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कंज्यूमर प्रोटेक् श बिल का आईएमए ने किया विरोध
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हल्द्वानी। एनएमसी बिल 2017, कंज्यूमर प्रोटेक्शन बिल 2018 का आईएमए ने विरोध किया है। कहा कि एनएमसी बिल 2017 के आने से मेडिकल की पढ़ाई महंगी होने के साथ ही निजी मेडिकल कॉलेजों में मैनेजमेंट की सीटें मनमानी तरीके से भरी जाएंगी।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) हल्द्वानी के अध्यक्ष डॉ. डीसी पंत, सचिव डॉ. प्रदीप पांडे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि एनएमसी बिल 2017 आने से पहले निजी मेडिकल कॉलेज में 85 प्रतिशत सीटें नीट के तहत थी। जबकि 15 प्रतिशत सीटें मैनेजमेंट कोटे की थीं। बिल आने के बाद मैनेजमेंट कोटे की सीटें 50 प्रतिशत हो गई हैं। आरोप लगाया कि निजी मेडिकल कॉलेज अधिकतर सांसदों, विधायकों के हैं। मैनेजमेंट कोटा बढ़ने से मनमानी फीस छात्र-छात्राओं से वसूली जाएगी। कहा कि कंज्यूमर प्रोटेक्शन बिल 2018 में मुआवजा काफी बढ़ा दिया गया है। डॉक्टरों को अपने अस्पतालों, क्लीनिकों, नर्सिंग होम का महंगा इंश्योरेंस कराना पड़ेगा साथ ही ईएमआई भी अधिक भरनी पड़ेगी। कहा कि ब्रिज कोर्स को राज्य सरकार का विषय बताकर केंद्र सरकार ने पल्ला झाड़ लिया है। उत्तराखंड में राज्य सरकार ब्रिज कोर्स करा रही है। ब्रिज कोर्स का कोई औचित्य नहीं है। डॉ. पांडे ने कहा कि कंज्यूमर प्रोटेक्शन बिल में मेडिकल को 1994 में जोड़ा गया। सबसे अधिक जुर्माना भी डॉक्टरों पर लगा है। कहा कि आईएमए के केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर आंदोलन जारी रखा जाएगा। इस दौरान डॉ. आरए केडिया, डॉ. अनिल अग्रवाल, डॉ. कैलाश शर्मा, डॉ. भूपेंद्र बिष्ट, डॉ. उपेंद्र ओली, डॉ. मोहन सती आदि थे।
कंज्यूमर प्रोटेक्शन बिल का आईएमए ने किया विरोध
क्षतिपूर्ति की बढ़ा दी गई है रकम, इंश्योरेंस के लिए अधिक ईएमआई देनी होगी
ब्रिज कोर्स का भी विरोध, एनएमसी आने से मैनेजमेंट कोटे की सीटें बढ़ेगी
काला फीता बांधकर डॉक्टरों ने किया काम
हल्द्वानी। कंज्यूमर प्रोटेक्शन बिल 2018, एनएमसी बिल 2017 और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को अलोकतांत्रिक तरीके से समाप्त किए जाने के विरोध में शुक्रवार को डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर काम किया। सभी निजी अस्पतालों, क्लीनिकों में आईएमए के आह्वान पर डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर मरीजों को देखा।
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) हल्द्वानी के अध्यक्ष डॉ. डीसी पंत, सचिव डॉ. प्रदीप पांडे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि एनएमसी बिल 2017 आने से पहले निजी मेडिकल कॉलेज में 85 प्रतिशत सीटें नीट के तहत थी। जबकि 15 प्रतिशत सीटें मैनेजमेंट कोटे की थीं। बिल आने के बाद मैनेजमेंट कोटे की सीटें 50 प्रतिशत हो गई हैं। आरोप लगाया कि निजी मेडिकल कॉलेज अधिकतर सांसदों, विधायकों के हैं। मैनेजमेंट कोटा बढ़ने से मनमानी फीस छात्र-छात्राओं से वसूली जाएगी। कहा कि कंज्यूमर प्रोटेक्शन बिल 2018 में मुआवजा काफी बढ़ा दिया गया है। डॉक्टरों को अपने अस्पतालों, क्लीनिकों, नर्सिंग होम का महंगा इंश्योरेंस कराना पड़ेगा साथ ही ईएमआई भी अधिक भरनी पड़ेगी। कहा कि ब्रिज कोर्स को राज्य सरकार का विषय बताकर केंद्र सरकार ने पल्ला झाड़ लिया है। उत्तराखंड में राज्य सरकार ब्रिज कोर्स करा रही है। ब्रिज कोर्स का कोई औचित्य नहीं है। डॉ. पांडे ने कहा कि कंज्यूमर प्रोटेक्शन बिल में मेडिकल को 1994 में जोड़ा गया। सबसे अधिक जुर्माना भी डॉक्टरों पर लगा है। कहा कि आईएमए के केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर आंदोलन जारी रखा जाएगा। इस दौरान डॉ. आरए केडिया, डॉ. अनिल अग्रवाल, डॉ. कैलाश शर्मा, डॉ. भूपेंद्र बिष्ट, डॉ. उपेंद्र ओली, डॉ. मोहन सती आदि थे।
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कंज्यूमर प्रोटेक्शन बिल का आईएमए ने किया विरोध
क्षतिपूर्ति की बढ़ा दी गई है रकम, इंश्योरेंस के लिए अधिक ईएमआई देनी होगी
ब्रिज कोर्स का भी विरोध, एनएमसी आने से मैनेजमेंट कोटे की सीटें बढ़ेगी
काला फीता बांधकर डॉक्टरों ने किया काम
हल्द्वानी। कंज्यूमर प्रोटेक्शन बिल 2018, एनएमसी बिल 2017 और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को अलोकतांत्रिक तरीके से समाप्त किए जाने के विरोध में शुक्रवार को डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर काम किया। सभी निजी अस्पतालों, क्लीनिकों में आईएमए के आह्वान पर डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर मरीजों को देखा।
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