणना की जाएगी। तराई पूर्वी वन प्रभाग की गौला से शांतिपुरी तक नौ रेंजों में 447 कैमरे लगाए गए हैं। इस प्रभाग का कंट्रोल रूम बाराकोली रेंज मुख्यालय में स्थापित किया गया है। हल्द्वानी वन प्रभाग की पांच रेंजों, अभ्यारण्य में कुल 420 कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। इनका कंट्रोल रूम चोरगलिया रेंज दफ्तर में स्थापित किया गया है। वहीं चंपावत में 80 कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरे में 24 फरवरी से 24 मार्च तक बाघों की आवाजाही रिकॉर्ड की जाएगी। कैमरों में कैद तस्वीरों का रिकार्ड वन्यजीव संस्थान देहरादून भेजा जाएगा।
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राष्ट्रीय बाघ संरक्षण अधिकरण करवा रहा यह गणना
पहले चरण में तराई पूर्वी, हल्द्वानी, चंपावत में कैमरे लगाए गए
मोबाइल एप से गणना पूरी हुई
हल्द्वानी। बाघों की गणना में इस बार इकोलॉजिकल मोबाइल एप का भी इस्तेमाल किया गया है। इस एप में बाघ, आहार, वासस्थल आदि का पूर्ण विवरण देना होगा। बाद में इस एप में आए डाटा को वन्यजीव संस्थान भेजा जाएगा। फिलहाल तराई पूर्वी, हल्द्वानी वन प्रभागों में एप से गणना का काम पूरा हो गया है।
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एमपी, कोटा विवि के भी स्कॉलर कर रहे मदद
हल्द्वानी। बाघों की गणना में मध्य प्रदेश, कुमाऊं विवि, कोटा विवि के 15-20 विज्ञान परास्नातक के विद्यार्थी, शोधार्थी, एमएससी, पीएचडी स्कॉलर आदि भी मदद कर रहे हैं। ये सभी कैमरा ट्रैप की देखरेख में वनकर्मियों की मदद करेंगे।
बाघों की गणना के लिए कैमरा ट्रैप स्थापित कर दिए हैं। एक माह तक कैमरा की मदद से बाघों की आवाजाही का डाटा तैयार होगा। फिर बाघों की गणना का परिणाम सामने आएगा।
-डॉ. पराग मधुकर धकाते
वन संरक्षक, पश्चिमी वृत्त, हल्द्वानी